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पशुपालन (Animal Husbandry)राज्य कृषि समाचार (State News)

मुर्गीपालन में दाना प्रबंधन: कम लागत, अधिक मुनाफा

लेखक: डॉ सतेंद्र कुमार निरत, डॉ अनिल शिंदे, डॉ भावना अहरवाल (पशु चिकित्सा विज्ञान एवं पशुपालन महाविद्यालय, जबलपुर, (मध्य प्रदेश)

26 अक्टूबर 2026, भोपाल: मुर्गीपालन में दाना प्रबंधन: कम लागत, अधिक मुनाफा –

परिचय

मुर्गीपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और पोषण सुरक्षा का एक महत्त्वपूर्ण साधन है। अंडे और चिकन की बढ़ती माँग के कारण व्यावसायिक ब्रॉयलर एवं लेयर पालन के साथ-साथ देशी मुर्गीपालन भी किसानों के बीच लोकप्रिय हो रहा है। हालांकि, मुर्गीपालन व्यवसाय में लाभ प्राप्त करना केवल पक्षियों की अच्छी वृद्धि और अधिक अंडा उत्पादन पर निर्भर नहीं करता, बल्कि उत्पादन लागत को नियंत्रित करना भी उतना ही आवश्यक है। इस व्यवसाय में आहार सबसे बड़ा परिवर्तनीय व्यय होता है। व्यावसायिक मुर्गीपालन में फीड पर कुल उत्पादन लागत का लगभग 60-70 प्रतिशत या कुछ परिस्थितियों में इससे अधिक खर्च हो सकता है। इसलिए दाने का कुशल उपयोग मुर्गीपालन की लाभप्रदता बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

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वर्तमान समय में मुर्गीपालकों के सामने फीड की बढ़ती कीमत एक बड़ी आर्थिक चुनौती है। मक्का, सोयाबीन खली तथा अन्य ऊर्जा एवं प्रोटीनयुक्त आहार सामग्रियों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का प्रभाव तैयार मुर्गी दाने की लागत पर पड़ता है। जब दाना महँगा हो जाता है, तब उसकी थोड़ी-सी बर्बादी भी किसान के मुनाफे को प्रभावित कर सकती है। ऐसी स्थिति में केवल अधिक उत्पादन पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है, उपलब्ध दाने का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना भी आवश्यक है।

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मुर्गियों को दिया गया दाना यदि फीडर से बाहर गिर जाए, पक्षियों द्वारा बिखेर दिया जाए, नमी से खराब हो जाए या भंडारण के दौरान चूहों एवं कीटों द्वारा नष्ट कर दिया जाए, तो उससे आर्थिक हानि होती है। दाना बर्बादी के कारण समान उत्पादन प्राप्त करने के लिए अधिक दाना खरीदना पड़ सकता है, जिससे प्रति किलोग्राम मांस अथवा प्रति अंडे की उत्पादन लागत बढ़ जाती है। इसलिए दाना बर्बादी रोकना केवल स्वच्छता का विषय नहीं, बल्कि किसान के लाभ और व्यवसाय की आर्थिक स्थिरता से जुड़ा महत्त्वपूर्ण प्रबंधन उपाय है।

मुर्गीपालन में दाना बर्बादी क्या है?

जब मुर्गियों के लिए उपलब्ध कराया गया दाना बिखरकर, गिरकर, खराब होकर या अन्य कारणों से खाने योग्य नहीं रह जाता, तो इसे दाना बर्बादी कहा जाता है। फीडर से नीचे गिरा दाना, गीला होकर खराब हुआ आहार तथा भंडारण के दौरान चूहों या कीटों से नष्ट हुआ दाना इसके सामान्य उदाहरण हैं।

हालाँकि, फीडर से नीचे गिरा प्रत्येक दाना पूरी तरह बर्बाद नहीं होता। यदि मुर्गियाँ उसे खा लेती हैं, तो वह उनके आहार का हिस्सा है। वास्तविक बर्बादी तब होती है, जब दाना खाया नहीं जाता या दूषित और खराब होने के कारण उपयोग योग्य नहीं रहता।

दाना बर्बाद होने के प्रमुख कारण

  1. फीडर की गलत ऊँचाई और डिजाइन

यदि फीडर बहुत ऊँचा या बहुत नीचे रखा जाता है, तो मुर्गियों को दाना खाने में परेशानी होती है। गलत डिजाइन वाले फीडर से दाना बाहर गिर सकता है। फीडर की ऊँचाई मुर्गियों के आकार के अनुसार रखनी चाहिए, ताकि वे आराम से दाना खा सकें और उसे बिखेरें नहीं।

  • फीडर में जरूरत से ज्यादा दाना भरना

फीडर को पूरी तरह भर देने से मुर्गियों के दाना खाने के दौरान दाना बाहर गिरने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए फीडर में उतना ही दाना भरना चाहिए, जितना पक्षी आसानी से खा सकें। फीडर की नियमित जाँच करके आवश्यकता के अनुसार दाना भरना बेहतर है।

  • अधिक भीड़ और प्रतिस्पर्धा

यदि एक फीडर पर बहुत अधिक मुर्गियाँ निर्भर हों, तो दाना खाने के लिए उनके बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है। इससे दाना बिखरने और कुछ पक्षियों को पर्याप्त आहार नहीं मिल पाने की समस्या हो सकती है। इसलिए पक्षियों की संख्या के अनुसार पर्याप्त फीडर उपलब्ध कराना जरूरी है।

  • दाने की गुणवत्ता और बनावट

बहुत अधिक बारीक, धूलयुक्त या खराब गुणवत्ता वाला दाना फीडर से बाहर गिर सकता है। दाने के आकार और बनावट में असमानता होने पर मुर्गियाँ कुछ कण चुनकर खा सकती हैं और अन्य कण छोड़ सकती हैं। इससे आहार का संतुलित उपयोग प्रभावित हो सकता है। इसलिए अच्छी गुणवत्ता का, उचित बनावट वाला और पक्षियों की उम्र के अनुकूल दाना देना चाहिए।

  • दाने का गलत भंडारण

दाने को नमी, वर्षा, चूहों और कीटों से सुरक्षित न रखने पर उसकी गुणवत्ता खराब हो सकती है। गीले दाने में फफूँद लगने का खतरा रहता है। ऐसा दाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है और उपयोग योग्य नहीं रहता। इसलिए दाने को सूखी, साफ और हवादार जगह पर रखना चाहिए।

  • नियमित निगरानी की कमी

यदि किसान फीडर, फर्श और भंडारण स्थान की नियमित जाँच नहीं करते, तो दाना बर्बाद होने के कारणों का समय पर पता नहीं चलता। छोटी-सी समस्या लंबे समय तक जारी रहने पर आर्थिक नुकसान बढ़ सकता है।

विभिन्न प्रकार के मुर्गीपालन में दाना बर्बादी

  1. ब्रॉयलर पालन पद्धति: ब्रॉयलर मुर्गियों में तेजी से वजन बढ़ाना मुख्य उद्देश्य होता है। दाने की बर्बादी से उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इसलिए फीडर की सही ऊँचाई, उचित दाना भराव और नियमित वजन निगरानी महत्त्वपूर्ण है।
  2. लेयर पालन पद्धति: लेयर मुर्गियों में अंडा उत्पादन बनाए रखने के लिए संतुलित आहार जरूरी है। दाने की बर्बादी से लागत बढ़ती है और यदि पक्षियों को पर्याप्त पोषक तत्त्व नहीं मिलते, तो उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है। इसलिए दाना बिखरने से रोकना और अंडा उत्पादन के साथ दाने की खपत का रिकॉर्ड रखना चाहिए।
  3. देशी मुर्गीपालन पद्धति: खुले में या अर्ध-खुले स्थान पर पाली जाने वाली देशी मुर्गियाँ दाना जमीन पर बिखेर सकती हैं। जमीन पर गिरा दाना मिट्टी, गोबर या नमी के संपर्क में आकर दूषित हो सकता है। इसलिए दाना साफ बर्तनों या उपयुक्त फीडरों में देना चाहिए और बचे हुए दाने को सुरक्षित रखना चाहिए।

दाना बर्बादी से होने वाले नुकसान

  1. उत्पादन लागत में वृद्धि

दाना बर्बाद होने पर किसान को मुर्गियों की जरूरत पूरी करने के लिए अतिरिक्त दाना खरीदना पड़ सकता है। इससे प्रति किलोग्राम मांस या प्रति अंडे की लागत बढ़ती है। जब फीड की कीमत पहले से अधिक हो, तब यह नुकसान और महत्त्वपूर्ण हो जाता है।

  • पोषक तत्त्वों का नुकसान

दाने में ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन और खनिज तत्त्व होते हैं। जब दाना खाने योग्य नहीं रहता, तो उसमें मौजूद पोषक तत्त्व भी मुर्गियों के उपयोग में नहीं आ पाते। इससे खरीदे गए आहार का पूरा लाभ नहीं मिल पाता।

  • वृद्धि और उत्पादन पर प्रभाव

यदि दाना बर्बाद होने के कारण मुर्गियों को पर्याप्त आहार नहीं मिल पाता, तो उनकी वृद्धि प्रभावित हो सकती है। लेयर मुर्गियों में पोषण की कमी अंडा उत्पादन और अंडे की गुणवत्ता पर भी असर डाल सकती है। हालांकि, इसका प्रभाव बर्बादी की मात्रा, आहार की गुणवत्ता और पक्षियों को उपलब्ध शेष दाने पर निर्भर करता है।

  • साफ-सफाई और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएँ

फर्श पर लंबे समय तक पड़ा दाना नमी के संपर्क में आकर खराब हो सकता है। इससे फफूँद और कीटों की समस्या बढ़ सकती है। बिखरा हुआ दाना चूहों और अन्य अवांछित जीवों को भी आकर्षित कर सकता है। इसलिए फीडर के आसपास साफ-सफाई बनाए रखना जरूरी है।

  • दाना बर्बादी से आर्थिक नुकसान

मुर्गीपालन में फीड की लागत अधिक होने के कारण दाने की बर्बादी सीधे किसान के मुनाफे को प्रभावित करती है। यदि खरीदा गया दाना मुर्गियों के उपयोग में नहीं आता, तो उस पर खर्च किया गया पैसा भी अपेक्षित उत्पादन में योगदान नहीं देता।

उदाहरण के लिए, यदि दाना फीडर से बार-बार नीचे गिरता है या भंडारण के दौरान खराब होता है, तो किसान को उसकी भरपाई के लिए अतिरिक्त दाना खरीदना पड़ सकता है। इससे उत्पादन लागत बढ़ जाती है, जबकि जरूरी नहीं कि मांस या अंडे का उत्पादन उसी अनुपात में बढ़े।

इसलिए किसान को केवल यह नहीं देखना चाहिए कि उसने कितना दाना खरीदा, बल्कि यह भी देखना चाहिए कि दाने का कितना हिस्सा वास्तव में मुर्गियों के उपयोग में आया। दाने की खपत, पक्षियों के वजन और अंडा उत्पादन का रिकॉर्ड रखने से अनावश्यक खर्च की पहचान करने में मदद मिलती है।

फीड बर्बादी और FCR का संबंध

ब्रॉयलर पालन में FCR यानी फीड कन्वर्जन रेशियो एक महत्त्वपूर्ण माप है। यह बताता है कि मुर्गियों का वजन बढ़ाने के लिए दाने का उपयोग कितनी कुशलता से हुआ।

यदि दाना बर्बाद होता है, तो किसान को समान वजन प्राप्त करने के लिए अधिक दाना खर्च करना पड़ सकता है। इससे फीड के उपयोग की आर्थिक दक्षता घटती है और उत्पादन लागत बढ़ सकती है। इसलिए दाना बर्बादी रोकना ब्रॉयलर पालन में बेहतर परिणाम प्राप्त करने के लिए जरूरी है।

हालाँकि, FCR पर केवल दाना बर्बादी का ही प्रभाव नहीं पड़ता। मुर्गियों की नस्ल, स्वास्थ्य, आहार की गुणवत्ता, तापमान और अन्य प्रबंधन संबंधी परिस्थितियाँ भी इसे प्रभावित करती हैं। इसलिए किसान को दाने की खपत के साथ पक्षियों की वृद्धि और स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना चाहिए।

दाना बर्बादी रोकने के व्यावहारिक उपाय

  1. फीडर की सही ऊँचाई रखें: फीडर को मुर्गियों के आकार के अनुसार रखें, ताकि वे आसानी से दाना खा सकें और उसे बाहर न गिराएँ।
  2. फीडर को जरूरत से ज्यादा न भरें: फीडर में उचित मात्रा में दाना भरें। इससे दाना बिखरने की संभावना कम हो सकती है।
  3. पर्याप्त फीडर उपलब्ध कराएँ: पक्षियों की संख्या के अनुसार पर्याप्त फीडर रखें, ताकि दाना खाने के लिए अत्यधिक प्रतिस्पर्धा न हो।
  4. अच्छी गुणवत्ता का दाना दें: दाने की गुणवत्ता, बनावट और ताजगी पर ध्यान दें। खराब या फफूँद लगा दाना पक्षियों को न खिलाएँ।
  5. दाने का सुरक्षित भंडारण करें: दाने को सूखी, साफ और हवादार जगह पर रखें। बोरियों को सीधे जमीन पर रखने के बजाय साफ और सूखे पैलेट या उचित आधार पर रखें। चूहों और कीटों से बचाव की व्यवस्था करें।
  6. फीडर के आसपास सफाई रखें: गिरे हुए दाने और गीले कचरे को नियमित रूप से हटाएँ। दूषित दाने को दोबारा मुर्गियों को न खिलाएँ।
  7. दाने की खपत का रिकॉर्ड रखें: प्रतिदिन या निर्धारित अंतराल पर दाने की खपत, मुर्गियों के वजन और लेयर फार्म में अंडा उत्पादन का रिकॉर्ड रखें। इससे असामान्य खपत और प्रबंधन संबंधी समस्याओं का पता लगाने में मदद मिलती है।
  8. मुर्गियों के स्वास्थ्य पर ध्यान दें: बीमार पक्षियों की आहार खपत कम हो सकती है। इसलिए पक्षियों के व्यवहार, स्वास्थ्य और वृद्धि में होने वाले बदलावों पर नजर रखें तथा जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक से सलाह लें।

किसान दाना बर्बादी की पहचान कैसे करें?

किसान कुछ सामान्य संकेतों से दाना बर्बादी का पता लगा सकते हैं। यदि फीडर के आसपास बार-बार अधिक दाना बिखरा दिखाई देता है, फीडर जल्दी खाली हो जाता है लेकिन पक्षियों का वजन अपेक्षित गति से नहीं बढ़ता, या दाने की खपत में अचानक वृद्धि होती है, तो इसकी जाँच करनी चाहिए।

इसके अलावा, भंडारण में नमी, फफूँद, चूहों की गतिविधि और दाने की गुणवत्ता पर भी ध्यान देना चाहिए। केवल अधिक दाना खपत होने से बर्बादी साबित नहीं होती, क्योंकि पक्षियों की उम्र, वजन, मौसम और स्वास्थ्य के कारण भी खपत बदल सकती है। इसलिए दाना बर्बादी का आकलन करते समय इन सभी बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

निष्कर्ष

मुर्गीपालन में लाभ बढ़ाने के लिए केवल अधिक वजन या अधिक अंडा उत्पादन प्राप्त करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि दाने का सही उपयोग करना भी जरूरी है। फीड की बढ़ती लागत के दौर में दाने की बर्बादी किसान के मुनाफे को कम कर सकती है।

फीडर की सही ऊँचाई, उचित मात्रा में दाना भरना, अच्छी गुणवत्ता के आहार का उपयोग, सुरक्षित भंडारण और नियमित निगरानी जैसे सरल उपाय अपनाकर दाना बर्बादी को कम किया जा सकता है। इससे उत्पादन लागत पर नियंत्रण रखने और मुर्गीपालन को अधिक लाभकारी बनाने में मदद मिल सकती है।

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