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राज्य कृषि समाचार (State News)

सोयाबीन की नई तकनीकों से बुवाई के प्रदर्शन 

27 जुलाई 2026, शहडोल: सोयाबीन की नई तकनीकों से बुवाई के प्रदर्शन –  कृषि विज्ञान केंद्र, शहडोल के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. मृगेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में केंद्र के कृषि अभियांत्रिकी वैज्ञानिक डॉ. दीपक चौहान द्वारा सोयाबीन की रिज बेड (Ridge Bed), रिज एवं फरो तथा ब्रॉड बेड पद्धति से बुवाई के प्रदर्शन ग्राम चटहा एवं पठरा में कृषकों के यहाँ डाले गए एवं डॉ. चौहान द्वारा कृषकों को रिज बेड, रिज एंड फरो एवं ब्रॉड बेड पद्धति के महत्व के बारे में बताया कि किसान सामान्यतः छिटकवा बोनी करते हैं, जो कि सही नहीं है। छिटकवा बोनी करने से बीज सही गहराई पर नहीं रहता है या तो वह सतह पर रहता है या ज्यादा गहराई पर रहता है एवं परिस्थिति में बीज का अंकुरण नहीं हो पाता है, जिसके कारण किसानों को घाटा होता है। साथ ही छिटकवा बोनी करने से पौधे से पौधे की दूरी निश्चित नहीं की जा सकती है, जिसके कारण प्रति एकड़ जितनी पौध संख्या रहनी चाहिए उतनी निश्चित नहीं की जा सकती है।

रिज बेड पद्धति बुवाई की ऐसी तकनीक है, जिसमें ऊँची क्यारी पर दो लाइन में बुवाई कर सकते हैं एवं बेड के ऊपर की चौड़ाई 75 सेमी होती है। ब्रॉड बेड पद्धति बुवाई की ऐसी तकनीक है, जिसमें ऊँची क्यारी पर 5 लाइन में बुवाई कर सकते हैं एवं पाँच लाइन के बाद एक नाली का निर्माण होता है एवं इस नाली से अत्यधिक वर्षा की स्थिति में खेत का अतिरिक्त पानी नाली की सहायता से बहकर खेत से बाहर निकल जाएगा, जिससे फसल को नुकसान नहीं होगा।

अगर वर्षा कम होगी तो इस नाली में पानी को संग्रहित कर नमी को बनाए रख सकते हैं, जिससे फसल की बढ़वार बिना व्यवधान के होती रहती है। भारी बारिश होने की वजह से सोयाबीन की फसल खराब हो जाती है। खेतों में बारिश का पानी भरा होने के कारण फसल गल जाती है। सोयाबीन की फलियाँ बनते समय 12–15 दिनों तक बारिश नहीं होने के कारण फलियों में दाना भराव पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, जिससे उपज में गिरावट देखने को मिलती है। इन सभी कारणों को देखते हुए कृषकों को सोयाबीन की बुवाई बीबीएफ पद्धति (चौड़ी क्यारी व नाली पद्धति) या रेज्ड बेड पद्धति (नाली सिंचित उभरी क्यारी पद्धति) या रिज एवं फरो पद्धति द्वारा बुवाई करनी चाहिए। जिससे सोयाबीन की फसल में होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है। जिन कृषकों के पास सामान्य सीड ड्रिल (सामान्यतः 9 टाइन रिज फरो सीड ड्रिल) है, वह उसी सीड ड्रिल में रिजर का अटैचमेंट लगाकर, उसे बीबीएफ सीड ड्रिल में परिवर्तित कर, अपनी फसल अवधि, किस्म एवं फैलाव के अनुसार 5 पंक्तियों के बाद एक नाली बनाकर इस विधि से बुवाई का लाभ ले सकते हैं।

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