पंजाब में किसान आंदोलन खत्म, कर्ज राहत और गन्ने के भाव पर सरकार का लिखित भरोसा
20 सितंबर 2026, चंडीगढ़: पंजाब में किसान आंदोलन खत्म, कर्ज राहत और गन्ने के भाव पर सरकार का लिखित भरोसा – पंजाब में चंडीगढ़-मोहाली सीमा पर करीब एक सप्ताह से चल रहा किसान यूनियनों का धरना 7 सितंबर 2026 को भगवंत मान सरकार के लिखित आश्वासन के बाद समाप्त हो गया। सरकार ने किसानों की कई प्रमुख मांगें मान लीं, जिनमें सहकारी बैंकों के कृषि ऋणों पर एकमुश्त निपटान (वन टाइम सेटलमेंट यानी OTS) नीति बनाना और गन्ने का देश में सबसे ऊंचा भाव बरकरार रखना शामिल है।
कौन सी मांगें मानी गईं
सरकार ने पंजाब पुनर्गठन अधिनियम की धारा 78, 79 और 80 (जल-बंटवारे से जुड़ी) को रद्द कराने के लिए एक महीने के भीतर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने पर सहमति जताई। इसके साथ ही बांध सुरक्षा अधिनियम को निरस्त करने और बीज विधेयक, 2025 को वापस लेने की मांग पर भी सैद्धांतिक सहमति बनी।
सहकारी बैंकों के कर्जदार किसानों के लिए OTS नीति बनाने हेतु सभी राजनीतिक दलों के परामर्श से एक विधानसभा समिति गठित होगी। सरकार ने गन्ने का मूल्य देश में सबसे ऊंचा बनाए रखने का दोहराया वादा किया और “वन विंडो, वन पेमेंट” व्यवस्था अब निजी चीनी मिलों तक बढ़ाने की घोषणा की।
“वन विंडो, वन पेमेंट” व्यवस्था के तहत गन्ना किसानों को एक ही खिड़की से सीधे बैंक खाते में भुगतान मिलता है, जिससे बिचौलियों की भूमिका घटती है और भुगतान में देरी की शिकायतें कम होती हैं। अभी तक यह सुविधा मुख्य रूप से सहकारी चीनी मिलों तक सीमित थी, अब इसे निजी मिलों तक भी बढ़ाया जाएगा।
पंजाब में जल-बंटवारे का मुद्दा लंबे समय से राज्य की राजनीति और किसान संगठनों के बीच संवेदनशील विषय रहा है, और सतलुज-यमुना लिंक नहर जैसे पुराने विवाद भी इससे जुड़े रहे हैं। वहीं बीज विधेयक 2025 को लेकर देशभर के किसान संगठनों को आशंका है कि इसके कुछ प्रस्तावित प्रावधानों से बीज की कीमतें बढ़ सकती हैं और किसानों के परंपरागत बीज बचाने-बांटने के अधिकार पर असर पड़ सकता है, यही वजह है कि पंजाब के किसान संगठन भी इसे वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
सरकार का पक्ष
पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुडियां ने कहा, “The Bhagwant Mann Government is fully committed to the welfare of our annadatas. We believe in resolving issues through dialogue and have accepted their genuine demands with full transparency in writing.” (भगवंत मान सरकार हमारे अन्नदाताओं के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हम संवाद से मुद्दे सुलझाने में विश्वास रखते हैं और किसानों की वाजिब मांगों को पूरी पारदर्शिता के साथ लिखित रूप में स्वीकार किया है।)
फिलहाल अधिकतर मांगें “समिति गठन और आश्वासन” के स्तर पर हैं — कर्ज माफी की ठोस राशि या अंतिम नीति अभी घोषित नहीं हुई है। विशेष विधानसभा सत्र एक महीने के भीतर, यानी करीब 7 अक्टूबर 2026 तक बुलाए जाने की बात कही गई है।
फिर भी सहकारी बैंकों के कर्जदार किसानों को OTS नीति से ब्याज-पेनल्टी में संभावित राहत मिलने की उम्मीद बनी है, और गन्ना किसानों को भाव को लेकर फिलहाल आश्वासन मिल गया है।
पंजाब देश के सबसे बड़े गन्ना और गेहूं-धान उत्पादक राज्यों में है, इसलिए यहां की कृषि-नीति का असर व्यापक रहता है। अगर OTS नीति और बीज विधेयक पर आगे ठोस फैसले होते हैं, तो इसका असर न सिर्फ पंजाब बल्कि अन्य राज्यों के किसान संगठनों की मांगों पर भी पड़ सकता है। कृषि-इनपुट और चीनी मिल कारोबार दोनों को आने वाले विशेष सत्र के नतीजों का इंतजार रहेगा।
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