राज्य कृषि समाचार (State News)पशुपालन (Animal Husbandry)

चिलचिलाती गर्मी में पशुओं की देखभाल जरूरी, हीट स्ट्रोक से बचाव के आसान उपाय जानिए  

21 अप्रैल 2026, भोपाल: चिलचिलाती गर्मी में पशुओं की देखभाल जरूरी, हीट स्ट्रोक से बचाव के आसान उपाय जानिएगर्मियों का मौसम शुरू होते ही तापमान में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। कई राज्यों में मौसम विभाग ने लू (हीटवेव) की चेतावनी भी जारी की है, जिससे आमजन के साथ-साथ पशुपालकों की चिंता बढ़ गई है। इस भीषण गर्मी का सबसे ज्यादा असर दुधारू पशुओं जैसे गाय-भैंस पर देखने को मिलता है, जहां हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। पशु विशेषज्ञों के अनुसार, जब अत्यधिक गर्मी और तेज गर्म हवाओं के कारण पशु का शरीर अपने सामान्य तापमान को नियंत्रित नहीं कर पाता, तो ऐसी स्थिति में लू लगने की आशंका बढ़ जाती है। इसका सीधा प्रभाव पशु के स्वास्थ्य, दूध उत्पादन और गंभीर मामलों में जीवन पर भी पड़ सकता है।विशेषज्ञों का कहना है कि लू लगने पर पशुओं में तेज बुखार, सांस लेने में कठिनाई, मुंह खोलकर हांफना, अत्यधिक लार गिरना, भूख कम लगना और बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। गंभीर स्थिति में पशु का पेशाब कम हो सकता है या बंद हो सकता है, और उसकी धड़कन तेज हो जाती है। समय पर ध्यान न देने पर पशु कई अन्य बीमारियों का शिकार हो सकता है और उत्पादन में भारी गिरावट आ जाती है।

लू से पशुओं को बचाने के उपाय

पशुपालकों को गर्मी शुरू होते ही पशुओं की देखभाल पर विशेष ध्यान देना चाहिए। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पशुओं को दिन में कम से कम 3-4 बार साफ और ठंडा पानी जरूर पिलाना चाहिए। पशुशाला में पंखे, कूलर या छायादार व्यवस्था करना बेहद जरूरी है। भैंसों को दिन में 2-3 बार ठंडे पानी से नहलाने से शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है।

इसके अलावा पशुओं के आहार में संतुलन बनाए रखना चाहिए। गेहूं का चोकर, जौ और खनिज मिश्रण का उपयोग लाभकारी होता है। अजोला जैसी हरी चारे की फसल भी गर्मी में उपयोगी मानी जाती है। पशुओं को चराई के लिए सुबह जल्दी और शाम को देर से भेजना चाहिए ताकि तेज धूप से बचाव हो सके।

लू लगने पर प्राथमिक उपचार

यदि पशु लू की चपेट में आ जाए तो तुरंत उसे ठंडी और छायादार जगह पर रखना चाहिए। शरीर पर ठंडे पानी का छिड़काव या पानी से नहलाना लाभकारी होता है। जरूरत पड़ने पर इलेक्ट्रोलाइट घोल, चीनी-नमक का घोल या भुने हुए जौ का पानी दिया जा सकता है। पशु चिकित्सक की सलाह लेकर बुखार कम करने वाली दवाएं देना भी जरूरी होता है।

स्थिति गंभीर होने पर देरी न करें और नजदीकी पशु अस्पताल से तुरंत संपर्क करें। विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर देखभाल और सावधानी से पशुओं को लू के खतरे से आसानी से बचाया जा सकता है।

 

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