उत्तर प्रदेश में रबी फसलों के बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान, ऑनलाइन बुकिंग शुरू
26 अक्टूबर 2026, उरई (जालौन), उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश में रबी फसलों के बीज पर 50 प्रतिशत अनुदान, ऑनलाइन बुकिंग शुरू – रबी सीजन की बुवाई शुरू होने के साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार ने गेहूं, चना, मटर, मसूर, सरसों और तोरिया के बीजों पर 50 प्रतिशत अनुदान देना शुरू कर दिया है। यह सुविधा राज्य के सभी जिलों के राजकीय कृषि बीज भंडारों के माध्यम से दी जा रही है।
जालौन जिले में यह सुविधा सभी नौ विकासखंडों में उपलब्ध है। किसानों को कृषि विभाग के पोर्टल www.agriculture.up.gov.
अनुदान से पहले बीजों की दरें प्रति किलोग्राम इस प्रकार हैं: गेहूं 47.38 रुपये, चना 95 रुपये, मटर 76.70 रुपये, मसूर 109.48 रुपये, सरसों 128.54 रुपये और तोरिया 117.83 रुपये। आधी राशि सरकार की तरफ से अनुदान के रूप में दी जाने के बाद किसानों को यह बीज इससे काफी कम दाम पर मिलेंगे।
बुकिंग से लेकर वितरण तक की प्रक्रिया
ई-लॉटरी व्यवस्था इसलिए अपनाई गई है ताकि सीमित मात्रा में उपलब्ध बीजों का वितरण पारदर्शी तरीके से हो सके और किसी एक किसान या इलाके को वरीयता न मिल सके। किसान पोर्टल पर अपनी जरूरत के मुताबिक फसल और मात्रा चुनकर बुकिंग कर सकते हैं, और चयन होने की सूचना उन्हें मोबाइल नंबर पर मिलती है।
इसके बाद किसानों को तय समय में नजदीकी राजकीय कृषि बीज भंडार से बीज उठाना होता है। अधिकारियों के मुताबिक बुकिंग जितनी जल्दी होगी, बीज मिलने की संभावना उतनी ही ज्यादा रहेगी, क्योंकि हर फसल के लिए सीमित मात्रा में ही अनुदानित बीज उपलब्ध कराया जाता है।
अन्य जिलों में भी सुविधा
श्रावस्ती जिले में भी कृषि विभाग इसी तरह रबी बीजों पर 50 प्रतिशत अनुदान दे रहा है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. उमेश कुमार गुप्ता के मुताबिक बुकिंग कराने वाले किसानों को चयन होने पर एक मिनी किट भी निःशुल्क दी जाएगी। यहां भी किसान या तो विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन बुकिंग कर सकते हैं या सीधे राजकीय कृषि बीज भंडार जाकर अनुदानित दर पर बीज ले सकते हैं।
कृषि विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्रमाणित और उन्नत किस्म के बीजों तक किसानों की पहुंच बढ़ाने के लिए यह योजना हर साल रबी और खरीफ दोनों सीजन में चलाई जाती है। प्रमाणित बीज इस्तेमाल करने से न सिर्फ फसल की पैदावार बेहतर होती है, बल्कि बीज जनित रोगों का खतरा भी कम रहता है। किसान अपने नजदीकी राजकीय कृषि बीज भंडार या उप कृषि निदेशक कार्यालय से भी इस बारे में जानकारी ले सकते हैं।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि छोटे और सीमांत किसानों के लिए बीज की कीमत अक्सर बुवाई के फैसले में सबसे बड़ी बाधा होती है, खासकर जब बाजार में उन्नत किस्म के बीज महंगे दाम पर बिक रहे हों। आधी कीमत पर प्रमाणित बीज मिलने से ऐसे किसान भी बेहतर उत्पादन देने वाली किस्मों की ओर रुख कर सकते हैं, जो अन्यथा पुराने या घर के रखे बीज से ही बुवाई कर लेते थे।
जिला प्रशासन का कहना है कि हर साल की तरह इस बार भी बीज वितरण में देरी से बचने के लिए किसानों को जल्द से जल्द बुकिंग कराने की सलाह दी गई है, क्योंकि सरसों और तोरिया जैसी फसलों की बुवाई का सही समय अक्टूबर के आखिरी हफ्तों में ही होता है और देर से बुवाई करने पर पैदावार पर असर पड़ सकता है।
कृषि विभाग के कर्मचारी गांव-गांव जाकर किसानों को इस योजना की जानकारी भी दे रहे हैं, क्योंकि कई बार दूर-दराज के इलाकों के किसान ऑनलाइन बुकिंग की प्रक्रिया से अनजान रह जाते हैं। ऐसे किसानों के लिए राजकीय कृषि बीज भंडार पर मौजूद कर्मचारी खुद पोर्टल पर बुकिंग कराने में मदद कर रहे हैं, ताकि कोई भी पात्र किसान अनुदान की सुविधा से वंचित न रहे।
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