अब जमीन और फसल के आधार पर मिलेगी सब्सिडी वाली खाद, सरकार ने शुरू किया नया पायलट प्रोजेक्ट
25 जुलाई 2026, नई दिल्ली: अब जमीन और फसल के आधार पर मिलेगी सब्सिडी वाली खाद, सरकार ने शुरू किया नया पायलट प्रोजेक्ट – केंद्र सरकार ने किसानों तक सब्सिडी वाली खाद की आपूर्ति को अधिक पारदर्शी, जरूरत आधारित और तकनीक-संचालित बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत ‘फ्रेमवर्क फॉर फर्टिलाइजर सेल’ नाम से एक पायलट परियोजना शुरू की गई है। फिलहाल इस व्यवस्था को देश के 20 राज्यों के 40 जिलों में लागू किया गया है, जहां किसानों को उनकी जमीन के रकबे और बोई गई फसल के आधार पर सब्सिडी वाली खाद उपलब्ध कराई जाएगी। केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने लोकसभा में लिखित जवाब के दौरान इसकी जानकारी दी।
मोबाइल ऐप के जरिए होगी खाद की बुकिंग
नई व्यवस्था के तहत किसान या उनका अधिकृत प्रतिनिधि मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से पंजीकरण कर सकेगा। पंजीकरण के दौरान किसान को अपनी कृषि भूमि का विवरण और उसमें बोई गई फसल की जानकारी दर्ज करनी होगी। इसके बाद किसान अपनी जरूरत के अनुसार पहले से खाद की बुकिंग कर सकेगा। सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से खाद की वास्तविक मांग का बेहतर अनुमान लगाया जा सकेगा और किसानों को समय पर आवश्यक मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराना आसान होगा।
20 राज्यों के 40 जिलों में शुरू हुआ पायलट
सरकार के अनुसार यह योजना फिलहाल पायलट आधार पर लागू की गई है। पहले चरण में 20 राज्यों के 40 जिलों को इसमें शामिल किया गया है। इन जिलों में पात्र किसानों को उनकी फसल और भूमि के रिकॉर्ड के आधार पर ही सब्सिडी वाली खाद दी जा रही है। पायलट परियोजना के परिणामों की समीक्षा के बाद इसे अन्य जिलों और राज्यों में भी लागू करने पर निर्णय लिया जाएगा।
देशभर में पहले से लागू है DBT प्रणाली
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देशभर में पहले से ही डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) आधारित उर्वरक बिक्री प्रणाली लागू है। इस व्यवस्था के तहत किसानों को आधार प्रमाणीकरण के बाद रियायती दर पर खाद उपलब्ध कराई जाती है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी सब्सिडी का लाभ केवल वास्तविक किसानों तक ही पहुंचे और उर्वरकों के वितरण में पारदर्शिता बनी रहे।
8.4 करोड़ किसानों को मिला सब्सिडी का लाभ
सरकार के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025-26 के दौरान देशभर में करीब 2.87 लाख सक्रिय उर्वरक विक्रेताओं के माध्यम से 746.57 लाख मीट्रिक टन सब्सिडी वाली खाद का वितरण किया गया। इस दौरान 8.4 करोड़ किसानों ने इसका लाभ उठाया। वहीं, उर्वरक सब्सिडी के लिए केंद्र सरकार ने 2.17 लाख करोड़ रुपये का प्रावधान किया।
खाद खरीदने के लिए लागू हैं नए नियम
सरकार ने स्पष्ट किया कि सब्सिडी वाली खाद खरीदने के लिए 100 प्रतिशत आधार प्रमाणीकरण अनिवार्य है। खाद का समान वितरण सुनिश्चित करने के लिए प्रति खरीदार हर महीने अधिकतम 50 बैग खरीदने की सीमा तय की गई है। हालांकि, कुछ राज्यों में स्थानीय जरूरतों के अनुसार अलग व्यवस्था लागू है। उदाहरण के लिए, तेलंगाना में प्रति एकड़ अधिकतम दो बैग यूरिया खरीदने की सीमा निर्धारित की गई है, जबकि जम्मू-कश्मीर में एक सीजन के दौरान प्रति खरीदार 60 बैग तक खरीदने की अनुमति है।
डिजिटल डैशबोर्ड से होगी निगरानी
उर्वरक वितरण व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड इंटीग्रेटेड फर्टिलाइजर मैनेजमेंट सिस्टम (iFMS) के डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराए जाते हैं। राज्य सरकारों के अधिकारी इन आंकड़ों की मदद से खाद की बिक्री और वितरण की लगातार निगरानी कर सकते हैं। सरकार का मानना है कि नई व्यवस्था से जरूरतमंद किसानों तक सही समय पर सही मात्रा में उर्वरक पहुंचाने में मदद मिलेगी, साथ ही सब्सिडी वाली खाद के दुरुपयोग पर भी प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
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