राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

किसानों के लिए बड़ी खबर! प्राकृतिक खेती करने पर मिलेगा 4,000 रुपये प्रति एकड़, ऐसे मिलेगा योजना का लाभ

22 जुलाई 2026, नई दिल्ली: किसानों के लिए बड़ी खबर! प्राकृतिक खेती करने पर मिलेगा 4,000 रुपये प्रति एकड़, ऐसे मिलेगा योजना का लाभ – देश में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार लगातार प्रयास कर रही है। इसी दिशा में किसानों को आर्थिक सहायता भी उपलब्ध कराई जा रही है। कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि प्राकृतिक खेती मिशन के तहत किसानों को प्रति एकड़ प्रति वर्ष 4,000 रुपये की उत्पादन आधारित सहायता दी जाएगी। यह सहायता लगातार दो वर्षों तक मिलेगी। साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के अध्ययन में भी प्राकृतिक खेती के कई सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।

16 राज्यों में हुआ प्राकृतिक खेती पर अध्ययन

राज्य मंत्री ने बताया कि आईसीएआर ने वर्ष 2020-21 में अखिल भारतीय प्राकृतिक कृषि नेटवर्क कार्यक्रम के तहत प्राकृतिक खेती पर व्यापक अध्ययन शुरू किया था। यह अध्ययन देश के 16 राज्यों में स्थित 20 सहयोगी केंद्रों के माध्यम से किया जा रहा है। इनमें 11 राज्य कृषि विश्वविद्यालय, 8 आईसीएआर संस्थान और एक डीम्ड विश्वविद्यालय शामिल हैं। इस अध्ययन का उद्देश्य विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में प्राकृतिक खेती की वैज्ञानिक जांच करना और किसानों के लिए बेहतर खेती मॉडल विकसित करना है।

अध्ययन में मिले सकारात्मक परिणाम

आईसीएआर के अध्ययन के अनुसार, वैज्ञानिक तरीके से प्राकृतिक खेती अपनाने पर फसल उत्पादन में सुधार देखा गया है। इसके साथ ही मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर हुई और रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों पर होने वाला खर्च भी कम हुआ। मल्चिंग जैसी तकनीकों के उपयोग से मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, खरपतवार नियंत्रित होते हैं और जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ती है।

मिट्टी की सेहत में हुआ सुधार

अध्ययन में यह भी पाया गया कि प्राकृतिक खेती वाले खेतों में मिट्टी के जैविक कार्बन (SOC) स्तर में बढ़ोतरी हुई है। हिमालयी क्षेत्रों में किए गए परीक्षणों में यह स्तर लगभग 0.90 प्रतिशत से बढ़कर 1.15 प्रतिशत तक पहुंच गया। वैज्ञानिकों के अनुसार, प्राकृतिक खेती से मिट्टी में लाभकारी जीवाणु, कवक और अन्य सूक्ष्मजीवों की संख्या बढ़ती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और दीर्घकालीन उत्पादकता में सुधार होता है।

कई राज्यों में मिले बेहतर नतीजे

आईसीएआर के नेटवर्क अनुसंधान के तहत विभिन्न राज्यों के लिए फसल आधारित प्राकृतिक खेती मॉडल तैयार किए गए हैं। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और सिक्किम में सोयाबीन, मक्का, सब्जी मटर और धनिया आधारित फसल प्रणालियों में प्राकृतिक खेती की औसत उत्पादकता पांच वर्षों में जैविक खेती और एकीकृत फसल प्रबंधन से लगभग 5 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई। वहीं मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और गुजरात में प्राकृतिक खेती की उत्पादकता पारंपरिक एकीकृत फसल प्रबंधन के बराबर पाई गई।

नीति आयोग की रिपोर्ट ने भी की पुष्टि

प्राकृतिक खेती को लेकर नीति आयोग की मूल्यांकन रिपोर्ट में भी सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार 91.2 प्रतिशत किसानों ने प्राकृतिक खेती अपनाने के बाद उत्पादन और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार की बात कही। वहीं 90.1 प्रतिशत किसानों का मानना है कि इस पद्धति से खेती की लागत कम हुई, जिससे उन्हें अधिक लाभ मिला।

ऐसे मिलेगा योजना का लाभ

प्राकृतिक खेती मिशन के तहत किसानों को प्रति एकड़ प्रति वर्ष 4,000 रुपये की उत्पादन आधारित सहायता दी जाएगी। यह सहायता लगातार दो वर्षों तक उपलब्ध रहेगी और एक किसान अधिकतम एक एकड़ भूमि के लिए इसका लाभ ले सकेगा। इस राशि का उपयोग किसान प्राकृतिक खेती अपनाने, प्रशिक्षण लेने, पशुधन के रखरखाव, जैविक घोल तैयार करने, भंडारण कंटेनर खरीदने तथा जैव-संसाधन केंद्रों से आवश्यक सामग्री लेने में कर सकेंगे।

टिकाऊ खेती की दिशा में अहम पहल

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उत्पादन लागत, मिट्टी की गिरती गुणवत्ता और रासायनिक उर्वरकों पर बढ़ती निर्भरता के बीच प्राकृतिक खेती किसानों के लिए एक प्रभावी विकल्प बनकर उभर रही है। आईसीएआर और नीति आयोग की रिपोर्टों में मिले सकारात्मक परिणामों के बाद उम्मीद है कि आने वाले समय में अधिक किसान इस पद्धति को अपनाएंगे, जिससे खेती की लागत कम होगी, मिट्टी की सेहत सुधरेगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture