Ad DesktopAd TabletAd Mobile
राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

पीएचडीसीसीआई ने आयोजित किया भारत स्पाइसेज़ कॉन्क्लेव 2026, भारत के मसाला अर्थतंत्र को दोगुना करने का रोडमैप पेश

20 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: पीएचडीसीसीआई ने आयोजित किया भारत स्पाइसेज़ कॉन्क्लेव 2026, भारत के मसाला अर्थतंत्र को दोगुना करने का रोडमैप पेश – पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) ने कैच के सहयोग से भारत स्पाइसेज़ कॉन्क्लेव 2026 – भारत के मसाला अर्थतंत्र को दोगुना करने का रोडमैप का आयोजन पीएचडी हाउस, नई दिल्ली में किया। कार्यक्रम में सरकार, उद्योग, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया तथा भारत के मसाला क्षेत्र के भविष्य पर चर्चा की।

कॉन्क्लेव में नीति, व्यापार, नवाचार, स्थिरता और निर्यात अवसरों जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया, जिनके माध्यम से भारत के मसाला उद्योग को मजबूत बनाने और वैश्विक बाजारों में उसकी उपस्थिति बढ़ाने पर जोर दिया गया।

मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए चिराग पासवान, केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री, भारत सरकार, ने कहा कि मसालों ने भारत की व्यापारिक विरासत में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है और पारंपरिक पाक उपयोग से आगे भी इस क्षेत्र में बड़ी संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि भारत को अब मात्रा-आधारित मॉडल से मूल्य-आधारित व्यवस्था की ओर बढ़ना होगा, जिसमें खाद्य प्रसंस्करण, नवाचार और वैश्विक बाजारों से बेहतर जुड़ाव महत्वपूर्ण होगा।

Ad DesktopAd TabletAd Mobile
Ad DesktopAd TabletAd Mobile

उन्होंने कहा कि सरकार व्यापार सुगमता बढ़ाने के लिए सुधारों और नीतिगत सहयोग के लिए प्रतिबद्ध है तथा उद्योग जगत से सुझाव आमंत्रित किए। उन्होंने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और पीएमएफएमई जैसी योजनाएं मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने और उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई हैं।

कृषक जगत को व्हाट्सएप पर फॉलो करें
खेती-किसानी की ताज़ा खबरें, सीधे आपके फ़ोन पर
चैनल फॉलो करें

मंत्री ने गुणवत्ता मानकों को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया और कहा कि निरंतर गुणवत्ता ही वैश्विक बाजारों में भरोसा कायम करने तथा निर्यात अस्वीकृति कम करने की कुंजी है। उन्होंने न्यूट्रास्यूटिकल्स, वेलनेस उत्पादों और वैल्यू एडेड मसाला श्रेणियों में उभरते अवसरों का उल्लेख किया और अनुसंधान, नवाचार तथा प्रौद्योगिकी में अधिक निवेश का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि मसाला क्षेत्र विकसित भारत 2047 के लक्ष्य और भारत को वैश्विक फूड बास्केट बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

अनिल राजपूत, चेयरमैन, फूड प्रोसेसिंग कमेटी, ने कहा कि भारत विश्व के 109 मान्यता प्राप्त मसालों में से 60 से अधिक का उत्पादन करता है और 200 से अधिक देशों को निर्यात करता है। उन्होंने कहा कि मसालों को उच्च मूल्य वाले उत्पादों और रणनीतिक संपत्ति के रूप में स्थापित किया जाना चाहिए, जो किसानों की आय, एमएसएमई विकास और ब्रांड इंडिया को मजबूती दे सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र की प्राथमिकताओं में किसानों को मूल्य श्रृंखला से जोड़ना, नवाचार और अनुसंधान एवं विकास को बढ़ावा देना, अवशेष-मुक्त और जैविक उत्पादन के माध्यम से स्थिरता सुनिश्चित करना तथा सार्वजनिक-निजी सहयोग को मजबूत करना शामिल है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, वेलनेस और प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती वैश्विक मांग भारतीय मसालों के लिए विशेषकर न्यूट्रास्यूटिकल और फंक्शनल फूड श्रेणियों में बड़ा अवसर है।

जे डी देसाई, को-चेयर, फूड प्रोसेसिंग कमेटी, पीएचडीसीसीआई, ने कहा कि भारत स्पाइसेज़ कॉन्क्लेव भारत की विरासत को नवाचार-आधारित और भविष्य उन्मुख खाद्य प्रसंस्करण उद्योग से जोड़ने का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि नवाचार, स्थिरता तथा किसानों और एमएसएमई की क्षमता निर्माण पर जोर देकर भारतीय मसालों को वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता का प्रतीक बनाया जा सकता है।

डॉ. रंजीत मेहता, सीईओ, सेक्रेटरी जनरल, पीएचडीसीसीआई, ने कहा कि भारत के पास उत्पादन, विरासत और पैमाने के मजबूत आधार हैं, लेकिन अगले चरण की वृद्धि के लिए वैश्विक ब्रांड निर्माण, गुणवत्ता प्रणालियों में सुधार और भारतीय मसालों की मजबूत अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह कॉन्क्लेव भारत को वैश्विक मसाला अर्थतंत्र का अग्रणी बनाने के साझा विजन के लिए उद्योग, सरकार और अन्य हितधारकों को एक मंच पर ला रहा है।

सत्र का संचालन डॉ. जतिंदर सिंह, डेप्युटी सेक्रेटरी जनरल, पीएचडीसीसीआई, ने किया। उन्होंने कहा कि ऐसे मंच सरकार और उद्योग के बीच सार्थक संवाद को बढ़ावा देते हैं और भविष्य की नीतियों तथा सहभागिता को दिशा देने में सहायक होते हैं।

कॉन्क्लेव में मसाला मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने, निर्यात अवसरों की खोज, नवाचार और स्थिरता को बढ़ावा देने तथा भारत के मसाला अर्थतंत्र को दोगुना करने के लिए रणनीतिक रोडमैप तैयार करने पर चर्चा हुई। कार्यक्रम में उद्योग प्रतिनिधियों, नीति-निर्माताओं और विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी रही।

कार्यक्रम को खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण का समर्थन प्राप्त था। कार्यक्रम का साझेदार कैच था, जबकि सहयोगी संस्थाओं में ऑल इंडिया फूड प्रोसेसर्स एसोसिएशन, बायोलॉजिकल एग्री सॉल्यूशंस एसोसिएशन ऑफ इंडिया और फेडरेशन ऑफ इंडियन स्पाइस स्टेकहोल्डर्स शामिल थे।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture