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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

आईसीएआर-आईएआरआई और आईसीएआर-आईवीआरआई की QS रैंकिंग 2026 में एंट्री, कृषि शिक्षा को मिली वैश्विक पहचान

आईसीएआर संस्थानों की वैश्विक रैंकिंग में एंट्री, कृषि शिक्षा के लिए बड़ा कदम

31 मार्च 2026, नई दिल्ली: आईसीएआर-आईएआरआई और आईसीएआर-आईवीआरआई की QS रैंकिंग 2026 में एंट्री, कृषि शिक्षा को मिली वैश्विक पहचान – भारतीय कृषि शिक्षा क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (Indian Council of Agricultural Research – ICAR) के दो प्रमुख संस्थानों ने पहली बार क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग बाय सब्जेक्ट 2026 में जगह बनाई है।

यह रैंकिंग क्यूएस क्वाक्वेरेली साइमंड्स (QS Quacquarelli Symonds) द्वारा जारी की गई है, जिसमें दुनिया भर के 1,900 से अधिक विश्वविद्यालयों के 21,000 से ज्यादा कार्यक्रमों का मूल्यांकन किया गया।

आईसीएआर के दो संस्थान पहली बार शामिल

आईसीएआर-भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (ICAR-IVRI, Bareilly) को वेटरनरी साइंस श्रेणी में 51–100 रैंक बैंड में स्थान मिला है। यह इस श्रेणी में टॉप 100 में शामिल होने वाला भारत का एकमात्र संस्थान है।

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वहीं आईसीएआर-भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (ICAR-IARI, New Delhi) को एग्रीकल्चर एंड फॉरेस्ट्री श्रेणी में 151–200 रैंक बैंड में जगह मिली है।

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कृषि रैंकिंग में भारत की मजबूत उपस्थिति

इस वर्ष एग्रीकल्चर एंड फॉरेस्ट्री श्रेणी में भारत के कुल 10 संस्थानों को स्थान मिला है।

आईएआरआई के साथ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और आईआईटी खड़गपुर 151–200 रैंक बैंड में शामिल हैं।

तमिलनाडु कृषि विश्वविद्यालय 201–250 बैंड में है, जबकि चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय ने पहली बार 301–350 रैंक बैंड में एंट्री की है।

शोध और खेत तक पहुंच का मिला परिणाम

विशेषज्ञों का मानना है कि आईसीएआर संस्थानों की यह उपलब्धि उनके मजबूत शोध (Research), नई तकनीकों के विकास और किसानों तक पहुंच (Extension) के कारण संभव हुई है।

आईएआरआई और आईवीआरआई जैसे संस्थान फसल सुधार (Crop Improvement), पशुपालन विकास (Livestock Development) और जलवायु अनुकूल खेती (Climate Resilient Agriculture) जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण काम कर रहे हैं।

कृषि शिक्षा को मिलेगा वैश्विक पहचान

यह उपलब्धि दर्शाती है कि भारत की कृषि शिक्षा अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रही है। इससे अंतरराष्ट्रीय सहयोग, नई तकनीकों का आदान-प्रदान और कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।

भारत के लिए यह एक संकेत है कि कृषि क्षेत्र में शिक्षा और अनुसंधान अब विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार है।

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