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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

पिछड़े 100 जिलों में कृषि सुधार तेज, धन-धान्य योजना का औसत स्कोर तीन महीने में लगभग दोगुना

09 सितंबर 2026, नई दिल्ली: पिछड़े 100 जिलों में कृषि सुधार तेज, धन-धान्य योजना का औसत स्कोर तीन महीने में लगभग दोगुना – देश के 100 सबसे पिछड़े कृषि जिलों में बीते तीन महीनों में खेती-किसानी के हालात तेजी से सुधरे हैं। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 2 सितंबर को कृषि भवन, नई दिल्ली में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (पीएम-डीडीकेवाई) की प्रगति की समीक्षा की। समीक्षा में सामने आया कि योजना के तहत चुने गए जिलों का औसत स्कोर अप्रैल 2026 के 22.54 अंक से बढ़कर जुलाई 2026 में 38.85 अंक तक पहुंच गया है।

यह योजना कम कृषि उत्पादकता, कम फसल सघनता और साख वितरण में पिछड़े 100 जिलों की पहचान कर वहां 11 मंत्रालयों और विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं को एक साथ जोड़ने पर आधारित है। प्रगति मापने के लिए 121 संकेतक तय किए गए हैं, जिनमें 74 आउटपुट और 47 आउटकम संकेतक शामिल हैं।

किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा सुधार

समीक्षा बैठक में बताए गए आंकड़ों के अनुसार अप्रैल से जुलाई 2026 के बीच कृषि उत्पादकता का स्कोर 2.53 से बढ़कर 6.70 पर पहुंच गया, जबकि फसल विविधीकरण का स्कोर 5.60 से 8.65 हो गया। सिंचाई ढांचे का स्कोर 1.65 से बढ़कर 4.20 और कृषि साख तक पहुंच का स्कोर 2.81 से 5.59 तक गया है। कटाई के बाद भंडारण क्षमता का स्कोर 2.61 से 3.82 और प्रशासनिक सेवा वितरण का स्कोर 7.94 से 10.33 तक सुधरा है।

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मंत्रालय के अनुसार चौहान ने बैठक में कहा कि पिछड़े जिलों में तेजी से कृषि सुधार दिखना अच्छा संकेत है और राज्यों को योजनाओं के अभिसरण में और तेजी लानी चाहिए। समीक्षा में जनवरी से जुलाई 2026 के बीच 6 लाख 90 हजार 530 किसानों और 88 हजार 961 विस्तार कर्मियों को प्रशिक्षित करने का भी ब्योरा दिया गया, जिनमें से 2 लाख 20 हजार 683 किसानों-कर्मियों को खासतौर पर प्राकृतिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया।

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किसानों के लिए इसका मतलब

धन-धान्य कृषि योजना का सीधा फायदा उन जिलों के किसानों को मिल रहा है, जो अब तक सिंचाई, भंडारण और साख जैसी बुनियादी सुविधाओं में पिछड़े हुए थे। योजना के तहत मिट्टी परीक्षण, सिंचाई उपकरण, फसल विविधीकरण के लिए बीज-सामग्री और साख सुविधा जैसी योजनाएं एक साथ मिलने से किसानों को बार-बार अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। अपने जिले के कृषि विभाग या केंद्र सरकार के पोर्टल से यह जानकारी ली जा सकती है कि क्या उनका जिला इन 100 जिलों में शामिल है।

प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को केंद्रीय कैबिनेट ने पिछले साल मंजूरी दी थी और इसे आकांक्षी जिला कार्यक्रम की तर्ज पर तैयार किया गया है, जिसमें कम उत्पादकता, कम फसल सघनता और कमजोर साख वितरण के आधार पर देशभर के 100 जिलों को चुना गया। इसके बाद अक्टूबर 2025 में योजना को औपचारिक रूप से लागू किया गया, ताकि इन जिलों में हर स्तर पर एक साथ सुधार लाया जा सके।

समीक्षा बैठक में जिला स्तर के प्रदर्शन, योजनाओं के अभिसरण और किसानों तक पहुंच रहे लाभ का ब्योरा कृषि मंत्रालय के अधिकारियों ने प्रस्तुत किया। बैठक में यह भी बताया गया कि किस तरह 121 संकेतकों के जरिये हर जिले की प्रगति को हर महीने मापा जा रहा है, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते सुधार किया जा सके।

यह खबर क्यों मायने रखती है: यह योजना बताती है कि केंद्र सरकार अब अलग-अलग योजनाओं के बजाय बुनियादी ढांचे, साख और उत्पादकता को एक साथ जोड़कर पिछड़े कृषि क्षेत्रों को ऊपर उठाने पर जोर दे रही है। बीज, उर्वरक, सिंचाई उपकरण और कृषि यंत्र बेचने वाले कारोबारियों के लिए इन 100 जिलों में मांग बढ़ने के आसार हैं, क्योंकि सरकारी अभिसरण से किसानों की खरीद क्षमता और जागरूकता दोनों बढ़ रही हैं।

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