ग्रामीण मजदूरों की हाजिरी में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सरकार ने लॉन्च किया नया AI ऐप
29 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: ग्रामीण मजदूरों की हाजिरी में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए सरकार ने लॉन्च किया नया AI ऐप – ग्रामीण परिवारों को मिलने वाली मजदूरी में फर्जीवाड़ा रोकने के लिए केंद्र सरकार ने एक बड़ा तकनीकी कदम उठाया है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम यानी NMMS ऐप का उन्नत संस्करण लॉन्च किया।
इस मौके पर ग्रामीण विकास सचिव रोहित कंसल और संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भजीभाकरे भी मौजूद रहे। NMMS ऐप का इस्तेमाल विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन, यानी VB-G RAM G के तहत काम करने वाले मजदूरों की हाजिरी दर्ज करने के लिए किया जाता है। यह योजना 1 जुलाई 2026 से मनरेगा की जगह लागू हुई ग्रामीण रोजगार की फ्लैगशिप योजना है, और इसका सीधा फायदा गांवों में खेती-किसानी से जुड़े लाखों परिवारों को मिलता है, जो सीजन के खाली समय में इस योजना के तहत काम करते हैं।
फर्जी हाजिरी रोकने की नई तकनीक
नए ऐप में सबसे बड़ा बदलाव AI-आधारित चेहरा सत्यापन और लाइवनेस डिटेक्शन है। इससे किसी फोटो की फोटो खींचकर या पुरानी तस्वीर का दोबारा इस्तेमाल करके हाजिरी दर्ज कराने की कोशिशों को रोका जा सकेगा। ऐप अब क्षेत्र की परिस्थितियों के मुताबिक चेहरा मिलाने की तकनीक पर भी काम करता है, ताकि धूप, धूल या मौसम की वजह से गलत तरीके से हाजिरी रद्द न हो।
एक और अहम फीचर है AI आधारित फोटो डुप्लीकेशन डिटेक्शन। अगर किसी मजदूर की तस्वीर कहीं और भी इस्तेमाल होती मिलती है या संदेहास्पद लगती है, तो सिस्टम खुद-ब-खुद उस मामले में वेज लिस्ट और फंड ट्रांसफर ऑर्डर को रोक देता है, जिससे आगे जांच हो सके।
दूर-दराज के इलाकों में जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं पहुंचता, वहां मजदूर अब ऑफलाइन भी हाजिरी दर्ज कर सकेंगे। नेटवर्क वापस आने पर यह डेटा अपने आप अपलोड हो जाएगा। बुजुर्ग मजदूरों, दिव्यांग मजदूरों और जिन्हें मोबाइल इस्तेमाल करने में दिक्कत होती है, उनके लिए अलग से अपवाद व्यवस्था रखी गई है, ताकि तकनीकी कारणों से किसी का हक न रुके।
मंत्रालय के मुताबिक यह नया संस्करण मार्च 2026 में शुरू हुए चेहरा सत्यापन सिस्टम और सितंबर 2026 के सुरक्षा अपडेट पर आधारित है, और इसे IIT मद्रास की तकनीकी मदद से तैयार किया गया है। अब हर कार्यस्थल पर डिवाइस-स्तर की सुरक्षा जांच भी जोड़ी गई है, जिससे कोई भी डिवाइस बिना जांच के इस्तेमाल नहीं हो सकेगा।
कितने मजदूरों को मिल रहा रोजगार
मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार 1 जुलाई 2026 से अब तक इस योजना के तहत करीब 46 करोड़ पर्सन-डेज़ का रोजगार सृजित हो चुका है। इसका फायदा 2.89 करोड़ से ज्यादा ग्रामीण परिवारों के 3.65 करोड़ से अधिक मजदूरों को मिला है।
देशभर में 31.23 लाख से ज्यादा कार्यस्थलों पर और 2.41 लाख से ज्यादा ग्राम पंचायतों में काम चल रहा है। इनमें से लगभग 40 करोड़ पर्सन-डेज़ की हाजिरी फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए ही दर्ज हुई है। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, राजस्थान और उत्तराखंड जैसे नौ राज्यों में अब शत-प्रतिशत हाजिरी फेस ऑथेंटिकेशन से ही दर्ज हो रही है।
मंत्रालय ने इस योजना के लिए वर्ष 2026-27 में 95,692 करोड़ रुपए का आवंटन किया है, और राज्यों के हिस्से को मिलाकर कुल प्रावधान 1.51 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का है।
लॉन्च के मौके पर चौहान ने कहा कि जिन्हें रोजगार की जरूरत है, उन्हें रोजगार मिलेगा, लेकिन भ्रष्टाचार और गड़बड़ी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि तकनीक को जवाबदेही मजबूत करनी चाहिए, लेकिन नेटवर्क या तकनीकी समस्या की वजह से किसी वास्तविक मजदूर को उसके हक से वंचित नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि सिर्फ हाजिरी दर्ज होने से भुगतान तय नहीं होता, बल्कि तकनीकी इंजीनियरों के काम के माप के आधार पर ही सीधे बैंक खातों में डीबीटी से भुगतान भेजा जाता है।
गांवों में खेती के साथ मजदूरी पर निर्भर परिवारों के लिए यह बदलाव खासा मायने रखता है, क्योंकि इससे उन्हें समय पर और सही भुगतान मिलने की संभावना बढ़ेगी, और फर्जी हाजिरी की वजह से असली मजदूरों के हक मारे जाने का खतरा कम होगा।
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