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फसल की खेती (Crop Cultivation)

कम नमी, ज्यादा गर्मी: इस रबी बोएं ये 3 कम अवधि वाली गेहूँ किस्में

कमजोर मानसून के बाद खेत में नमी कम, ऐसे में किस्म का सही चुनाव ही बचाएगा लागत

26 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: कम नमी, ज्यादा गर्मी: इस रबी बोएं ये 3 कम अवधि वाली गेहूँ किस्में – इस बार मानसून ने किसानों का उतना साथ नहीं दिया जितनी उम्मीद थी। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार जून से सितंबर तक देश में सामान्य से लगभग 13 प्रतिशत कम बारिश हुई, जो 2015 के बाद का सबसे कमजोर मानसून है।

इसका असर अब रबी की तैयारी पर दिख रहा है। कई गेहूँ उत्पादक इलाकों में खेत में बची नमी कम है और बड़े जलाशयों में पानी भी पिछले साल से कम है। मध्य भारत में मानसून के चारों महीने बारिश कम रही।

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चिंता यहीं खत्म नहीं होती। IMD के अनुसार अल नीनो का असर 2027 की शुरुआत तक बना रह सकता है, जिससे इस बार सर्दी अपेक्षाकृत गर्म रहने की आशंका है। गेहूँ में दाना भरते समय तापमान बढ़ा तो दाना सिकुड़ता है और उपज सीधे घटती है।

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कम अवधि वाली किस्म क्यों है सही विकल्प

ऐसे साल में लंबी अवधि वाली किस्म का जोखिम बढ़ जाता है। जो फसल खेत में ज्यादा दिन रहती है, उसे आम तौर पर ज्यादा सिंचाई चाहिए और उसके दाना भरने का समय फरवरी और मार्च की तेज गर्मी से टकरा सकता है।

जल्दी बाली निकालने वाली किस्म को गर्मी बढ़ने से पहले दाना भरने का ज्यादा समय मिलता है। सीमित पानी में भी फसल पूरी होने की संभावना बढ़ती है और पानी, खाद व मेहनत पर खर्च कम रहता है।

नीचे श्रीराम फार्म सॉल्यूशन्स की ऐसी तीन गेहूँ किस्मों की जानकारी दी गई है जो कि कम अवधि में ज्यादा उत्पादन देती है। 

कम नमी वाले खेत के लिए 3 गेहूँ किस्में

1. श्रीराम सुपर 1-SR-15: गर्मी में भी दाना न सिकुड़े

श्रीराम सुपर 1-SR-15 गेहूँ किस्म में बालियाँ 65 से 70 दिन में निकल आती हैं। कंपनी के अनुसार गर्मी का इसके दानों पर बुरा असर नहीं पड़ता, यानी न दाना सिकुड़ता है और न उसका वजन घटता है।

यह मध्यम अवधि में अधिक उपज देने वाली किस्म है और रोगों के प्रति सहनशील है। पौधों की औसत ऊँचाई 90 से 95 सेमी रहती है, कल्ले अधिक निकलते हैं और उपज के साथ चारा (भूसा) भी अधिक मिलता है। जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन सीमित हैं, उनके लिए श्रीराम सुपर 1-SR-15 एक अच्छा विकल्प है.

2. श्रीराम सुपर 303: बदलते मौसम के लिए मजबूत किस्म

इस किस्म में बालियाँ 72 से 75 दिन में निकलती हैं। कंपनी इसे बदलते मौसम के लिए “उच्च तकनीक का जवाब” बताती है। ठोस बालियों और मजबूत तनों के कारण यह फसल गिरने के प्रति सहनशील है, जिससे दाना भरते समय आने वाली आंधी-बारिश का नुकसान कम रहता है।

इसके दाने बड़े, वजनदार, कठोर और चमकदार होते हैं, जिनकी मंडी में अच्छी पूछ रहती है। भूरा रतुआ और झुलसा जैसे रोगों के प्रति सहनशील होने से दवा पर खर्च घटता है। अधिक कल्लों के साथ यह भरपूर उपज देती है और अलग-अलग क्षेत्रों में वहाँ के बुवाई समय के अनुसार उपयुक्त है।

3. श्रीराम सुपर 1-SR-14: गर्मी के वार से मुकाबला

कंपनी ने इस किस्म को खास तौर पर गर्मी के वार से निपटने वाली किस्म के रूप में पेश किया है। इसमें बालियाँ 75 से 80 दिन में निकलती हैं और पौधों की औसत ऊँचाई 90 से 95 सेमी रहती है।

इसकी बालियाँ बड़ी और आकर्षक होती हैं और उनमें दाने अधिक बनते हैं। यह फसल गिरने और भूरा रतुआ (ब्राउन रस्ट) के प्रति सहनशील है। अधिक कल्ले, अधिक उपज और अधिक चारा इसकी अन्य खूबियाँ हैं, और यह भी क्षेत्र के बुवाई समय के अनुसार उपयुक्त है।

बीज दर और बुवाई का ध्यान रखें

कंपनी के अनुसार श्रीराम सुपर 303, श्रीराम सुपर 1-SR-15 और श्रीराम सुपर 1-SR-14 की समय पर बुवाई के लिए 40 किलोग्राम बीज एक एकड़ के लिए काफी है। देर से बुवाई करनी हो तो बीज की मात्रा 20 प्रतिशत बढ़ा दें। 

कम नमी वाले खेत में पलेवा (बुवाई से पहले की सिंचाई) देकर ओट आने पर बुवाई करें। सीड ड्रिल से बोने पर बीज नमी वाली परत तक पहुँचता है और अंकुरण अच्छा होता है।

पानी सीमित हो तो पहली सिंचाई बुवाई के 20 से 21 दिन बाद मुख्य जड़ बनने (CRI अवस्था) पर जरूर दें, यह सबसे जरूरी सिंचाई है। इसके बाद पानी हो तो बाली निकलते समय और दाना भरते समय सिंचाई दें।

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