र्नाटक में सूखा प्रभावित किसानों को कर्ज चुकौती में 12 महीने की राहत
20 सितंबर 2026, बेंगलुरु (कर्नाटक): र्नाटक में सूखा प्रभावित किसानों को कर्ज चुकौती में 12 महीने की राहत – कर्नाटक की राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (SLBC) ने राज्य के सूखा प्रभावित किसानों के लिए एक बड़ी राहत योजना की घोषणा की है। इसके तहत 24 जिलों के 101 सूखाग्रस्त तालुकों के किसानों को कृषि और कृषि-संबद्ध बैंक ऋणों की चुकौती पर 12 महीने का मोहलत (मोरेटोरियम) मिलेगा। यह फैसला मुख्य सचिव डॉ. शालिनी रजनीश की अध्यक्षता में हुई बैठक के बाद 16 सितंबर 2026 को लिया गया।
किन किसानों को मिलेगा फायदा
राज्य में घोषित 101 तालुकों में से 89 गंभीर सूखा-प्रभावित और 12 सामान्य सूखा-प्रभावित श्रेणी में रखे गए हैं। मोहलत अवधि के बाद सामान्य सूखा-प्रभावित तालुकों में ऋण अवधि तीन साल (36 महीने) तक और गंभीर सूखा-प्रभावित तालुकों में पांच साल (60 महीने) तक बढ़ाकर पुनर्गठित की जाएगी।
इससे प्रभावित किसानों को तत्काल किस्त न चुका पाने की स्थिति में डिफॉल्टर घोषित होने या साख खराब होने का डर नहीं रहेगा, और उन्हें अगली फसल के लिए नई तैयारी करने का समय मिलेगा।
सूखे की गंभीरता और आगे की राहत की तैयारी
राज्य सरकार ने शुरुआती आकलन में सूखे से कृषि क्षेत्र को करीब 18,000 करोड़ रुपये के नुकसान का अनुमान जताया है। 14 सितंबर को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि अब 200 से अधिक तालुके सूखे से प्रभावित हो चुके हैं, और केंद्र सरकार के मानदंडों के अनुसार आगे और तालुकों की घोषणा की जाएगी।
सूखे और किसानों की समस्याओं पर चर्चा के लिए कर्नाटक विधानसभा का तीन दिवसीय विशेष सत्र 21 से 23 सितंबर 2026 तक बुलाया गया है, जिसमें आगे की राहत राशि और उपायों पर फैसला होने की उम्मीद है।
उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के अलावा उप मुख्यमंत्री जी परमेश्वर ने भी 12 सितंबर को कहा था कि राज्य सरकार की दूसरे चरण की सूखा राहत योजना में सभी नए घोषित तालुकों को शामिल किया जाएगा, यानी कर्ज राहत का दायरा आने वाले दिनों में और बढ़ने के संकेत हैं।
बैंकों को निर्देश दिया गया है कि वे सूखा प्रभावित तालुकों के किसानों के खातों की पहचान कर उनके मौजूदा फसल और सावधि ऋणों को स्वतः पुनर्गठित करें, ताकि किसानों को अलग से आवेदन करने की जरूरत कम से कम पड़े। सहकारी और वाणिज्यिक दोनों तरह के बैंकों को इस निर्देश का पालन करने को कहा गया है।
राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति की बैठकों में आमतौर पर राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा अग्रणी बैंक (लीड बैंक), भारतीय रिज़र्व बैंक और नाबार्ड के प्रतिनिधि भी शामिल होते हैं, ताकि किसी भी राहत योजना को सभी बैंकों में एक समान तरीके से लागू किया जा सके। ऐसी मोहलत अवधि के दौरान आमतौर पर किसानों के खातों को गैर-निष्पादित आस्ति (एनपीए) घोषित नहीं किया जाता, जिससे उनकी भविष्य में कर्ज लेने की पात्रता प्रभावित नहीं होती।
कर्नाटक में इससे पहले भी सूखे के दौर में इसी तरह की राहत योजनाएं लागू होती रही हैं, लेकिन इस बार राहत का दायरा और अवधि दोनों पहले की तुलना में बड़े बताए जा रहे हैं, क्योंकि सरकार ने खुद स्वीकार किया है कि सूखे की चपेट में आने वाले तालुकों की संख्या शुरुआती अनुमान से कहीं ज्यादा निकली है।
कर्ज चुकौती में राहत मिलने से किसानों पर तत्काल नकदी का दबाव घटेगा और वे बिना ब्याज-पेनल्टी की चिंता किए अगली फसल के लिए बीज, खाद और अन्य इनपुट खरीद सकेंगे। इससे सूखा प्रभावित इलाकों में कृषि-इनपुट कारोबार को भी सहारा मिलने की उम्मीद है, जो पिछले कुछ महीनों से मांग में कमी झेल रहा था। आने वाले विशेष सत्र में तय होने वाली आगे की राहत पर किसानों और व्यापारियों दोनों की नजर रहेगी।
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