हरियाणा में खरीफ 2026 के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध: कृभको
02 जून 2026, चंडीगढ़: हरियाणा में खरीफ 2026 के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध: कृभको – पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में उत्पन्न बाधाओं के बावजूद हरियाणा में खरीफ 2026 सीजन के दौरान किसानों को उर्वरकों की कोई कमी नहीं होगी। भारतीय किसान उर्वरक सहकारी लिमिटेड (कृभको) ने आश्वासन दिया है कि राज्य में आगामी धान बुवाई और खरीफ फसलों की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त उर्वरक भंडार उपलब्ध हैं।
फोरम फॉर इंडियन जर्नलिस्ट्स ऑन एजुकेशन, एनवायरनमेंट, हेल्थ एंड एग्रीकल्चर (FIJEEHA) द्वारा एलायंस फॉर चेंज, ट्रांसफॉर्मेशन एंड इनोवेशन (ACTION) के सहयोग से आयोजित मीडिया कार्यशाला में कृभको हरियाणा के राज्य विपणन प्रबंधक देश राज सिंह विश्नोई ने बताया कि खरीफ 2026 के लिए हरियाणा की कुल उर्वरक आवश्यकता लगभग 16.20 लाख मीट्रिक टन आंकी गई है।
उन्होंने बताया कि कुल मांग में सबसे बड़ा हिस्सा यूरिया का है, जिसकी आवश्यकता लगभग 11 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है। इसके अलावा राज्य को 2.80 लाख मीट्रिक टन डीएपी, 0.95 लाख मीट्रिक टन एसएसपी, 0.70 लाख मीट्रिक टन एमओपी, 0.60 लाख मीट्रिक टन कॉम्प्लेक्स उर्वरक तथा 0.15 लाख मीट्रिक टन सिटी कम्पोस्ट की आवश्यकता होगी।
देश राज सिंह विश्नोई ने कहा, “वैश्विक चुनौतियों और आपूर्ति श्रृंखला में आने वाली बाधाओं के बावजूद सभी संबंधित पक्ष समन्वित रूप से कार्य कर रहे हैं ताकि खरीफ सीजन के दौरान हरियाणा के किसानों को समय पर उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके।”
उन्होंने कहा कि हरियाणा में धान जैसी पोषक तत्वों की अधिक मांग वाली फसलों के कारण यूरिया सहित विभिन्न उर्वरकों की मांग लगातार बनी रहती है। ऐसे में कृषि उत्पादकता बनाए रखने के लिए उर्वरकों की निर्बाध उपलब्धता और संतुलित पोषण प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है।
विश्नोई के अनुसार हरियाणा सरकार, सहकारी संस्थाएं और उर्वरक कंपनियां मिलकर किसानों तक समय पर उर्वरक पहुंचाने, संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने तथा मिट्टी के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। इसके साथ ही किसानों को नैनो उर्वरकों, जैव उर्वरकों और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है, जिससे उत्पादकता बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित हो सके।
कार्यशाला में कृभको की जलवायु-अनुकूल और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने वाली पहलों पर भी चर्चा की गई। विश्नोई ने बताया कि संस्था कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए कार्य कर रही है।
इस दिशा में कृभको द्वारा मृदा परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और फसल आधारित पोषक तत्व प्रबंधन पर जागरूकता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना और संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देना है।
कृभको नैनो उर्वरकों और जैव उर्वरकों के उपयोग को भी सक्रिय रूप से प्रोत्साहित कर रही है। नैनो यूरिया और जैव उर्वरकों के प्रयोग से पोषक तत्व उपयोग दक्षता बढ़ती है, उर्वरकों की बर्बादी कम होती है तथा पर्यावरण प्रदूषण में कमी आती है, जिससे दीर्घकालिक टिकाऊ कृषि को बढ़ावा मिलता है।
इस अवसर पर FIJEEHA के अध्यक्ष डॉ. नवनीत आनंद ने कहा कि कृभको ने हरियाणा सहित देशभर के लाखों किसानों तक निर्बाध उर्वरक आपूर्ति सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और सहकारिता आधारित मॉडल के माध्यम से ग्रामीण सशक्तिकरण को नई दिशा दी है।
ACTION की प्रज्ञा लाल रंजन ने कहा कि खरीफ सीजन हरियाणा की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और किसानों को समय पर गुणवत्तापूर्ण उर्वरकों की उपलब्धता खाद्य सुरक्षा, कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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