राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

जापान ने भारतीय आमों के आयात पर लगाई रोक, कीटनाशक अवशेष नहीं बल्कि प्रोटोकॉल उल्लंघन बना कारण

04 जून 2026, टोक्योजापान ने भारतीय आमों के आयात पर लगाई रोक, कीटनाशक अवशेष नहीं बल्कि प्रोटोकॉल उल्लंघन बना कारण – जापान ने भारत से ताजे आमों के आयात को निलंबित कर दिया है। यह निर्णय तब लिया गया जब जापान के कृषि, वानिकी एवं मत्स्य मंत्रालय (MAFF) के पादप संगरोध अधिकारियों ने पाया कि भारत द्वारा नामित निर्यात सुविधाएं दोनों देशों के बीच सहमत शर्तों का पालन नहीं कर रही थीं।

यह प्रतिबंध अल्फांसो, केसर, चौसा, बंगनपल्ली, मल्लिका और लंगड़ा किस्म के उन आमों पर लागू होगा जिन्हें भारत से सीधे जापान निर्यात किया जाता है।

MAFF के प्लांट प्रोटेक्शन स्टेशन के अनुसार, ओरिएंटल फ्रूट फ्लाई प्रजाति समूह और मेलन फ्लाई के जापान में प्रवेश और प्रसार को रोकने के लिए भारत से आने वाले ताजे आम सामान्यतः प्रतिबंधित आयात श्रेणी में आते हैं। हालांकि, विशेष व्यवस्था के तहत उपरोक्त छह भारतीय आम किस्मों के आयात की अनुमति दी गई थी, बशर्ते वे दोनों देशों के बीच तय किए गए फाइटोसैनिटरी मानकों और परिचालन प्रक्रियाओं का पालन करें।

मार्च 2026 में जापानी पादप संगरोध अधिकारियों ने भारत का दौरा कर यह सत्यापित किया कि कीटमुक्ति (डिसइन्फेक्शन) प्रक्रियाएं और अन्य संबंधित कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार किए जा रहे हैं या नहीं। निरीक्षण के दौरान यह पाया गया कि भारत की ओर से नामित सुविधाएं सहमत शर्तों को पूरा नहीं कर रही थीं।

इसके बाद जापान ने भारतीय अधिकारियों से इन कमियों के मूल कारणों की जांच करने, सुधारात्मक कार्ययोजना प्रस्तुत करने तथा सभी अनुमोदित सुविधाओं से जापान को होने वाले निर्यात को तब तक रोकने का अनुरोध किया है, जब तक कि जापानी पक्ष सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन की पुष्टि नहीं कर लेता।

MAFF की अधिसूचना में कीटनाशक अवशेषों का उल्लेख नहीं किया गया है। इसके बजाय, प्रतिबंध का कारण भारत में निरीक्षण के दौरान पाई गई फाइटोसैनिटरी, कीटमुक्ति और परिचालन प्रक्रियाओं से संबंधित कमियां बताई गई हैं।

जापान ने यह भी घोषणा की है कि 25 मार्च 2026 या उसके बाद जारी किए गए निरीक्षण प्रमाणपत्रों के साथ आयात किए जाने वाले प्रभावित आमों के शिपमेंट को नष्ट करने या वापस भेजने की कार्रवाई की जाएगी।

जापानी अधिकारियों के अनुसार, यह निर्यात निलंबन तब तक जारी रहेगा जब तक भारत आवश्यक सुधार लागू नहीं कर देता और जापान यह सत्यापित नहीं कर लेता कि सहमत प्रक्रियाओं का पूर्ण रूप से पालन किया जा रहा है।

यह निर्णय भारत के लिए एक महत्वपूर्ण प्रीमियम निर्यात बाजार में आमों की आपूर्ति को प्रभावित करेगा और अंतरराष्ट्रीय फल व्यापार में फाइटोसैनिटरी प्रोटोकॉल के अनुपालन के महत्व को रेखांकित करता है।


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