यूपी में डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा: 10 उन्नत देशी गायों की यूनिट पर मिलेगा 11 लाख रुपये तक अनुदान
नंद बाबा दुग्ध मिशन के तहत किसानों और ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की पहल, बैंक ऋण की सुविधा भी उपलब्ध
01 अगस्त 2026, लखनऊ: यूपी में डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा: 10 उन्नत देशी गायों की यूनिट पर मिलेगा 11 लाख रुपये तक अनुदान – उत्तर प्रदेश सरकार किसानों, पशुपालकों और ग्रामीण युवाओं को डेयरी व्यवसाय से जोड़ने के साथ प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत विभिन्न योजनाएं संचालित कर रही है। इन योजनाओं के माध्यम से डेयरी इकाइयों की स्थापना पर अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर विकसित हों और किसानों तथा पशुपालकों की आय में वृद्धि हो सके।
नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत संचालित मिनी नंदिनी कृषक समृद्धि योजना में पात्र आवेदकों को 10 उन्नत देशी नस्ल की गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने के लिए वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है। योजना के तहत डेयरी इकाई की अनुमानित परियोजना लागत करीब 23.60 लाख रुपये निर्धारित की गई है। इस पर राज्य सरकार द्वारा परियोजना लागत का लगभग 50 प्रतिशत अनुदान दिए जाने की व्यवस्था है।
योजना के अनुसार, आवेदक को परियोजना लागत का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा, यानी करीब 3.54 लाख रुपये, स्वयं वहन करना होगा। शेष राशि की व्यवस्था बैंक ऋण के माध्यम से की जा सकेगी। इस तरह सीमित पूंजी रखने वाले किसान और पशुपालक भी सरकारी सहायता तथा बैंक वित्तपोषण के सहयोग से आधुनिक डेयरी व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।
देशी नस्ल की गायों को मिलेगा बढ़ावा
प्रदेश सरकार का उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के साथ ही उन्नत भारतीय देशी नस्ल की गायों का संरक्षण और संवर्धन करना भी है। योजना के अंतर्गत साहीवाल, गिर और थारपारकर जैसी उन्नत देशी नस्ल की गायों की डेयरी इकाइयों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
इन नस्लों को बेहतर दुग्ध उत्पादन क्षमता और अनुकूल परिस्थितियों में पालन की विशेषताओं के कारण उपयोगी माना जाता है। सरकार का प्रयास है कि वैज्ञानिक पशुपालन और बेहतर नस्लों के माध्यम से डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाया जाए।
वहीं, नंद बाबा दुग्ध मिशन के अंतर्गत बड़ी डेयरी इकाइयों को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। नंदिनी कृषक समृद्धि योजना के तहत 25 देशी गायों की डेयरी इकाई स्थापित करने पर भी पात्र लाभार्थियों को परियोजना लागत का 50 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
योजना के लिए अनुभव और भूमि जरूरी
डेयरी व्यवसाय शुरू करने के लिए योजना का लाभ लेने वाले आवेदक के पास गाय या भैंस पालन का कम से कम तीन वर्ष का अनुभव होना आवश्यक है। इसके अलावा डेयरी शेड और अन्य आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने के लिए न्यूनतम 0.20 एकड़ भूमि तथा हरा चारा उत्पादन के लिए कम से कम 0.80 एकड़ भूमि होना भी जरूरी बताया गया है।
डेयरी व्यवसाय से किसानों को दूध बिक्री के साथ गोबर से जैविक खाद और अन्य कृषि उपयोगी उत्पाद तैयार करने के अवसर भी मिल सकते हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में अतिरिक्त आय और स्थानीय रोजगार की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद है।
योजना में रुचि रखने वाले उत्तर प्रदेश के किसान और पशुपालक नंद बाबा दुग्ध मिशन के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन से पहले पात्रता, आवश्यक दस्तावेज, परियोजना लागत और बैंक ऋण से संबंधित शर्तों की जानकारी प्राप्त करना आवश्यक होगा।
उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल डेयरी क्षेत्र को संगठित और आधुनिक बनाने के साथ किसानों तथा ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सरकारी अनुदान, बैंक ऋण और उन्नत देशी नस्लों के प्रोत्साहन से प्रदेश में दुग्ध उत्पादन तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की संभावना है।
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