काटकूट का गौ -समाधि अभियान बना मिसाल
06 जून 2026, (दिलीप दसौंधी, कृषक जगत, मंडलेश्वर): काटकूट का गौ -समाधि अभियान बना मिसाल – एक दौर था जब गौ माता के निधन के बाद उनके पार्थिव शरीर को जंगलों या सड़क किनारे छोड़ दिया जाता था। इससे न केवल गौ माता के सम्मान को ठेस पहुँचती थी, बल्कि पर्यावरण और अन्य जीव-जंतुओं के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ता था। समय के साथ सामाजिक परंपराओं और सोच में बड़ा बदलाव आ रहा है। आज इसी रूढ़िवादी सोच को बदलने का एक अत्यंत प्रेरणादायक प्रयास ग्राम काटकूट में देखा जा रहा है। यहाँ पिछले छह महीनों में लगभग 15 गौ माताओं को ससम्मान गौ -समाधि दी जा चुकी है। इस सेवा कार्य की अनूठी पहल पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर और समिति के संस्थापक श्री प्रहलाद जाट ने की है। जिसे श्री खेड़ापति बजरंग गौशाला सेवा समिति द्वारा संचालित किया जा रहा है।

सेवा कार्य में समर्पित सहयोगी – इस पुनीत कार्य को निरंतर आगे बढ़ाने में समिति के सक्रिय सदस्य सर्व श्री मन्ना दुकतावा, पत्रकार राहुल भाई , पूर्व एसआई मोहनलाल परारिया, पूर्व पुलिस अधीक्षक भागीरथ , कैलाश दुबई , दाउ जाट , रामनिवास जाट , बाला पटेल, राम वर्मा, अमित जायसवाल, लाला जाट, विजय जाट, प्रकाश जाट ,पंडित दिनेश शर्मा, सावन और सुरेंद्र भाई अपनी निस्वार्थ सेवा दे रहे हैं।
गत मंगलवार को एक गौ माता के निधन के उपरांत श्री रामकिशन इनानिया परिवार द्वारा समिति से संपर्क किया गया। इस पुण्य कार्य में मेघा कंपनी के बालाजी द्वारा विशेष सहयोग कर जेसीबी प्रदान की गई। गौ माता को श्री खेड़ापति बजरंग गौशाला से पूर्ण धार्मिक विधि-विधान एवं सम्मान के साथ अंतिम विदाई देकर श्री दाऊ भाई एवं जेना भाई जाट के खेत में गौ समाधि दी गई। इस अवसर पर तरुण जाट, श्री बलराम बरड़ (हरदा) एवं रोहित जाट सहित अनेक गौ सेवक उपस्थित थे ।
गौ समाधि के वैज्ञानिक और पर्यावरणीय लाभ – भारतीय संस्कृति में गौ माता को पूजनीय स्थान प्राप्त है। स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने जीवन भर गौ माता की सेवा की। ऐसी पूजनीय गौ माता के निधन के बाद भी उनका सम्मान बना रहे, इसी उद्देश्य से यह गौ -समाधि प्रकल्प चलाया जा रहा है। गौ माता के पार्थिव शरीर को पूरे आदर के साथ भूमि में समाधि दी जाती है। धार्मिक महत्व के साथ-साथ इस अभियान के कई वैज्ञानिक और पर्यावरणीय लाभ भी हैं।
पर्यावरण और स्वास्थ्य संरक्षण: जंगलों या सड़कों पर शव न छोड़े जाने से संक्रमण और महामारियों का खतरा खत्म होता है। रेबिज जैसे प्राण घातक बीमारियां भी हो सकती है अगर खुले में मृत गोवंश को फेंकेंगे ,तो इससे प्रदुषण का खतरा बढ़ेगा।
मिट्टी की उर्वरता: वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जैविक अवशेष भूमि में मिलकर मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को बढ़ाते हैं।
निरादर से बचाव: आवारा कुत्तों या वन्य जीवों द्वारा शव को क्षत-विक्षत करने जैसी हृदय विदारक घटनाओं पर रोक लगती है।
समिति की अपील – श्री खेड़ापति बजरंग गौशाला सेवा समिति, सभी पशुपालकों, किसानों और ग्रामीणों से अपील करती है कि गौ माता के निधन के बाद उन्हें लावारिस न छोड़ें। उन्हें सम्मानपूर्वक भूमि में समाधि दें। इस कार्य में किसी भी प्रकार की सहायता या मार्गदर्शन के लिए समिति के इस आधिकारिक नंबर पर तुरंत संपर्क करें :
संपर्क सूत्र: +91 7028838725
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