पीएम धन-धान्य कृषि योजना में बिहार का गया जिला देश में अव्वल, स्कोर ढाई गुना से ज्यादा बढ़ा
27 अक्टूबर 2026, नई दिल्ली: पीएम धन-धान्य कृषि योजना में बिहार का गया जिला देश में अव्वल, स्कोर ढाई गुना से ज्यादा बढ़ा – प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को एक साल पूरा होने के मौके पर सोमवार को नई दिल्ली में हुए कार्यक्रम में देश के 100 आकांक्षी कृषि जिलों की पहली वार्षिक रैंकिंग घोषित की गई। इसमें बिहार के गया जिले को सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला जिला बताया गया। राजस्थान के नागौर और मध्य प्रदेश के उमरिया जिले को भी शीर्ष प्रदर्शन करने वाले जिलों में शामिल किया गया है।
कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ कृषि विभाग के सचिव, राज्य सरकारों के प्रतिनिधि, जिला अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिक और जिला धन-धान्य समितियों के सदस्य मौजूद रहे। कुल 18 जिलों को छह अलग-अलग क्षेत्रों में उनके प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। सिंचाई बुनियादी ढांचे में सुधार की श्रेणी में जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले को पहला स्थान मिला।
जिला रैंकिंग में क्या है खास
योजना के तहत देशभर के 100 जिलों के प्रदर्शन को 121 संकेतकों वाले डैशबोर्ड से लगातार ट्रैक किया जा रहा है। कार्यक्रम में बताया गया कि इन सभी जिलों का औसत स्कोर अप्रैल 2026 में 18.85 था, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर 46.89 हो गया।
सभी 100 जिलों ने अपनी-अपनी जिला कार्य योजनाएं पहले ही तैयार कर ली हैं, जिनके आधार पर स्थानीय जरूरतों के मुताबिक काम हो रहा है। गया, नागौर और उमरिया को इन्हीं योजनाओं पर जमीनी स्तर पर अच्छे अमल के लिए शीर्ष प्रदर्शन करने वाले जिलों में रखा गया।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 16 जुलाई 2025 को मंजूरी दी थी और प्रधानमंत्री ने इसका शुभारंभ 11 अक्टूबर 2025 को किया था। यह छह साल की योजना है, जो वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक चलेगी।
इसके तहत 11 केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों की 36 योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया है, और इनके साथ राज्यों की अपनी योजनाओं व निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी शामिल किया गया है। योजना का मकसद देश के उन 100 जिलों में कृषि उत्पादकता, सिंचाई सुविधा और फसल के बाद की सुविधाओं को एक साथ मजबूत करना है, जो कई कृषि संकेतकों में राष्ट्रीय औसत से पीछे रह गए थे।
दूसरे साल की प्राथमिकताएं
कृषि मंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि योजना के दूसरे साल में उत्पादकता बढ़ाने, सिंचाई व जल प्रबंधन, उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती, कटाई के बाद भंडारण की सुविधाएं और किसानों की कृषि ऋण तक पहुंच पर खास ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पहले साल में ज्यादातर जिलों ने अपनी बुनियादी योजना और ढांचा तैयार किया है, और अब असल जमीनी नतीजे दिखने का समय है।
गया, नागौर और उमरिया जैसे जिलों में स्थानीय प्रशासन, कृषि विज्ञान केंद्रों के वैज्ञानिकों और जिला धन-धान्य समितियों ने मिलकर काम किया, जिसका नतीजा अब स्कोर में दिखे सुधार के रूप में सामने आया है।
यह योजना शुरू से ही केंद्र और राज्य सरकारों के साझा प्रयास पर टिकी है, जिसमें जिला स्तर पर बनी समितियां स्थानीय परिस्थितियों के मुताबिक काम की दिशा तय करती हैं। कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों ने कहा कि यही मॉडल बाकी जिलों में भी दोहराया जाए तो समग्र स्कोर और बेहतर हो सकता है।
योजना के दायरे में आने वाले बाकी जिलों के किसानों के लिए भी यह रैंकिंग एक संकेत है कि मिट्टी परीक्षण, सिंचाई सुधार और फसल विविधीकरण जैसे कदमों पर लगातार काम करने से नतीजे कुछ ही महीनों में दिखने लगते हैं। कृषि मंत्रालय का कहना है कि आने वाले सालों में इस रैंकिंग को और बारीकी से ट्रैक किया जाएगा।
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