राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

कृषि मंत्रालय का दावा: भारत आज 2016 की तुलना में अल नीनो के लिए बेहतर तैयार

19 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: कृषि मंत्रालय का दावा: भारत आज 2016 की तुलना में अल नीनो के लिए बेहतर तैयार – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कृषि क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और आगामी खरीफ मौसम की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने कृषि सचिव और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को किसानों के हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 

बैठक में मौसम पूर्वानुमान, जल उपलब्धता, फसलों की स्थिति, बीज एवं अन्य कृषि आदानों की व्यवस्था, राज्यों की तैयारियाँ तथा संभावित प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से निपटने की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा हुई। 

बैठक में बताया गया कि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने वर्ष 2026 में सामान्य से कम दक्षिण-पश्चिम मानसून की संभावना जताई है। देशभर में मौसमी वर्षा दीर्घकालिक औसत का लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह भी बताया गया कि मानसून अवधि के दौरान अल नीनो परिस्थितियाँ विकसित हो सकती हैं, हालांकि अंतिम और अद्यतन आकलन मई 2026 के अंतिम सप्ताह में जारी किया जाएगा। 

समीक्षा के दौरान शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि मौसम संबंधी पूर्वानुमानों को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रही है और किसानों को किसी प्रकार की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों, बेहतर जल प्रबंधन, उन्नत तकनीकों, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और जलवायु अनुकूल कृषि उपायों से संभावित चुनौतियों के प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। 

बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि वर्तमान में देश के जलाशयों में जल स्तर संतोषजनक स्थिति में है और कुल भंडारण सामान्य से बेहतर है। उपलब्ध अनुमानों के अनुसार जलाशयों में भंडारण इस अवधि के सामान्य स्तर का 127.01 प्रतिशत है, जिससे खरीफ मौसम में सिंचाई आवश्यकताओं को महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी और नमी की कमी का जोखिम काफी घटेगा। इसी आधार पर बैठक में आकलन किया गया कि संभावित अल नीनो प्रभाव के बावजूद कृषि क्षेत्र पर इसका असर पिछले वर्षों की तुलना में सीमित रहने की संभावना है। बेहतर जल उपलब्धता, सूक्ष्म सिंचाई, वैज्ञानिक सलाह, फसल विविधीकरण और समय पर हस्तक्षेप से खेती पहले की तुलना में अधिक सक्षम और अनुकूल बनी है। 

समीक्षा में यह भी बताया गया कि वर्ष 2000 से 2016 के बीच अल नीनो का कृषि उत्पादन पर अपेक्षाकृत अधिक प्रभाव पड़ा था, क्योंकि उस समय वर्षा पर निर्भरता अधिक थी और जलवायु जोखिमों से निपटने की व्यवस्थाएँ वर्तमान की तुलना में सीमित थीं। हाल के वर्षों में तकनीकी प्रगति, बेहतर कृषि प्रबंधन, जल संरक्षण, सिंचाई नेटवर्क के विस्तार और उन्नत बीजों के उपयोग से फसल उत्पादकता में अधिक स्थिरता आई है। बैठक में यह भी कहा गया कि कुछ फसलें, विशेषकर धान, अपेक्षाकृत अधिक स्थिरता दिखाती हैं, जबकि अन्य फसलों के लिए भी उपयुक्त प्रबंधन उपाय तैयार किए जा रहे हैं। मंत्री ने कहा कि सरकार का ध्यान क्षेत्रवार और फसलवार रणनीतियों के माध्यम से किसानों को समय पर सलाह, बीज, संसाधन और विकल्प उपलब्ध कराने पर है। 

केंद्रीय कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी राज्य प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से निपटने के लिए पूरी तैयारी रखें और जिला स्तर तक आकस्मिक योजनाएँ सक्रिय करें। उन्होंने कहा कि बीज, उर्वरक और अन्य आवश्यक कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ वैकल्पिक फसल विकल्प, विलंबित बुवाई रणनीतियाँ और सूखा सहनशील किस्मों के प्रचार पर विशेष जोर दिया जाए, ताकि किसानों को व्यावहारिक और त्वरित समाधान मिल सकें। बैठक में बताया गया कि खरीफ और रबी दोनों मौसमों के लिए बीज उपलब्धता आवश्यकता से अधिक है तथा राष्ट्रीय बीज भंडार की व्यवस्था भी आकस्मिक परिस्थितियों के लिए की गई है। 

चौहान ने कहा कि किसानों को किसी भी कठिनाई से बचाने के लिए निगरानी तंत्र सक्रिय है और स्थिति की नियमित समीक्षा की जा रही है। राज्यों के साथ निरंतर समन्वय, फसल-मौसम निगरानी, जिला कृषि आकस्मिक योजनाओं के अद्यतन और संकट प्रबंधन की संस्थागत व्यवस्थाओं के माध्यम से समय पर निर्णय सुनिश्चित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य केवल संभावित जोखिमों का आकलन करना नहीं, बल्कि पहले से ऐसे सभी कदम उठाना है जिससे किसानों का विश्वास बना रहे, खेती की निरंतरता प्रभावित न हो और खरीफ मौसम सुचारु रूप से आगे बढ़े। 

ऐतिहासिक तुलना यह दर्शाती है कि वर्ष 2016 से पहले अल नीनो का असर सीमित बुनियादी ढाँचे के कारण अधिक गंभीर था, जबकि आज विस्तारित सिंचाई, जलवायु अनुकूल बीजों और सतर्क निगरानी से स्थिति कहीं अधिक मजबूत है। केंद्र और राज्यों के निरंतर समन्वय, फसल-मौसम निगरानी तथा संस्थागत संकट प्रबंधन व्यवस्थाओं से किसानों का भरोसा मजबूत रहेगा और खरीफ मौसम निर्बाध गति से आगे बढ़ेगा।

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