राज्य कृषि समाचार (State News)

बिहार में खाद की बिक्री होगी ऑनलाइन, किसानों को क्यूआर कोड से मिलेगा उर्वरक

नई व्यवस्था से खाद वितरण में पारदर्शिता की उम्मीद, जमीन और फसल की जानकारी के आधार पर तय होगी जरूरत

02 सितंबर 2026, पटना: बिहार में खाद की बिक्री होगी ऑनलाइन, किसानों को क्यूआर कोड से मिलेगा उर्वरक – बिहार में किसानों को खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया जा रहा है। उर्वरक की बिक्री को चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन किया जा रहा है। कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के अनुसार प्रदेश के 19 जिलों में ऑनलाइन व्यवस्था शुरू कर दी गई है, जबकि आगामी चरण में इसे सभी जिलों तक लागू करने की तैयारी है।

नई व्यवस्था में किसान की पहचान, जमीन और बोई गई फसल से संबंधित जानकारी के आधार पर उसकी उर्वरक आवश्यकता तय की जाएगी। इसके बाद किसान को क्यूआर कोड उपलब्ध कराया जाएगा। इस क्यूआर कोड के माध्यम से किसान निर्धारित अधिकृत विक्रेता से खाद खरीद सकेगा। क्यूआर कोड की वैधता तीन दिनों तक रहेगी।

कृषि विभाग ने ऑनलाइन व्यवस्था के लिए बिक्री आवेदन प्रणाली तैयार की है। इसमें आईएफएमएस और एग्रीस्टैक को एकीकृत किया गया है। सरकार का उद्देश्य उर्वरक की खरीद-बिक्री को अधिक पारदर्शी बनाना और वास्तविक जरूरतमंद किसानों तक खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

किसान पहचान से जुड़ेगा जमीन का रिकॉर्ड

जिन किसानों की जमीन संबंधी जानकारी किसान रजिस्ट्री में पहले से उपलब्ध है, उनके जरूरी विवरण फार्मर आईडी के माध्यम से प्राप्त किए जाएंगे। इससे किसान की पहचान और उसके पास उपलब्ध कृषि भूमि की जानकारी डिजिटल रूप से जुड़ जाएगी।

नई व्यवस्था में उन किसानों के लिए भी रास्ता रखा गया है, जिनकी जमीन संबंधी जानकारी अभी किसान रजिस्ट्री में दर्ज नहीं है। ऐसे किसान बिक्री आवेदन प्रणाली पर पंजीकरण कर खाद प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें संबंधित खेत की खाता और खसरा संख्या, क्षेत्रफल तथा बोई गई फसल की जानकारी देनी होगी।

पायलट परियोजना के बाद विस्तार

उर्वरक की ऑनलाइन बिक्री की पायलट परियोजना पहले वैशाली और शेखपुरा जिलों में शुरू की गई थी। इसके अनुभव के बाद अब व्यवस्था का विस्तार किया जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि ऑनलाइन बिक्री से खाद की कालाबाजारी और अनियमित वितरण पर रोक लगाने में मदद मिलेगी तथा किसान को अपनी जरूरत के अनुसार उर्वरक प्राप्त करने में सुविधा होगी। नई व्यवस्था लागू होने के बाद खाद वितरण की निगरानी डिजिटल माध्यम से होने और किसान तक उर्वरक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनने की उम्मीद है।

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