राजस्थान में किसानों को बड़ी सौगात! अब किराए पर मिलेंगे ट्रैक्टर और कृषि यंत्र, कृषि विभाग ने टैफे-जेफार्म सर्विसेज से किया एमओयू
17 जुलाई 2026, जयपुर: राजस्थान में किसानों को बड़ी सौगात! अब किराए पर मिलेंगे ट्रैक्टर और कृषि यंत्र, कृषि विभाग ने टैफे-जेफार्म सर्विसेज से किया एमओयू – राजस्थान में कृषि यंत्रीकरण को नई गति देने और छोटे एवं सीमांत किसानों तक आधुनिक कृषि मशीनरी की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य के कृषि विभाग और टैफे-जेफार्म सर्विसेज के बीच गुरुवार को पंत कृषि भवन के सभा कक्ष में एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस साझेदारी के तहत किसान डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरण बिना किसी अतिरिक्त सेवा शुल्क के किराए पर ले सकेंगे। इससे खेती की लागत कम होगी, कृषि कार्य समय पर पूरे होंगे और उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इस साझेदारी के तहत जेफार्म सर्विसेज के डिजिटल प्लेटफॉर्म को राज किसान साथी पोर्टल के साथ एकीकृत किया जाएगा, जिससे किसानों को एक ही मंच पर कृषि यंत्र किराए पर लेने की सुविधा मिल सकेगी। भूमि तैयारी, बुआई, कटाई और फसल कटाई के बाद के कार्यों तक कृषि यंत्रीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही किसानों, कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी), ट्रैक्टर मालिकों और किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को प्लेटफॉर्म से जोड़कर कृषि यंत्र किराया व्यवस्था को और मजबूत बनाया जाएगा।
किसानों को मिलेंगी ये सुविधाएं
एमओयू के तहत किसानों को ट्रैक्टर और अन्य कृषि उपकरण बिना किसी अतिरिक्त सेवा शुल्क के किराए पर उपलब्ध कराए जाएंगे। राज्यभर में किसान जागरूकता कार्यक्रम, प्रदर्शन, किसान गोष्ठियां और प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा किसानों, एफपीओ, ग्रामीण युवाओं, छात्रों, महिला स्वयं सहायता समूहों और एग्री-स्टार्टअप्स के लिए क्षमता विकास एवं ज्ञान-साझाकरण कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे, ताकि आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिक से अधिक लाभ किसानों तक पहुंच सके।
हर ग्राम पंचायत तक कस्टम हायरिंग सेंटर पहुंचाने का लक्ष्य
प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी मंजू राजपाल ने कहा कि कस्टम हायरिंग सेंटर राजस्थान में कृषि यंत्रीकरण को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण मॉडल है। सरकार का लक्ष्य प्रत्येक ग्राम पंचायत स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर स्थापित करना है, जिनका संचालन फेडरेशन, सहकारी समितियां, एफपीओ या व्यक्तिगत उद्यमी कर सकेंगे। इससे कृषि यंत्रों की उपलब्धता का मजबूत नेटवर्क तैयार होगा और किसानों को जरूरत के समय आसानी से मशीनें उपलब्ध हो सकेंगी।
उन्होंने कहा कि इन केंद्रों का उद्देश्य महंगे कृषि यंत्रों को उन छोटे एवं सीमांत किसानों तक पहुंचाना है, जो इन्हें खरीदने में सक्षम नहीं हैं। किसान आवश्यकता के अनुसार किराए पर मशीनें लेकर कम लागत में आधुनिक तकनीक का उपयोग कर सकेंगे। विभाग केवल इन केंद्रों की स्थापना ही नहीं करेगा, बल्कि उनकी नियमित मॉनिटरिंग, पारदर्शी संचालन और प्रभावी क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करेगा।
छोटे किसानों को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि इस साझेदारी से राज्य के छोटे एवं सीमांत किसानों को कृषि यंत्रीकरण और डिजिटल सेवाओं का लाभ पहले से अधिक आसानी से मिलेगा। ट्रैक्टर और कृषि उपकरण किराया व्यवस्था मजबूत होने से खेती अधिक आधुनिक और सुविधाजनक बनेगी तथा राज्य में सतत कृषि विकास को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि टैफे-जेफार्म सर्विसेज के साथ यह समझौता राजस्थान के हर किसान तक आधुनिक कृषि यंत्र पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
पहले भी 32 संस्थाओं के साथ हुए हैं एमओयू
उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक, टिकाऊ और जलवायु अनुकूल बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। इसी क्रम में 10 जुलाई को कृषि विभाग ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चरल मार्केटिंग (NIAM) सहित 10 अग्रणी एग्रीटेक स्टार्टअप्स और 20 प्रतिष्ठित सिविल सोसाइटी संगठनों (CSOs) के साथ भी एमओयू किए थे। इन साझेदारियों का उद्देश्य प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, कृषि नवाचार, आधुनिक तकनीकों के प्रसार और किसानों की आय में सतत वृद्धि को बढ़ावा देना है।
इन संगठनों के सहयोग से किसानों को प्राकृतिक एवं जैविक खेती, जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार, मूल्य संवर्धन, प्रमाणन और बेहतर विपणन जैसी सुविधाओं का लाभ मिलेगा। विशेष रूप से छोटे एवं सीमांत किसान, महिला किसान, युवा किसान और जनजातीय क्षेत्रों के कृषकों को इन पहलों से अधिक फायदा मिलने की उम्मीद है। जिला स्तर पर सेमिनार, प्रदर्शन प्लॉट, किसान समूहों का गठन और तकनीकी मार्गदर्शन के माध्यम से इन योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाया जाएगा।
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