Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना: सौ जिलों में कृषि सुधार के आंकड़े सामने आए

08 सितंबर 2026, नई दिल्ली: प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना: सौ जिलों में कृषि सुधार के आंकड़े सामने आए – केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बीते सप्ताह प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) की प्रगति की समीक्षा की। कृषि मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच योजना में शामिल जिलों का औसत प्रदर्शन स्कोर 22.54 से बढ़कर 38.85 तक पहुंच गया है।

यह सुधार करीब साढ़े सोलह अंकों का है और महज चार महीने के भीतर दर्ज हुआ है। मंत्रालय का कहना है कि यह गति योजना के तय लक्ष्यों के अनुरूप है और आने वाले महीनों में और तेज होगी।

धन-धान्य कृषि योजना पिछले साल अक्टूबर 2025 में शुरू हुई थी। इसका मकसद देश के उन जिलों की मदद करना है जहां खेती की उत्पादकता राष्ट्रीय औसत से काफी पीछे है।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

किन जिलों में और कैसे हो रहा है काम

यह योजना देश के 100 ऐसे जिलों में चल रही है जिन्हें कम उत्पादकता, कम फसल तीव्रता और कमजोर कर्ज पहुंच के आधार पर चुना गया था। इनमें बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और तमिलनाडु सहित कई राज्यों के जिले शामिल हैं।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

योजना के तहत 11 केंद्रीय मंत्रालयों की 36 अलग-अलग योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया है, ताकि किसानों को एक ही जिले में सिंचाई, बीज, कर्ज और बाजार से जुड़ी सभी सुविधाएं मिल सकें। इसकी प्रगति 121 संकेतकों से मापी जा रही है, जिसमें 74 आउटपुट और 47 परिणाम आधारित संकेतक शामिल हैं।

समीक्षा बैठक में सामने आए आंकड़ों के अनुसार कृषि उत्पादकता का संकेतक 2.53 से बढ़कर 6.70 हो गया है। फसल विविधता का स्कोर 5.60 से 8.65 तक पहुंचा है, जबकि सिंचाई बुनियादी ढांचे में 1.65 से 4.20 तक सुधार दर्ज हुआ है। कृषि ऋण तक किसानों की पहुंच भी 2.81 से बढ़कर 5.59 हो गई है।

प्रशिक्षण और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा

योजना के तहत जनवरी से जुलाई 2026 के बीच करीब 6.90 लाख किसानों और 88,961 कृषि कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसी अवधि में 2.20 लाख से अधिक किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े हैं।

मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि योजना का मकसद केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय को स्थायी तौर पर बढ़ाना है। इसके लिए सिंचाई, बीज, कर्ज और बाजार तक पहुंच को एक साथ बेहतर किया जा रहा है, ताकि किसान को हर काम के लिए अलग-अलग दफ्तर न जाना पड़े।

गौरतलब है कि इस विशिष्ट समीक्षा बैठक की अलग प्रेस विज्ञप्ति पीआईबी (pib.gov.in) की वेबसाइट पर अभी उपलब्ध नहीं है। यह जानकारी कृषि मंत्रालय के हवाले से प्रकाशित समाचार रिपोर्टों पर आधारित है, हालांकि योजना की मूल मंजूरी की पुष्टि पीआईबी की प्रेस विज्ञप्ति से होती है।

कृषि मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि हर तीन महीने में इन 100 जिलों के स्कोर की समीक्षा की जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर योजना में सुधार किया जा सके। जिन जिलों में प्रगति धीमी पाई जाएगी, वहां राज्य सरकारों के साथ मिलकर अलग से कार्ययोजना बनाने की बात भी कही जा रही है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जिलावार निगरानी से यह पता लगाना आसान होता है कि किस इलाके में सिंचाई की कमी है और कहां किसानों को कर्ज नहीं मिल पा रहा। इसी आधार पर आगे की योजनाएं और बजट तय किए जाते हैं, जिससे संसाधनों का इस्तेमाल जरूरतमंद जिलों में पहले हो सके।

यह खबर किसानों और कृषि-इनपुट कारोबार के लिए क्यों मायने रखती है: अगर कोई जिला उन 100 जिलों में शामिल है जहां धन-धान्य कृषि योजना लागू है, तो वहां सिंचाई अनुदान, बीज सहायता और कृषि ऋण की योजनाओं का सीधा लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाती है। कृषि-इनपुट कारोबार से जुड़े लोगों के लिए यह संकेत है कि इन जिलों में ड्रिप सिंचाई उपकरण, गुणवत्तापूर्ण बीज और प्राकृतिक खेती से जुड़े उत्पादों की मांग आने वाले महीनों में बढ़ सकती है, क्योंकि सरकार इन इलाकों पर विशेष ध्यान दे रही है।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture