राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

एनडीवीआई से खरीफ फसलों की स्थिति का आकलन, कृषि मंत्रालय ने की मानसून और एल नीनो की समीक्षा

22 जुलाई 2026, नई दिल्ली: एनडीवीआई से खरीफ फसलों की स्थिति का आकलन, कृषि मंत्रालय ने की मानसून और एल नीनो की समीक्षा –  खरीफ सीजन 2026 के दौरान फसलों की स्थिति का आकलन करने के लिए एनडीवीआई (नॉर्मलाइज्ड डिफरेंस वेजिटेशन इंडेक्स)जैसी सैटेलाइट आधारित तकनीक का उपयोग करते हुए कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने मानसून, संभावित एल नीनो, वर्षा की स्थिति, खरीफ बुवाई, उर्वरकों एवं बीजों की उपलब्धता और जलाशयों में जल भंडारण की व्यापक समीक्षा की। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित साप्ताहिक समीक्षा बैठक में कम वर्षा वाले क्षेत्रों पर विशेष निगरानी और राज्यों के साथ निरंतर समन्वय पर जोर दिया गया।

बैठक में बताया गया कि 17 जुलाई 2026 तक देश में खरीफ फसलों की बुवाई 658.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में पूरी हो चुकी है। हालांकि कुल बुवाई क्षेत्र पिछले वर्ष की तुलना में कुछ कम है, लेकिन कई राज्यों में धान, दलहन तथा अन्य फसलों की बुवाई में संतोषजनक प्रगति दर्ज की गई है। केंद्रीय मंत्री ने दलहन, तिलहन और कपास मिशनों को राज्यों के साथ साप्ताहिक समीक्षा बैठकें आयोजित कर खेतों से प्राप्त फीडबैक के आधार पर त्वरित निर्णय लेने के निर्देश दिए।

समीक्षा बैठक में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमानों, संभावित एल नीनो की स्थिति तथा देश के 270 वर्षा-संवेदनशील जिलों का भी आकलन किया गया। विभिन्न राज्यों में वर्षा की स्थिति, खरीफ बुवाई की प्रगति और फसलों की वर्तमान दशा का मूल्यांकन एनडीवीआई (NDVI)जैसे संकेतकों के आधार पर किया गया। यह सैटेलाइट आधारित सूचकांक फसलों की हरियाली, वृद्धि और स्वास्थ्य का आकलन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है तथा प्रभावित क्षेत्रों की समय रहते पहचान कर कृषि प्रबंधन संबंधी निर्णय लेने में मदद करता है।

बैठक में यह भी बताया गया कि 9 जुलाई 2026 तक दक्षिण-पश्चिम मानसून ने राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के शेष हिस्सों सहित पूरे देश को कवर कर लिया। सामान्यतः मानसून 8 जुलाई तक पूरे देश में पहुंच जाता है, इसलिए इस वर्ष इसका विस्तार केवल एक दिन की देरी से पूरा हुआ। इसके बाद अधिकांश राज्यों में खरीफ बुवाई के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनीं।

हालांकि, 1 जून से 15 जुलाई 2026 के बीच देश में औसत वर्षा सामान्य से 23 प्रतिशत कम दर्ज की गई। इस अवधि में देशभर में 227 मिमी वर्षा हुई, जबकि सामान्य वर्षा 294.2 मिमी होती है। सबसे अधिक कमी पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में रही, जहां 540.2 मिमी के सामान्य स्तर के मुकाबले केवल 348 मिमी वर्षा हुई, यानी 36 प्रतिशत की कमी। इसके अलावा दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत में 26 प्रतिशत, उत्तर-पश्चिम भारत में 19 प्रतिशततथा मध्य भारत में 13 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि वर्षा की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और आवश्यकता के अनुसार राज्यों के साथ समन्वय कर आकस्मिक कृषि प्रबंधन एवं वैकल्पिक उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

बैठक में खरीफ सीजन के लिए उर्वरकों, विशेष रूप से यूरिया, और बीजों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने जानकारी दी कि किसानों की आवश्यकता के अनुरूप पर्याप्त मात्रा में उर्वरक और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध हैं तथा राज्यों के साथ नियमित समन्वय के माध्यम से आपूर्ति व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को कृषि विज्ञान केंद्रों (केवीके) और राज्य सरकारों से नियमित रूप से जमीनी स्तर की जानकारी प्राप्त करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध हो सकें और वितरण व्यवस्था में किसी भी प्रकार की समस्या का तत्काल समाधान किया जा सके।

बैठक के अंत में केंद्रीय मंत्री ने कृषि मंत्रालय के दोनों विभागों को निर्देश दिया कि खरीफ सीजन के दौरान मौसम आधारित कृषि प्रबंधन, वैज्ञानिक सलाह, राज्यों के साथ प्रभावी समन्वय तथा सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के माध्यम से कृषि गतिविधियों की निरंतर निगरानी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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