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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

आगरा में बनेगा कृषि विज्ञान का बड़ा केंद्र, CIP के साथ मिलकर विकसित होंगी उन्नत आलू किस्में

09 सितंबर 2026, नई दिल्ली: आगरा में बनेगा कृषि विज्ञान का बड़ा केंद्र, CIP के साथ मिलकर विकसित होंगी उन्नत आलू किस्में – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में कृषि अनुसंधान, खाद्य सुरक्षा और पोषण के क्षेत्र में भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी क्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान से अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र (CIP) के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने कृषि भवन, नई दिल्ली में मुलाकात की। बैठक में आगरा में स्थापित हो रहे दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र (CSARC) की प्रगति समेत कृषि अनुसंधान और किसानों की आय बढ़ाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई।

बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव अतीश चंद्रा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट और आगरा स्थित सीसार्क के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे। चर्चा के दौरान आधुनिक ब्रीडिंग तकनीकों, उन्नत जर्मप्लाज्म और किसानों को बेहतर कृषि तकनीक उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।

ICAR और CIP के बीच काम का स्पष्ट बंटवारा जरूरी

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अंतरराष्ट्रीय आलू केंद्र के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि भारत का कृषि विकास का विजन केवल दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं है। भारत वैश्विक स्तर पर कृषि, खाद्य सुरक्षा और पोषण से जुड़े प्रयासों में योगदान देना चाहता है। उन्होंने कहा कि CIP जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ सहयोग और समन्वय इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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बैठक में शिवराज सिंह चौहान ने यह भी स्पष्ट किया कि ICAR और CIP के काम में किसी तरह का दोहराव नहीं होना चाहिए। दोनों संस्थाओं के बीच जिम्मेदारियों का स्पष्ट विभाजन जरूरी है, ताकि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो और कृषि क्षेत्र में नए एवं उपयोगी नवाचार सामने आ सकें।

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उन्होंने कहा कि आगरा में स्थापित हो रहे केंद्र के माध्यम से वैश्विक स्तर का उन्नत जर्मप्लाज्म भारत में आना चाहिए। इससे देश की कृषि परिस्थितियों के अनुरूप नई और बेहतर किस्में विकसित करने में मदद मिलेगी और इसका सीधा लाभ आलू उत्पादक किसानों को मिल सकेगा।

हाइब्रिड आलू तकनीक और जलवायु-सहिष्णु किस्मों पर होगा काम

CIP के महानिदेशक डॉ. सिमोन हेक ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि आगरा में स्थापित हो रहा सीसार्क केंद्र दक्षिण एशिया के लिए एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक मंच के रूप में काम करेगा। इसके दायरे में भारत के साथ नेपाल, बांग्लादेश और भूटान जैसे देश भी शामिल होंगे।

केंद्र में हाइब्रिड आलू तकनीक, बायोफोर्टिफाइड फसलों और जलवायु-सहिष्णु किस्मों जैसी आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों को भारतीय कृषि की जरूरतों से जोड़ने पर काम किया जाएगा। इससे आलू की बीज उत्पादन प्रणाली को अधिक तेज और सटीक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही कृषि क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा देने पर भी जोर रहेगा।

शकरकंद को ‘सुपरफूड’ के रूप में बढ़ावा देने पर जोर

बैठक में शकरकंद के पोषण और आर्थिक महत्व पर भी विशेष चर्चा हुई। इसमें आयरन, जिंक और विटामिन-A से भरपूर ऑरेंज-फ्लेश्ड बायोफोर्टिफाइड शकरकंद की उन्नत किस्मों को भारतीय किसानों तक पहुंचाने की योजना पर मंथन किया गया।

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शकरकंद को पारंपरिक फसल की छवि से बाहर निकालकर आधुनिक ‘सुपरफूड’ के रूप में बढ़ावा देने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि इसकी बड़े स्तर पर ब्रांडिंग किए जाने से शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में मांग बढ़ाई जा सकती है। इससे छोटे किसानों को भी अपनी उपज का बेहतर मूल्य हासिल करने में मदद मिल सकती है।

भारत और दक्षिण एशिया के लिए अहम साबित होगा केंद्र

बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री ने CIP के प्रतिनिधिमंडल का भारत आगमन पर स्वागत किया और साझा प्रयासों के लिए आभार जताया। उन्होंने भरोसा जताया कि कृषि मंत्रालय, ICAR और CIP के बीच सहयोग से भारत और दक्षिण एशिया के साथ-साथ वैश्विक कृषि क्षेत्र में भी सकारात्मक बदलाव लाने में मदद मिलेगी।

बैठक में केंद्रीय बागवानी आयुक्त डॉ. प्रभात कुमार, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के एमडी कपिल मीणा, CIP-चाइना सेंटर फॉर एशिया एंड द पैसिफिक की निदेशक यानमिन शी, अफ्रीका की क्षेत्रीय निदेशक जॉयस मारू, लैटिन अमेरिका के क्षेत्रीय निदेशक वियन पोलर और भारत के कंट्री मैनेजर नीरज शर्मा सहित अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।

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