रबी फसलों का समर्थन मूल्य बढ़ें

चने का एमएसपी 4875 रु. प्रति क्विंटल हुआ

समर्थन मूल्य में 85 से 325 रु. प्रति क्विंटल तक बढ़े

दलहन में देश को आत्मनिर्भर बनाने और किसानों को दालों की खेती में प्रोत्साहित करने के लिए केन्द्र सरकार ने दालों के समर्थन मूल्य में 325 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि की है। वहीं गेहूं के एमएसपी में केवल 85 रु. प्रति क्विंटल की बढ़ौत्री की गई है। देश में गेहूं और धान का रिकॉर्ड हो रहा है, जो वर्तमान की आवश्यकता से अधिक है। गेहूं का रिकॉर्ड उत्पादन लगभग 10 करोड़ टन है वहीं दालों का कुल उत्पादन लगभग 2.54 करोड़ टन है, जो वर्तमान आवश्यकता से कम है। पिछले खरीफ में मानसून की मनमर्जी से त्रस्त किसानों को रबी मौसम में बुवाई पूर्व उत्साहवर्धन करने के लिए केन्द्र ने समर्थन मूल्य में वृद्धि की है।

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में गत दिनों हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीईए) ने रबी 2019-20 के लिए फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित कर दिया। रबी फसलों का विपणन वर्ष 2020-21 में किया जाएगा। सरकार ने गेहूं के समर्थन मूल्य में मात्र 85 रु. की वृद्धि कर इसका मूल्य 1925 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है, जबकि गत वर्ष इसका एमएसपी 1840 रुपए प्रति क्विंटल था।

सरकार ने 2020-21 विपणन सीजन के लिए गेहूं के उत्पादन की औसत भारित लागत 923 रुपये प्रति क्विंटल रहने का अनुमान जताया है जो मौजूदा सीजन की औसत उत्पादन लागत से 57 रुपये अधिक है। सरकार ने दावा किया है कि नया एमएसपी उत्पादन की औसत भारित लागत से 109 प्रतिशत अधिक है।

रबी सीजन में ली जाने वाली मुख्य तिलहनी फसल सरसों का समर्थन मूल्य 4,425 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है जो गत वर्ष 4200 रु. प्रति क्विंटल था, वहीं प्रमुख दलहनी फसल चने का एमएसपी 4875 रु. प्रति क्विंटल तय किया गया है जो गत वर्ष 4620 रु. प्रति क्विंटल था। इन दोनों फसलों में क्रमश: 225 और 255 रु. प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।  

सरकार द्वारा केंद्रीय भंडारण में 1 अक्टूबर तक गेहूं का स्टॉक 3.931 करोड़ टन रहने का अनुमान जताया गया है जो इस अवधि के लिए बफर स्टॉक मानदंड से लगभग 92 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने जौ का एमएसपी भी 85 रुपये तक बढ़कर 1,525 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जबकि पिछले साल का एमएसपी 1,440 रुपये प्रति क्विंटल था। इसके अलावा दलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए मसूर का एमएसपी 325 रुपये बढ़ाकर 4,800 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया जो पिछले साल 4,475 रुपये प्रति क्विंटल था। कुसुम का न्यूनतम समर्थन मूल्य पिछले साल के 4,945 रुपये प्रति क्विंटल के मुकाबले 270 रुपये तक बढ़कर 5,215 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है।

एमएसपी के निर्धारण में उत्पादन पर लागत एक मुख्य कारक है। रबी फसलों के लिए इस वर्ष एमएसपी में की गई वृद्धि से किसानों को औसत उत्पादन लागत पर 50 प्रतिशत ज्यादा वापसी मिलेगी। भारत की भारी औसत उत्पादन लागत की तुलना में गेहूं के लिए वापसी 109 प्रतिशत है। जौ के लिए 66 प्रतिशत, चने के लिए 74 प्रतिशत, मसूर के लिए 76 प्रतिशत, सरसों के लिए 90 प्रतिशत एवं कुसुम के लिए 50 प्रतिशत है।

इस वर्ष के लिए घोषित किया गया रबी फसलों का एमएसपी सरकार के कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के अनुसार है। गेहूं रबी की मुख्य फसल है। इसकी बुआई शुरू हो गई है। इसका विपणन अगले वर्ष अप्रैल के बाद किया जाएगा। 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *