एग्रीकल्चर मशीन (Agriculture Machinery)राज्य कृषि समाचार (State News)

विदिशा बना कृषि यंत्र निर्माण का नया हब, 10 से ज्यादा देशों में पहुंच रहे MP के उपकरण

23 जुलाई 2026, विदिशाविदिशा बना कृषि यंत्र निर्माण का नया हब, 10 से ज्यादा देशों में पहुंच रहे MP के उपकरण – मध्यप्रदेश का विदिशा जिला कृषि यंत्र निर्माण के क्षेत्र में तेजी से नई पहचान बना रहा है। यहां तैयार हो रहे आधुनिक कृषि उपकरण अब देश की सीमाओं से निकलकर 10 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं। मेडागास्कर, नाइजीरिया, सूडान, यूगांडा, घाना, अल्जीरिया, भूटान, नेपाल, बांग्लादेश और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) जैसे देशों में विदिशा में निर्मित कृषि यंत्रों की मांग लगातार बढ़ रही है। राज्य सरकार का मानना है कि इससे प्रदेश में कृषि यंत्रीकरण के साथ-साथ स्थानीय उद्योगों और किसानों को भी बड़ा लाभ मिल रहा है।

विदिशा में वर्तमान में करीब 150 कृषि उपकरण निर्माण इकाइयां संचालित हैं। यहां ग्रेडर, लेवलर, हाइड्रोलिक ट्रॉली, कल्टीवेटर, प्लाऊ, लोडर और डिलोडर जैसे आधुनिक कृषि उपकरण तैयार किए जा रहे हैं। इन उपकरणों की गुणवत्ता और उपयोगिता के कारण उनकी मांग मध्यप्रदेश के अलावा देश के अन्य राज्यों और विदेशी बाजारों में भी बढ़ रही है।

1993 से शुरू हुआ कारोबार, अब विदेशों तक पहुंच रहे उपकरण

उषा एग्रो के संचालक मानस गुप्ता ने बताया कि उनके पिता ने वर्ष 1993 में छोटे स्तर पर कृषि यंत्र निर्माण का काम शुरू किया था। धीरे-धीरे कारोबार का विस्तार हुआ और आज कंपनी के उपकरण 10 से अधिक देशों में निर्यात किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि कंपनी का करीब दो-तिहाई कारोबार देश के भीतर और एक-तिहाई कारोबार विदेशों में होता है। सालाना कारोबार लगभग 4 करोड़ रुपये का है।

मानस गुप्ता के अनुसार, मध्यप्रदेश सरकार की नीतियों और सहयोग से उत्पादन क्षमता बढ़ाने और कारोबार के विस्तार में काफी मदद मिली है। सरकार की पहल पर उन्हें जी-20 सम्मेलन में भाग लेने का अवसर भी मिला, जिसमें लगभग 75 प्रतिशत खर्च सरकार ने वहन किया। इससे विदेशी खरीदारों तक पहुंच बनाने में भी सहायता मिली।

कोरोना काल में शुरू हुआ उद्योग, आज लाखों का कारोबार

संजय उद्योग के संचालक विष्णु शर्मा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के दौरान कृषि उपकरण निर्माण का कार्य शुरू किया था। आज उनकी इकाई कल्टीवेटर, प्लाऊ और ट्रैक्टर से जुड़े कई उपकरण तैयार कर रही है। उनका सालाना कारोबार करीब 50 लाख रुपये का है और उत्पादों की आपूर्ति विदिशा के साथ अन्य जिलों एवं राज्यों तक हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार नए उद्यमियों के लिए प्रशिक्षण की सुविधाएं बढ़ाए तो इस क्षेत्र में और अधिक युवाओं को रोजगार मिल सकता है।

करोड़ों का कारोबार कर रहे स्थानीय उद्योग

मेसर्स किसान इंडस्ट्रीज और एग्रो स्मार्ट टेक्नोलॉजी जैसी इकाइयां भी खेती के हर चरण—खेत की तैयारी, बुवाई, रोपाई और कटाई—के लिए आवश्यक उपकरण तैयार कर रही हैं। एग्रो स्मार्ट टेक्नोलॉजी का सालाना कारोबार करीब 3 करोड़ रुपये है। कंपनी के अधिकांश ग्राहक मध्यप्रदेश के किसान और कृषि से जुड़ी संस्थाएं हैं, जबकि अन्य राज्यों से भी लगातार मांग मिल रही है।

हर विधानसभा में खुलेंगे कृषि यंत्र किराया केंद्र

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर प्रदेश में कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा देने के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कम से कम एक कृषि यंत्र किराये की दुकान खोलने की तैयारी भी की जा रही है। वर्तमान में प्रदेश में 5,260 कृषि यंत्र किराया केंद्र संचालित हैं और सरकार हर वर्ष 1,060 नए केंद्र स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है। इन केंद्रों के माध्यम से छोटे और सीमांत किसानों को न्यूनतम शुल्क पर आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराए जाएंगे।

कृषि उद्योग और किसानों दोनों को मिलेगा फायदा

विशेषज्ञों का मानना है कि विदिशा में कृषि यंत्र निर्माण उद्योग के विस्तार और राज्य सरकार की कृषि यंत्रीकरण योजनाओं से प्रदेश में आधुनिक खेती को नई गति मिलेगी। इससे स्थानीय उद्योगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार मिलेंगे, युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और किसानों को आधुनिक उपकरण सुलभ होने से खेती की लागत कम करने तथा उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।

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