खरीफ बुवाई पिछले वर्ष से 101.44 लाख हेक्टेयर पीछे, सोयाबीन, धान और कपास की रफ्तार धीमी
14 जुलाई 2026, नई दिल्ली: खरीफ बुवाई पिछले वर्ष से 101.44 लाख हेक्टेयर पीछे, सोयाबीन, धान और कपास की रफ्तार धीमी – देश में खरीफ फसलों की बुवाई ने अब तक अपेक्षित गति नहीं पकड़ी है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 13 जुलाई को जारी आंकड़ों के अनुसार 10 जुलाई 2026 तक देश में 531.25 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई है। यह पिछले वर्ष की समान अवधि के 632.69 लाख हेक्टेयर की तुलना में 101.44 लाख हेक्टेयर कम है। वहीं, यह सामान्य बुवाई क्षेत्र (549.36 लाख हेक्टेयर) से भी 18.11 लाख हेक्टेयर कम है।
सबसे अधिक कमी तिलहन, मोटे अनाज, दलहन और कपास की बुवाई में दर्ज की गई है। हालांकि गन्ना तथा जूट एवं मेस्ता की बुवाई पिछले वर्ष से थोड़ी बेहतर रही है।
10 जुलाई 2026 तक खरीफ फसलों की बुवाई की स्थिति (क्षेत्रफल : लाख हेक्टेयर में)
| फसल | सामान्य क्षेत्र (2020-21 से 2024-25) | 2025 का अंतिम क्षेत्र | सामान्य बुवाई (2021-25 औसत) | 10 जुलाई 2025 तक बुवाई | 10 जुलाई 2026 तक बुवाई | 2025 की तुलना में अंतर |
|---|---|---|---|---|---|---|
| धान | 412.00 | 446.70 | 97.74 | 125.53 | 114.69 | -10.84 |
| दलहन | 123.64 | 118.97 | 62.20 | 73.85 | 56.63 | -17.22 |
| (i) अरहर | 44.32 | 44.60 | 24.20 | 28.03 | 19.54 | -8.49 |
| (ii) उड़द | 29.60 | 21.26 | 13.81 | 13.29 | 9.34 | -3.95 |
| (iii) मूंग | 35.48 | 37.45 | 18.35 | 24.08 | 21.52 | -2.56 |
| (iv) कुल्थी | 1.48 | — | 0.14 | 0.13 | 0.14 | +0.01 |
| (v) मोठ | 9.69 | — | 1.38 | 6.12 | 4.40 | -1.72 |
| (vi) अन्य दलहन | 3.07 | 15.66 | 4.32 | 2.20 | 1.69 | -0.52 |
| श्री अन्न (मोटे अनाज) | 182.63 | 192.12 | 101.38 | 127.30 | 98.69 | -28.61 |
| (i) ज्वार | 14.44 | 12.10 | 7.64 | 9.01 | 6.88 | -2.13 |
| (ii) बाजरा | 70.94 | 63.80 | 35.11 | 45.98 | 33.76 | -12.22 |
| (iii) रागी | 12.01 | 13.46 | 1.06 | 1.11 | 0.93 | -0.18 |
| (iv) लघु मिलेट्स | 4.47 | 4.15 | 1.83 | 1.64 | 1.16 | -0.48 |
| (v) मक्का | 80.77 | 98.61 | 55.74 | 69.56 | 55.97 | -13.59 |
| तिलहन | 200.08 | 196.38 | 130.81 | 149.18 | 117.83 | -31.34 |
| (i) मूंगफली | 46.79 | 50.29 | 29.95 | 35.45 | 23.40 | -12.05 |
| (ii) सोयाबीन | 128.71 | 123.86 | 96.04 | 107.72 | 90.51 | -17.21 |
| (iii)सूरजमुखी | 1.20 | 0.88 | 0.71 | 0.53 | 0.86 | +0.33 |
| (iv) तिल | 12.88 | 9.63 | 3.77 | 5.17 | 2.79 | -2.38 |
| (v) रामतिल (नाइजर) | 1.01 | 0.83 | 0.07 | 0.01 | 0.06 | +0.05 |
| (vi) अरंडी | 9.49 | 10.89 | 0.22 | 0.24 | 0.14 | -0.10 |
| (vii) अन्य तिलहन | 0.00 | — | 0.05 | 0.05 | 0.07 | +0.03 |
| गन्ना | 54.20 | 58.84 | 55.22 | 56.72 | 57.58 | +0.86 |
| जूट एवं मेस्ता | 6.40 | 6.06 | 6.18 | 6.16 | 6.28 | +0.12 |
| कपास | 125.51 | 115.20 | 95.83 | 93.95 | 79.54 | -14.41 |
| कुल | 1104.46 | 1134.27 | 549.36 | 632.69 | 531.25 | -101.44 |
स्रोत: कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार (10 जुलाई 2026 तक की स्थिति; 13 जुलाई 2026 को जारी आंकड़े)।
धान की बुवाई पिछली बार से पीछे
देश में अब तक 114.69 लाख हेक्टेयर में धान की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 125.53 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी। यानी धान का रकबा 10.84 लाख हेक्टेयर कम है। हालांकि यह सामान्य बुवाई क्षेत्र की तुलना में अभी भी अधिक बना हुआ है।
दलहन में 17 लाख हेक्टेयर से अधिक की कमी
दलहनी फसलों की कुल बुवाई 56.63 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले वर्ष के 73.85 लाख हेक्टेयर से 17.22 लाख हेक्टेयर कम है।
दलहनों में:
- अरहर की बुवाई 8.49 लाख हेक्टेयर कम हुई।
- उड़द में 3.95 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई।
- मूंग की बुवाई पिछले वर्ष से कुछ कम जरूर है, लेकिन सामान्य क्षेत्र से अधिक बनी हुई है।
- मोठ का रकबा भी सामान्य से अधिक है, हालांकि पिछले वर्ष की तुलना में इसमें गिरावट आई है।
मोटे अनाज और मक्का की बुवाई भी घटी
श्री अन्न (मोटे अनाज) की कुल बुवाई 98.69 लाख हेक्टेयर रही, जो पिछले वर्ष से 28.61 लाख हेक्टेयर कम है।
मक्का की बुवाई 55.97 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 69.56 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई थी। बाजरा, ज्वार, रागी और अन्य लघु मिलेट्स में भी पिछले वर्ष की तुलना में कमी दर्ज की गई है।
तिलहनों में सबसे ज्यादा गिरावट
तिलहनी फसलों की बुवाई में सबसे अधिक गिरावट देखने को मिली है। कुल 117.83 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुवाई हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह 149.18 लाख हेक्टेयर थी। यानी 31.34 लाख हेक्टेयर की कमी आई है।
देश की प्रमुख खरीफ तिलहनी फसल सोयाबीन का रकबा घटकर 90.51 लाख हेक्टेयर रह गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 17.21 लाख हेक्टेयर कम है। इसी तरह मूंगफली की बुवाई में भी 12.05 लाख हेक्टेयर की कमी दर्ज की गई।
तिलहनी फसलों में केवल सूरजमुखी की बुवाई पिछले वर्ष और सामान्य दोनों से अधिक रही है।
कपास की बुवाई भी पीछे
कपास की बुवाई 79.54 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 93.95 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई थी। इस प्रकार कपास का रकबा 14.41 लाख हेक्टेयर कम है और यह सामान्य क्षेत्र से भी काफी नीचे बना हुआ है।
गन्ना और जूट में बढ़त
गन्ने की बुवाई 57.58 लाख हेक्टेयर में हुई है, जो पिछले वर्ष से 0.86 लाख हेक्टेयर अधिक है। वहीं जूट एवं मेस्ता का रकबा भी 6.28 लाख हेक्टेयररहा, जो पिछले वर्ष से 0.12 लाख हेक्टेयर अधिक है।
मानसून की प्रगति पर रहेगी नजर
विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई का दूसरा पखवाड़ा खरीफ बुवाई के लिए सबसे महत्वपूर्ण रहता है। यदि प्रमुख कृषि राज्यों में मानसून सामान्य बना रहता है तो धान, सोयाबीन, कपास और दलहनी फसलों की बुवाई में तेजी आ सकती है और वर्तमान अंतर कुछ हद तक कम हो सकता है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार यह आंकड़े 10 जुलाई 2026 तक की बुवाई को दर्शाते हैं तथा इन्हें 13 जुलाई 2026 को जारी किया गया है I
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