राज्य कृषि समाचार (State News)

मध्यप्रदेश में मानसून की आहट, कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दी बीज-खाद भंडारण और खरीफ फसलों के चयन की सलाह

15 जून 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश में मानसून की आहट, कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को दी बीज-खाद भंडारण और खरीफ फसलों के चयन की सलाह – भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मध्यप्रदेश में आगामी दिनों में मानसून के प्रवेश की संभावना है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खरीफ सीजन की तैयारियां समय रहते पूरी करने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि किसान बीज, खाद, खरपतवारनाशक और कृषि दवाओं का पर्याप्त एवं सुरक्षित भंडारण कर लें, ताकि मानसून शुरू होते ही बुवाई कार्य में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार खरीफ फसलों में बेहतर उत्पादन के लिए क्षेत्र एवं जलवायु के अनुसार उन्नत किस्मों का चयन करना आवश्यक है। किसानों को प्रमाणित और गुणवत्तायुक्त बीजों का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

खरीफ फसलों की उन्नत किस्मों की सिफारिश

कृषि वैज्ञानिकों ने सोयाबीन की जेएस-2212, जेएस-2216, जेएस-2172, जेएस-2094, जेएस-2098, एनआरसी-150, एनआरसी-152 और एनआरसी-142 किस्मों को उपयुक्त बताया है। वहीं सुगंधित धान के लिए पूसा-1847, पूसा-1637, पूसा-1718, पूसा-1728 और पूसा-1692 तथा मोटे धान के लिए सहभागी और एमटीयू-1010 किस्मों की अनुशंसा की गई है।

हाइब्रिड धान के लिए जेआरएच-56, जेआरएच-8 और जेआरएच-19, उड़द के लिए आईपीयू-13-01, आईपीयू-10-26, टीजीयू-130, टीजीयू-339, प्रताप उड़द-1 और इंदिरा उड़द-1, जबकि अरहर के लिए आईपीए-15-06, जीआरजी-152 (भीमा) और पूसा-16 किस्मों को बेहतर माना गया है।
मक्का के लिए जवाहर मक्का-12, जवाहर मक्का-1014 और पूसा जवाहर हाइब्रिड-2, तिल के लिए टीकेजी-55 और टीकेजी-308, मूंगफली के लिए जेजीएन-23, मल्लिका और फूले भारती किस्मों की सिफारिश की गई है।

संतुलित उर्वरक प्रबंधन पर जोर
कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग करने की सलाह दी है। सोयाबीन के लिए 20:60:40:20 एनपीके किलोग्राम प्रति हेक्टेयर, सुगंधित धान एवं मक्का के लिए 100:60:40 एनपीके किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तथा मूंग, उड़द और अरहर के लिए 20:60:20 एनपीके किलोग्राम प्रति हेक्टेयर उर्वरक देने की अनुशंसा की गई है।

आधुनिक कृषि यंत्रों से करें बुवाई

विशेषज्ञों ने बताया कि वर्षा की अनिश्चितता, अधिक या कम बारिश तथा लंबे अंतराल की स्थिति को देखते हुए किसानों को मेड़ एवं नाली पद्धति से बुवाई करनी चाहिए। इसके लिए सीड ड्रिल मशीन में ‘वी’ आकार की पंजी लगाकर बुवाई की जा सकती है। इसके अलावा रेज्ड बेड प्लांटर का उपयोग भी लाभकारी रहेगा।

बीज उपचार से बढ़ेगी फसल सुरक्षा

कृषि वैज्ञानिकों ने खरीफ फसलों की बुवाई से पहले बीज उपचार को अनिवार्य बताया है। जैविक बीज उपचार के लिए ट्राइकोडर्मा विरिडी 10 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज तथा रासायनिक उपचार के लिए थायरम 3 ग्राम या कार्बेन्डाजिम और मैन्कोजेब मिश्रण 5+2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपयोग करने की सलाह दी गई है।

जिन क्षेत्रों में दीमक की समस्या अधिक रहती है, वहां क्लोरपायरीफॉस 5 मिली प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचार करने की सलाह दी गई है। दलहनी फसलों में राइजोबियम कल्चर तथा धान्य फसलों में एजेटोबैक्टर कल्चर से बीज उपचार भी लाभकारी बताया गया है।

प्रमाणित बीज कहां से प्राप्त करें

उन्नत और प्रमाणित बीजों की उपलब्धता के लिए किसानों को राष्ट्रीय बीज निगम, मध्यप्रदेश राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम, शासकीय कृषि प्रक्षेत्र, बीज उत्पादक समितियों, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी कार्यालय, कृषि महाविद्यालय, आंचलिक कृषि अनुसंधान केंद्र और कृषि विज्ञान केंद्रों से संपर्क करने की सलाह दी गई है।

फलोद्यान और पशुपालन पर भी ध्यान देने की सलाह

कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को क्षेत्र की जलवायु, मिट्टी और वर्षा की स्थिति को ध्यान में रखते हुए आम, अमरूद, नींबू, संतरा, सीताफल, कटहल और केला जैसे फलदार पौधों का रोपण करने की सलाह दी है। इसके लिए उद्यानिकी विभाग से तकनीकी मार्गदर्शन लेने की बात कही गई है।

वहीं पशुपालकों को पशुओं के चारे की पोषण गुणवत्ता बढ़ाने के लिए भूसे का यूरिया उपचार करने, एंथ्रेक्स, गलघोटू और लंगड़ी बुखार जैसे रोगों के टीकाकरण कराने तथा बाह्य परजीवियों के नियंत्रण के लिए ब्यूटॉक्स दवा का उपयोग करने की सलाह दी गई है।

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून से पहले वैज्ञानिक सलाह के अनुसार तैयारी करने पर किसानों को बेहतर उत्पादन के साथ अधिक लाभ प्राप्त हो सकेगा और खरीफ सीजन की शुरुआत भी सुचारू रूप से हो सकेगी।

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