आईसीएआर ने पूरे किए 98 वर्ष, 2025-26 में विकसित कीं 386 उन्नत फसल किस्में; 43 नई किस्में और 17 तकनीकें जारी
17 जुलाई 2026, नई दिल्ली: आईसीएआर ने पूरे किए 98 वर्ष, 2025-26 में विकसित कीं 386 उन्नत फसल किस्में; 43 नई किस्में और 17 तकनीकें जारी – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने गुरुवार को अपना 98वां स्थापना दिवस मनाया। इस अवसर पर परिषद ने बीते एक वर्ष की वैज्ञानिक उपलब्धियों का लेखा-जोखा प्रस्तुत करते हुए जलवायु-अनुकूल कृषि, अनुसंधान आधारित नवाचार और किसानों तक तकनीक की तेज़ पहुँच को अपनी प्राथमिकता बताया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि वर्ष 2025-26 के दौरान आईसीएआर ने 44 फसलों की 386 उन्नत किस्में विकसित की हैं, जिनमें 94 प्रतिशत किस्में जलवायु परिवर्तन के प्रति सहनशील (क्लाइमेट रेजिलिएंट) हैं, जबकि 29 किस्में जैव-सुदृढ़ (बायोफोर्टिफाइड) हैं।
उन्होंने कहा कि भारत की कृषि यात्रा में आईसीएआर की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। कृषि वैज्ञानिकों के शोध और नवाचारों ने देश को खाद्यान्न, बागवानी, दुग्ध और मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ दिलाई हैं। उन्होंने कहा कि किसान कृषि की आत्मा हैं और वैज्ञानिक उसका मस्तिष्क। इसलिए अब आवश्यकता ऐसी शोध प्रणाली की है जो किसानों की वास्तविक जरूरतों के अनुरूप हो तथा जलवायु परिवर्तन, दलहन एवं तिलहन में आत्मनिर्भरता, गुणवत्तापूर्ण कृषि शिक्षा और नई तकनीकों के व्यावसायीकरण पर केंद्रित हो। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) के माध्यम से तकनीकों के व्यापक प्रसार पर भी बल दिया।
हर वर्ष 16 जुलाई को मनाया जाने वाला आईसीएआर स्थापना दिवस वर्ष 1928 में परिषद की स्थापना की याद दिलाता है। पिछले 98 वर्षों में आईसीएआर ने कृषि अनुसंधान, शिक्षा और विस्तार सेवाओं को मजबूत करने के साथ-साथ देश की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह ने कहा कि कृषि अनुसंधान का लाभ तेजी से किसानों, पशुपालकों और मत्स्य पालकों तक पहुँचाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्रों की भूमिका और मजबूत की जानी चाहिए। उन्होंने विश्वास जताया कि पशुपालन एवं डेयरी विभाग और आईसीएआर के बीच हुआ समझौता अनुसंधान, नवाचार और तकनीक हस्तांतरण को नई गति देगा।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, रामनाथ ठाकुर तथा मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने भी विज्ञान आधारित कृषि, प्राकृतिक खेती, मृदा स्वास्थ्य, जलवायु-अनुकूल तकनीकों, सूक्ष्म सिंचाई, नैनो उर्वरकों, मत्स्य पालन और आधुनिक पशुधन प्रौद्योगिकियों को विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम में कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट ने वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों का विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि फसल, बागवानी, पशुधन और मत्स्य क्षेत्रों में उत्पादन वृद्धि से देश को लगभग 1.70 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक मूल्य प्राप्त हुआ, जबकि कृषि अनुसंधान का योगदान लगभग 55 हजार करोड़ रुपये आंका गया है।
उन्होंने बताया कि आईसीएआर की वैज्ञानिक तकनीकों का लाभ लगभग एक करोड़ किसानों तक सीधे और पाँच करोड़ से अधिक किसानों तक मीडिया एवं सोशल मीडिया के माध्यम से पहुँचा। इसी अवधि में परिषद ने 18 अंतरराष्ट्रीय समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर वैश्विक कृषि अनुसंधान सहयोग को भी मजबूत किया।
स्थापना दिवस के अवसर पर आईसीएआर ने 43 नई उन्नत फसल किस्में, 17 अत्याधुनिक कृषि तकनीकें और 14 प्रकाशनों का लोकार्पण किया।
जारी की गई प्रमुख तकनीकों में नई बासमती धान किस्में, लवणीय एवं क्षारीय भूमि के लिए जलवायु-अनुकूल धान, निर्यातोन्मुख आम उत्पादन तकनीक, भारत का पहला स्वदेशी अफ्रीकन स्वाइन फीवर टीका, डिजिटल स्वाइन डिजीज एटलस तथा छोटे किसानों के लिए कम लागत वाली कसावा हार्वेस्टर तकनीक शामिल हैं।
कृषि अनुसंधान को किसानों तक तेजी से पहुँचाने और तकनीकों के व्यावसायीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आईसीएआर ने 51 उद्योग भागीदारों के साथ 72 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर भी हस्ताक्षर किए।
इस अवसर पर 150 अस्थायी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित सेवा के नियुक्ति पत्र भी प्रदान किए गए।
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