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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

भारत में होगा ‘आईसीएआर-सीजीआईएआर साइंस एंड पार्टनरशिप वीक 2027’ का आयोजन, दिल्ली में जुटेंगे वैश्विक कृषि वैज्ञानिक

31 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: भारत में होगा ‘आईसीएआर-सीजीआईएआर साइंस एंड पार्टनरशिप वीक 2027’ का आयोजन, दिल्ली में जुटेंगे वैश्विक कृषि वैज्ञानिक – भारत में 12 से 17 अप्रैल 2027 तक ‘सीजीआईएआर साइंस एंड पार्टनरशिप वीक 2027’ का आयोजन किया जाएगा। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) और अंतर्राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान साझेदारी सीजीआईएआर ने नई दिल्ली में इसकी घोषणा की। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) के अंतर्गत आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में दुनियाभर के कृषि वैज्ञानिक, शोधकर्ता, किसान, सरकारों के प्रतिनिधि, स्टार्टअप और व्यावसायिक संस्थान शामिल होंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि अनुसंधान एवं नवाचारों को बढ़ावा देना और किसानों तक उनके लाभ पहुंचाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करना है।

कृषि नवाचारों और अनुसंधान पर होगा मंथन

सीजीआईएआर साइंस एंड पार्टनरशिप वीक 2027 में उन कृषि नवाचारों पर चर्चा की जाएगी, जो पहले से किसानों तक पहुंच रहे हैं। साथ ही, ऐसे क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां इन नवाचारों का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए अतिरिक्त प्रयासों की जरूरत है। इस आयोजन के माध्यम से वैज्ञानिक ज्ञान, नई प्रौद्योगिकियों और कृषि की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान को बढ़ावा दिया जाएगा।

भारत में इस कार्यक्रम का आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि आईसीएआर दुनिया की सबसे बड़ी राष्ट्रीय कृषि अनुसंधान प्रणालियों में से एक का नेतृत्व करता है। आईसीएआर के वैज्ञानिक पांच दशकों से अधिक समय से सीजीआईएआर के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। वर्तमान में सीजीआईएआर के 10 अनुसंधान केंद्र भारत में फसलों, जल, पशुधन, मत्स्य पालन, पोषण और नीतिगत विषयों पर काम कर रहे हैं।

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भारत के कृषि नवाचारों का वैश्विक प्रभाव

भारत के कृषि अनुसंधान और नवाचारों का प्रभाव देश की सीमाओं से बाहर भी दिखाई देता है। अर्द्ध शुष्क उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों के लिए अंतरराष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (आईसीआरआईएसएटी) द्वारा संरक्षित और साझा किए गए भारत के मूंगफली के एक नमूने ने ऐसी किस्मों के विकास में योगदान दिया है, जिनकी खेती अब मलावी, युगांडा, मोजाम्बिक और जाम्बिया में की जा रही है।

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वहीं, हैदराबाद स्थित कृषि में दक्षिण-दक्षिण सहयोग उत्कृष्टता केंद्र एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के देशों के साथ सफल कृषि नवाचारों को साझा कर रहा है। सीजीआईएआर साइंस एंड पार्टनरशिप वीक के दौरान भारत के कृषि अनुसंधान अनुभवों और उपलब्धियों को वैश्विक स्तर पर साझा करने के साथ ही दूसरे देशों के अनुभवों से सीखने पर भी जोर दिया जाएगा।

आईसीएआर और सीजीआईएआर की पांच दशक पुरानी साझेदारी

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग के सचिव और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने भारत और सीजीआईएआर के बीच दीर्घकालिक साझेदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि इस साझेदारी ने पांच दशकों से अधिक समय से देश में कृषि अनुसंधान एवं विकास को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाई है। डॉ. जाट के अनुसार, सीजीआईएआर एक अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान साझेदारी है, जिसके अंतर्गत 15 अनुसंधान केंद्र 100 से अधिक देशों में काम कर रहे हैं। वैश्विक कृषि प्रगति में सीजीआईएआर का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भारत के साथ, विशेष रूप से आईसीएआर के माध्यम से हुए सहयोग ने फसल सुधार, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, खाद्य सुरक्षा और कृषि उत्पादकता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियों का आधार तैयार किया है।

उन्होंने हरित क्रांति के बाद भारतीय कृषि में आए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि सीआईएमएमवाईटी, आईआरआरआई और आईसीआरआईएसएटी जैसे अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संस्थानों के साथ सहयोग ने देश की खाद्य उत्पादन क्षमता को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। खाद्यान्न की कमी और आयात पर निर्भर रहने वाले देश से भारत आज एक प्रमुख खाद्य उत्पादक और निर्यातक देश के रूप में उभरा है।

जलवायु अनुकूल खेती और डिजिटल कृषि पर रहेगा जोर

डॉ. जाट ने कहा कि सीजीआईएआर साइंस एंड पार्टनरशिप वीक 2027 अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने और वैज्ञानिक ज्ञान, प्रौद्योगिकियों तथा सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान के लिए महत्वपूर्ण मंच उपलब्ध कराएगा। उन्होंने कहा कि भारत की प्राथमिकता दक्षिण-दक्षिण सहयोग को बढ़ावा देना और अपने सफल कृषि नवाचारों को विशेष रूप से अफ्रीकी देशों सहित अल्पविकसित देशों के साथ साझा करना होगा। इस दौरान जलवायु अनुकूल कृषि, डिजिटल कृषि एवं एग्रीस्टैक, कृषि मशीनीकरण, मोटे अनाज (श्री अन्न), प्राकृतिक खेती और टिकाऊ कृषि पद्धतियों के क्षेत्र में भारत की प्रगति पर भी चर्चा की जाएगी। इन क्षेत्रों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की व्यापक संभावनाएं हैं।

कार्यक्रम में कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला से जुड़ी उभरती प्राथमिकताओं पर भी विचार-विमर्श होगा। इनमें जलवायु अनुकूलता, जल प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य, सार्वजनिक-निजी भागीदारी, स्टार्टअप, युवाओं और महिलाओं की भागीदारी के साथ कृषि विज्ञान एवं नवाचारों के प्रभावी संचार में मीडिया की भूमिका शामिल है।

अगले 50 वर्षों के कृषि सहयोग की बनेगी रूपरेखा

सीजीआईएआर की कार्यकारी प्रबंध निदेशक डॉ. इस्माहेन एलौफ़ी ने कहा कि इस आयोजन का उद्देश्य भारत और सीजीआईएआर के बीच दीर्घकालिक साझेदारी की उपलब्धियों का उत्सव मनाने के साथ कृषि सहयोग के अगले 50 वर्षों के लिए भविष्य की कार्ययोजना तैयार करना है। उन्होंने कहा कि भारत ने दिखाया है कि एक मजबूत राष्ट्रीय वैज्ञानिक अनुसंधान प्रणाली बड़े स्तर पर उपलब्धियां हासिल कर सकती है। भारत के बीज और कृषि संबंधी ज्ञान पहले से ही अफ्रीका और एशिया के किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहे हैं। अप्रैल 2027 में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के माध्यम से इस आदान-प्रदान को आगे बढ़ाने और उन क्षेत्रों की पहचान करने का प्रयास किया जाएगा, जहां विज्ञान कृषि क्षेत्र में और अधिक योगदान दे सकता है।

डॉ. एलौफ़ी ने मानव कल्याण में सुधार और खाद्य प्रणालियों को मजबूत बनाने में विज्ञान एवं वैज्ञानिकों के योगदान को मान्यता देने के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने अप्रैल 2025 में केन्या के नैरोबी में आयोजित सीजीआईएआर साइंस एंड पार्टनरशिप वीक के पहले संस्करण की सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत में होने वाला यह आयोजन वैश्विक साझेदारियों को और मजबूत करेगा तथा कृषि क्षेत्र की उभरती चुनौतियों के समाधान विकसित करने के लिए विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाएगा।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में कृषि अनुसंधान की भूमिका

आईसीआरआईएसएटी के महानिदेशक डॉ. हिमांशु पाठक ने कहा कि खाद्यान्न की कमी वाले देश से एक प्रमुख खाद्य उत्पादक और निर्यातक देश बनने तक भारत की कृषि यात्रा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की परिवर्तनकारी क्षमता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि सीजीआईएआर साइंस एंड पार्टनरशिप वीक 2027 के माध्यम से भारत की कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों को प्रदर्शित करने, देश के नवाचारों को दुनिया के साथ साझा करने और कृषि एवं खाद्य प्रणालियों की उभरती चुनौतियों के समाधान विकसित करने के लिए वैश्विक स्तर पर हुई प्रगति से सीखने का प्रयास किया जाएगा।

सीजीआईएआर का पहला साइंस एंड पार्टनरशिप वीक अप्रैल 2025 में केन्या के नैरोबी में आयोजित किया गया था। इसी दौरान सीजीआईएआर ने अपना वर्तमान अनुसंधान कार्यक्रम शुरू किया था। नई दिल्ली में होने वाला दूसरा संस्करण विज्ञान को जमीनी स्तर पर प्रभावी परिणामों में बदलने और साझेदारियों के माध्यम से दक्षिण-दक्षिण सहयोग को आगे बढ़ाने पर केंद्रित होगा। इस आयोजन में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में कृषि अनुसंधान और नवाचार की भूमिका पर भी विचार किया जाएगा। कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा और इसमें भाग लेने वाले वक्ताओं की जानकारी आने वाले महीनों में घोषित की जाएगी। 

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