राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

शिवराज सिंह चौहान का बड़ा ऐलान: पश्चिम बंगाल बनेगा देश का ‘सीड हब’, खुलेंगे चार कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र

15 जुलाई 2026, नई दिल्ली: शिवराज सिंह चौहान का बड़ा ऐलान: पश्चिम बंगाल बनेगा देश का ‘सीड हब’, खुलेंगे चार कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल के कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए कई अहम घोषणाएं की हैं। पश्चिम बंगाल दौरे के दौरान मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी, राज्य सरकार के मंत्रियों तथा केंद्र और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने राज्य को पूर्वी भारत का ‘सीड हब’ बनाने, कृषि अनुसंधान को मजबूत करने, किसानों को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने, क्लीन प्लांट प्रोग्राम का विस्तार करने और फसल बीमा व किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का दायरा बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण फैसलों की घोषणा की।

बैठक के बाद आयोजित संयुक्त प्रेस वार्ता में शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि विकसित भारत का सपना विकसित पश्चिम बंगाल के बिना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य में कृषि, ग्रामीण विकास और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार के साथ मिलकर काम कर रही है।

पश्चिम बंगाल बनेगा पूर्वी भारत का ‘सीड हब’

केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल को पूर्वी भारत का ‘सीड हब’ बनाने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। इसके लिए राज्य सरकार के साथ आलू बीज, हाइब्रिड मक्का बीज और अन्य फसलों के गुणवत्तापूर्ण बीज उत्पादन को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उनका कहना था कि इससे किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले बीज उपलब्ध होंगे, बीज उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और राज्य कृषि क्षेत्र में नई पहचान बनाएगा।

खुलेंगे चार कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि किसानों तक नई कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक शोध का लाभ पहुंचाने के लिए पश्चिम बंगाल में चार कृषि प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों में किसानों को आधुनिक खेती, उन्नत बीज उत्पादन, फसल प्रबंधन, नई कृषि तकनीकों और वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही कृषि अनुसंधान को भी मजबूती मिलेगी, जिससे खेती अधिक उत्पादक और लाभकारी बन सके।

वैज्ञानिक कृषि रोडमैप होगा तैयार

उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों और वैज्ञानिकों के सहयोग से पश्चिम बंगाल के लिए एक वैज्ञानिक एग्रीकल्चर रोडमैप तैयार किया जा रहा है। इसमें राज्य की जलवायु, मिट्टी, जल संसाधन और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किस क्षेत्र में कौन-सी फसल, किस तकनीक और किस वैल्यू चेन मॉडल के साथ उगाई जाए। इसके साथ ही चावल अनुसंधान केंद्रों को ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ के रूप में विकसित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा, ताकि पश्चिम बंगाल धान, आलू और मक्का जैसी प्रमुख फसलों के अनुसंधान आधारित उत्पादन का मॉडल बन सके।

मालदा में मिलेगा क्लीन प्लांट प्रोग्राम का लाभ

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि क्लीन प्लांट प्रोग्राम के तहत मालदा जैसे फल उत्पादक क्षेत्रों को भी जोड़ा जाएगा। इस योजना का उद्देश्य आम, लीची और अन्य फलों के लिए रोगमुक्त एवं उच्च गुणवत्ता वाले पौधे तैयार करना है, ताकि किसानों को बेहतर पौध सामग्री उपलब्ध हो और उन्हें अधिक उत्पादन के साथ निर्यात गुणवत्ता वाले फल मिल सकें।

उन्होंने बताया कि आधुनिक नर्सरी प्रणाली विकसित की जा रही है, जिसके तहत बड़ी नर्सरियों को 3 करोड़ रुपये और मध्यम नर्सरियों को 1.5 करोड़ रुपये तक की सहायता दी जाएगी। इससे हर वर्ष बड़ी संख्या में गुणवत्तापूर्ण पौधे किसानों तक पहुंचाए जा सकेंगे।

धान, मक्का और ऑर्किड की वैल्यू चेन को मिलेगा बढ़ावा

शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि पश्चिम बंगाल के ‘राइस बाउल’ क्षेत्रों में पोषणयुक्त धान, मक्का बीज उत्पादन, भंडारण, प्रसंस्करण और वैल्यू एडिशन को बढ़ावा देने के लिए विशेष परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इससे किसानों को बेहतर बाजार, अधिक मूल्य और कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण की सुविधाएं मिलेंगी। उन्होंने कहा कि ऑर्किड और बागवानी परियोजनाओं को भी स्वीकृति दी गई है। इन योजनाओं से विशेष जलवायु वाले क्षेत्रों में उच्च मूल्य वाली फसलों की खेती को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

फसल बीमा और KCC से जुड़ेंगे अधिक किसान

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पश्चिम बंगाल के अधिक से अधिक किसानों को जोड़ा जाएगा, ताकि प्राकृतिक आपदा या फसल खराब होने की स्थिति में उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिल सके। साथ ही किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) का लाभ सभी पात्र किसानों तक पहुंचाने के लिए नाबार्ड और बैंकों के सहयोग से गांव-गांव विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इससे किसानों को कम ब्याज पर संस्थागत ऋण मिलेगा और साहूकारों पर निर्भरता कम होगी।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन, पीएम धन-धान्य कृषि योजना, डिजिटल एग्रीटेक और पोषण संवर्धन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से राज्य में आधुनिक कृषि को बढ़ावा दिया जाएगा।

ग्रामीण विकास के लिए 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक के संसाधन

ग्रामीण विकास के संबंध में शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के लिए 8,508 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की है। राज्य सरकार के हिस्से को मिलाकर कुल संसाधन 12,064 करोड़ रुपये से अधिक होंगे, जिन्हें पंचायतों के माध्यम से गांवों के विकास और रोजगार सृजन पर खर्च किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि अब लक्ष्य केवल 100 दिन का रोजगार उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि ‘सवा सौ दिन का रोजगार’ सुनिश्चित करना है, ताकि प्राकृतिक आपदा या अन्य संकट की स्थिति में ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त रोजगार मिल सके। इसके अलावा VB-G RAM G अधिनियम 2025 के तहत सड़क, तालाब, लघु सिंचाई परियोजनाएं, स्कूल और आंगनबाड़ी भवन जैसी टिकाऊ परिसंपत्तियों के निर्माण पर विशेष जोर दिया जाएगा।

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