पीलीभीत में बासमती और जैविक खेती के प्रशिक्षण केंद्र की नींव
10 सितंबर 2026, पीलीभीत: पीलीभीत में बासमती और जैविक खेती के प्रशिक्षण केंद्र की नींव – किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक से जोड़ने और बासमती चावल की गुणवत्ता तथा जैविक खेती को बढ़ावा देने की दिशा में यूपी के पीलीभीत में महत्वपूर्ण पहल की गई है। केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद और कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी बासमती एवं जैविक प्रशिक्षण केंद्र का शिलान्यास किया। यह केंद्र किसानों को खेती की आधुनिक तकनीकों का प्रशिक्षण देने के साथ कृषि उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने और किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
लगभग आठ एकड़ क्षेत्रफल में विकसित होने वाले इस प्रशिक्षण केंद्र को बासमती और जैविक कृषि के क्षेत्र में महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में तैयार किया जाएगा। बताया गया कि यह देश का दूसरा बासमती प्रशिक्षण केंद्र और जैविक कृषि का पहला प्रशिक्षण केंद्र होगा। इससे क्षेत्र के किसानों को स्थानीय स्तर पर आधुनिक कृषि पद्धतियों, बेहतर उत्पादन तकनीक और गुणवत्तापूर्ण कृषि उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण मिल सकेगा।
शिलान्यास अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि कृषि क्षेत्र में अब केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता, बाजार की मांग और निर्यात की संभावनाओं को ध्यान में रखकर खेती करना भी आवश्यक है। बासमती चावल की देश-विदेश में मांग को देखते हुए किसानों को उच्च गुणवत्ता वाली बासमती के उत्पादन के लिए वैज्ञानिक तकनीकों की जानकारी देना जरूरी है। प्रशिक्षण केंद्र इस दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकता है।
केंद्र में किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता के अनुरूप खेती, उन्नत कृषि तकनीक, फसल प्रबंधन, बेहतर गुणवत्ता वाले बासमती उत्पादन तथा जैविक कृषि से संबंधित विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा। किसानों को यह भी समझाया जाएगा कि उत्पादन के साथ-साथ कृषि उपज की गुणवत्ता बनाए रखना और बाजार की आवश्यकताओं के अनुरूप फसल तैयार करना किस प्रकार उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकता है।
जैविक खेती को बढ़ावा देने से रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के साथ मिट्टी की उर्वरता और कृषि पर्यावरण को बेहतर बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है। वहीं गुणवत्तापूर्ण बासमती के उत्पादन से किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध होने और कृषि निर्यात को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
इस प्रशिक्षण केंद्र का प्रभाव केवल कृषि उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। आधुनिक कृषि से जुड़े प्रशिक्षण, प्रसंस्करण, विपणन और निर्यात गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी विकसित हो सकते हैं। इससे युवाओं को कृषि आधारित स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा। पीलीभीत की कृषि पहचान को देखते हुए यह केंद्र किसानों के लिए ज्ञान और तकनीक का नया माध्यम बन सकता है। यदि प्रशिक्षण के साथ किसानों को बाजार, गुणवत्ता मानकों और निर्यात की आवश्यकताओं से भी प्रभावी रूप से जोड़ा जाता है, तो यह पहल क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
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