कीट- व्याधियों के प्रकोप नियंत्रण हेतु समसामयिक सलाह
02 सितम्बर 2025, झाबुआ: कीट- व्याधियों के प्रकोप नियंत्रण हेतु समसामयिक सलाह – उप संचालक, कृषि जिला झाबुआ श्री एन.एस. रावत द्वारा खरीफ फसलों में लगने वाले कीट व्याधियों के प्रकोप नियंत्रण हेतु कृषकों के लिए उपयोगी सलाह जारी की गई है जो इस प्रकार है।
जिन किसानों के खेत में सोयाबीन, उड़द की फसल में पीला मोजेक का प्रकोप देखा गया हो, वह इसके नियंत्रण हेतु प्रारंभिक अवस्था में ही अपने-अपने खेत में जगह-जगह पर पीला चिपचिपे जाल (20-25 जाल/ हेक्टेयर) लगाए, जिससे इसका संक्रमण फैलने वाली सफेद मक्खी के नियंत्रण में सहायता मिलें। कृषक भाईयों को यह भी सलाह दी जाती है कि फसल पर पीला मोजेक के लक्षण दिखते ही ग्रसित पौधे को अपने खेत से निष्कासित करें। खड़ी फसल में सफेद मक्खी के प्रबंधन के लिए जैसे ही लक्षण दिखाई दें, फसल पर रासायनिक दवा एसिटामिप्रिड 25% + बिफेन्थिन 25% डब्ल्यू जी 250 ग्राम या बीटासायफ्लुथ्रिन इमिडाक्लोप्रीड 350 एम.एल. या थायोमेथाक्साम + लेम्बडा सायहेलोथ्रिन 125 एम.एल. 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हेक्टेयर छिडकाव करें, जिससे सफेद मक्खी के साथ-साथ पत्ती खाने वाले कीटों का भी एक साथ नियंत्रण हो सके। कुछ क्षेत्रों में लगातार हो रही रिमझिम वर्षा की स्थिति में पत्ती खाने वाली इल्लियों के नियंत्रण हेतु इन्डोक्साकार्ब 333 एम.एल. प्रति हेक्टेयर या लेम्बडा सायहेलोथ्रिन 4.9% सी.एस. 300 एम. एल. प्रति हेक्टेयर का छिड़काव करें।
जिन क्षेत्रों में अधिक वर्षा से जलभराव की स्थिति है, खरीफ उड़द की फसल में होने वाले संभावित नुकसान को कम करने हेतु शीघ्रातिशीघ्र जल निकासी की व्यवस्था करें। सोयाबीन, कपास की फसल में फफूंद जनित एन्थ्रेकनोज तथा राइजोक्टोनिया एरियल ब्लाइट नामक बीमारी का प्रकोप होने पर टेबुकोनाजोल 625 एम.एल. प्रति हेक्टेयर या टेबुकोनेझोल+सल्फर 1 किग्रा. प्रति हेक्टेयर या हेक्साकोनाज़ोल 5% ई.सी. 800 एम.एल. प्रति हेक्टेयर के मान से छिड़काव करें। मक्का फसल में फॉल आर्मीवर्म के नियंत्रण हेतु क्लोरपायरीफॉस 20% ई.सी. या ईमामेक्टिन बेन्जोएट 55 प्रतिशत ई.सी. 04 ग्राम/10 मि.ली. या थायोमेथाक्झम लैम्बाडासायहेलोथिन 0.5 एम. एल. प्रति लीटर पानी में उचित घोल बनाकर छिड़काव करें। कपास की फसल में रसचूसक कीट एफिड का प्रकोप होने पर एसीटामेप्रिड दवा का 10 मिली प्रति स्प्रे पंप के मान से घोल बनाकर छिड़काव करने की सलाह दी जाती है।
विभाग द्वारा किसानों से अपील की है कि अपनी फसल पर निरन्तर निगरानी रखें व समय पर कीट नियंत्रण हेतु सामूहिक रूप से प्रयास करें तथा अनुशंसित कीटनाशक दवा का उचित समय पर उचित घोल बनाकर छिड़काव करे। वर्षा ऋतु के दौर में ढलान वाले (निचले स्तर) खेतों में जलभराव की स्थिति बनने पर उचित जल निकास हेतु नाली बनवाएं । अधिक जानकारी के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र एवं नजदीकी कृषि कार्यालय से सम्पर्क करें एवं मैदानी अमलों से उचित मार्गदर्शन लेवें ।
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