किसानों के नुकसान की भरपाई होगी

व्हाट्सएप या फेसबुक पर शेयर करने के लिए नीचे क्लिक करें

कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 संसद में पेश होगा

नई दिल्ली। हाल ही में कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 के मसौदे को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंजूरी दे दी है । जिसमें किसानों के हित में कीटनाशक का सुरक्षित एवं प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने की नई पहल की गई है।

इसे जल्द ही संसद में पेश किया जाएगा। यह जानकारी सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने बैठक के बाद दी। श्री जावड़ेकर के अनुसार अब तक 1968 के नियमों के तहत कीटनाशकों का प्रबंधन किया जा रहा था । हालाँकि 2008 में कीटनाशक प्रबंधन विधेयक आया था, लेकिन वह संसद से पारित नहीं हो सका था ।

उस विधेयक को वापस लेकर और स्थायी समिति की सिफारिशों एवं अन्य सुझावों पर विचार करने के बाद नए रूप में कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 लाया जा रहा है।

विधेयक का उद्देश्य :

इस विधेयक का उद्देश्य कीटनाशकों के व्यापार को विनियमित कर किसानों को हानिकारक कृषि रसायनों के उपयोग से होने वाले नुकसान की भरपाई करना है।कहा जा रहा है कि इस विधेयक से किसानों के हितों की रक्षा होगी और उन्हें सुरक्षित कीटनाशक मिलेगा।

इससे जैविक कीटनाशकों को भी बढ़ावा मिलेगा। यह विधेयक किसानों को कीटनाशक संबंधी सभी जानकारी प्राप्त करने का अधिकार देगा, क्योंकि डेटा खुले स्रोत और सभी भाषाओं में होगा।

विधेयक के प्रावधान :

कीटनाशक प्रबंधन विधेयक 2020 में किसानों को नकली और अनधिकृत कीटनाशक से बचाने के प्रावधान किए गए हैं। विधेयक के अनुसार यदि कोई मिलावटी और बिना पंजीकरण वाला कीटनाशक बेचता है, तो उस पर जुर्माना लगाने के साथ ही आपराधिक मामला भी चलाया जा सकता है।इस विधेयक से गुमराह करने वाले विज्ञापनों पर रोक लगेगी।

कीटनाशकों से हुए नुकसान पर किसानों को मुआवजा मिलेगा, जिसकी पूर्ति कीटनाशक कंपनियों से वसूले गए जुर्माने से की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि भारत दुनिया का चौथा बड़ा कीटनाशक उत्पादक देश है । देश में कीटनाशक का 20 हजार करोड़ से अधिक का कारोबार है। धान के बाद कपास में सबसे ज्यादा कीटनाशक उपयोग होता है। देश के 8 राज्यों में 70 प्रतिशत कीटनाशकों की खपत है।

292 कीटनाशक रजिस्टर्ड है और 104 कीटनाशकों पर दो या दो से अधिक देशों में रोक लगी हुई है। अब यह देखना बाकी है कि संसद में पारित होने के बाद यह विधेयक किसानों के लिए कितना हितकारी साबित होगा।

व्हाट्सएप या फेसबुक पर शेयर करने के लिए नीचे क्लिक करें
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

nine − three =

Open chat
1
आपको यह खबर अपने किसान मित्रों के साथ साझा करनी चाहिए। ऊपर दिए गए 'शेयर' बटन पर क्लिक करें।