नाबार्ड और मौसम विभाग के बीच समझौता, किसानों को स्थानीय मौसम की जानकारी सीधे मिलेगी
01 सितंबर 2026, मुंबई: नाबार्ड और मौसम विभाग के बीच समझौता, किसानों को स्थानीय मौसम की जानकारी सीधे मिलेगी – राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने किसानों को स्थानीय मौसम और कृषि संबंधी उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराने के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी के तहत आईएमडी की कृषि-मौसम संबंधी जानकारी को डेटा इन क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर यानी डिक्रा डिजिटल मंच से जोड़ा जाएगा।
इसका उद्देश्य किसानों के साथ-साथ वित्तीय संस्थानों, नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं को मौसम और कृषि से जुड़ी जानकारी निःशुल्क उपलब्ध कराना है, ताकि स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर समय पर निर्णय लिए जा सकें।
समझौते के तहत आईएमडी डिक्रा मंच पर जिले और प्रखंड स्तर के मौसम पूर्वानुमान, कृषि-मौसम सलाह, मौसम केंद्रों से प्राप्त वास्तविक समय की जानकारी और मौसम चेतावनियां उपलब्ध कराएगा।
इन जानकारियों के लिए डिक्रा में एक अलग मौसम पोर्टल विकसित किया जा रहा है। इसमें मौसम संबंधी जानकारी को मिट्टी में नमी, वनस्पति की स्थिति, फसल की स्थिति और जलवायु जोखिम से जुड़े उपलब्ध आंकड़ों के साथ जोड़ा जाएगा। इससे किसानों और कृषि क्षेत्र से जुड़े अन्य लोगों को अपने क्षेत्र के अनुसार अधिक उपयोगी जानकारी मिल सकेगी।
नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी. ने कहा कि जलवायु जोखिम को अलग विषय के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसे विकास और कृषि वित्त से जुड़े निर्णयों में शामिल करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आईएमडी की मौसम संबंधी विशेषज्ञता और नाबार्ड के ग्रामीण संस्थागत नेटवर्क को जोड़ने से किसानों और बैंकों दोनों को समय रहते संभावित जोखिमों की जानकारी दी जा सकेगी।
भारत मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत में मौसम पूर्वानुमान की सटीकता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और अब अधिक स्थानीय स्तर तक पूर्वानुमान उपलब्ध कराए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि मौसम संबंधी जानकारी हर किसान तक सही समय पर और ऐसे रूप में पहुंचे, जिसका वह अपने खेत में उपयोग कर सके।
डिक्रा के खुले डिजिटल ढांचे के माध्यम से आईएमडी की कृषि-मौसम संबंधी जानकारी को उपयोगी प्रारूप में उपलब्ध कराया जाएगा। इसमें जिलेवार कृषि सलाह, मौसमी जोखिम चेतावनियां और मौसम से जुड़े जोखिम आकलन शामिल होंगे।
यह जानकारी किसानों के अलावा शोधकर्ताओं, नीति निर्माताओं, बैंक अधिकारियों और कृषि क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए भी उपलब्ध होगी। डिक्रा के वेब मंच, मोबाइल माध्यम और अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए इन आंकड़ों तक पहुंच उपलब्ध कराने की योजना है।
यह पहल नाबार्ड के डिक्रा मंच पर विकसित किए जा रहे मौसम पोर्टल को भी मजबूत करेगी। इसका उद्देश्य मौसम और जलवायु से जुड़े आंकड़ों को कृषि निर्णयों के लिए अधिक उपयोगी बनाना है।
समझौता ज्ञापन पर नाबार्ड के जलवायु कार्रवाई एवं स्थिरता विभाग के मुख्य महाप्रबंधक संजीव डी. रोहिल्ला और भारत मौसम विज्ञान विभाग के क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र, मुंबई के प्रमुख एवं वैज्ञानिक-जी बिक्रम सिंह ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. शाजी कृष्णन वी., आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्र तथा दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
डिक्रा क्या है?
डिक्रा यानी डेटा इन क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर एक खुला डिजिटल मंच है, जहां जलवायु अनुकूल कृषि से संबंधित भौगोलिक आंकड़े और विश्लेषण उपलब्ध कराए जाते हैं। इसे संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की भारत स्थित एक्सेलेरेटर लैब और विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के साथ मिलकर विकसित किया गया है।
डिक्रा को वर्ष 2022 में डिजिटल सार्वजनिक संसाधन के रूप में मान्यता मिली थी। कृषि में आंकड़ों पर आधारित नवाचारों को बढ़ावा देने के लिए नाबार्ड और यूएनडीपी के बीच साझेदारी के तहत नाबार्ड इस मंच का संचालन और रखरखाव कर रहा है।
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