राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

पैराक्वॉट खरपतवारनाशक पर पूर्ण प्रतिबंध की तैयारी, केंद्र सरकार ने जारी किया मसौदा आदेश

14 जुलाई 2026, नई दिल्ली: पैराक्वॉट खरपतवारनाशक पर पूर्ण प्रतिबंध की तैयारी, केंद्र सरकार ने जारी किया मसौदा आदेश – केंद्र सरकार ने देश में व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले खरपतवारनाशी पैराक्वॉट डाइक्लोराइड पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने ‘पैराक्वॉट डाइक्लोराइड (प्रतिबंध) आदेश, 2026’ का मसौदा राजपत्र में प्रकाशित कर दिया है। इस मसौदे पर 30 दिनों के भीतर हितधारकों से आपत्तियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं, जिसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के बाद निर्णय

केंद्र सरकार ने 14 जनवरी 2026 को एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया था, जिसे भारत में पंजीकृत पैराक्वॉट डाइक्लोराइड के निरंतर उपयोग की समीक्षा का दायित्व सौंपा गया था। समिति ने विस्तृत अध्ययन के बाद 12 जून 2026 को अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी।

इसके बाद सरकार ने कीटनाशी अधिनियम, 1968 के तहत गठित पंजीकरण समिति से भी परामर्श किया। समिति ने उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों, सुरक्षा संबंधी आंकड़ों तथा अन्य तथ्यों का परीक्षण करने के बाद पैराक्वॉट डाइक्लोराइड पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की।

भारत में पैराक्वॉट डाइक्लोराइड का पंजीकृत उपयोग खरपतवार नियंत्रण के लिए है। हालांकि, मूंग और सोयाबीन जैसी फसलों को यांत्रिक कटाई (मैकेनिकल हार्वेस्टिंग) से पहले जल्दी सुखाने (क्रॉप डेसिकेशन) के लिए इसके उपयोग के कई मामले और रिपोर्टें सामने आती रही हैं। फसलों को सुखाने (क्रॉप डेसिकेशन) के उद्देश्य से पैराक्वॉट डाइक्लोराइड का उपयोग भारत में पंजीकृत (रजिस्टर्ड) नहीं है, इसलिए इस उद्देश्य से इसका प्रयोग अनुमोदित लेबल दावों के दायरे में नहीं आता।

स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताएं

मसौदा अधिसूचना के अनुसार, पंजीकरण समिति ने उल्लेख किया है कि पैराक्वॉट डाइक्लोराइड पर दुनिया के 70 से अधिक देशों में प्रतिबंध लगाया जा चुका है या इसके उपयोग पर कड़े प्रतिबंध लागू हैं। समिति ने इसके मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव, लगातार सामने आने वाली विषाक्तता की घटनाओं, अधिक मृत्यु दर तथा इसके लिए किसी प्रभावी प्रतिविष (एंटीडोट) के उपलब्ध न होने जैसी गंभीर चिंताओं को भी रेखांकित किया है।

इन तथ्यों के आधार पर केंद्र सरकार ने माना है कि पैराक्वॉट डाइक्लोराइड का उपयोग मनुष्यों और पशुओं के लिए जोखिमपूर्ण हो सकता है तथा इस पर तत्काल नियामकीय कार्रवाई आवश्यक है।

मसौदा आदेश में क्या है प्रस्ताव

प्रस्तावित आदेश के अंतिम रूप से लागू होने के बाद देश में पैराक्वॉट डाइक्लोराइड का आयात, निर्माण, परिवहन, वितरण, बिक्री और उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित हो जाएगा।

साथ ही, इस रसायन के लिए जारी सभी पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस ले लिए जाएंगे। पंजीकरण धारकों को तीन माह के भीतर अपने प्रमाणपत्र पंजीकरण समिति को लौटाने होंगे। ऐसा नहीं करने पर कीटनाशी अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, धारा 9 के अंतर्गत जारी सभी पंजीकरण आदेश लागू होने की तिथि से स्वतः निरस्त माने जाएंगे। राज्यों को भी इस प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए आवश्यक कदम उठाने होंगे।

30 दिनों के भीतर मांगे गए सुझाव

केंद्र सरकार ने मसौदा आदेश पर आम जनता, उद्योग, वैज्ञानिकों और अन्य संबंधित पक्षों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की हैं। प्राप्त टिप्पणियों पर विचार करने के बाद सरकार अंतिम अधिसूचना जारी करेगी।

वैश्विक परिप्रेक्ष्य

पैराक्वॉट डाइक्लोराइड एक गैर-चयनात्मक संपर्क खरपतवारनाशी है, जिसका उपयोग विभिन्न फसलों, बागानों और वृक्षारोपण क्षेत्रों में खरपतवार नियंत्रण के लिए किया जाता रहा है। हालांकि इसकी तीव्र विषाक्तता और विषाक्तता की स्थिति में प्रभावी उपचार के अभाव के कारण यह लंबे समय से वैश्विक स्तर पर विवाद का विषय बना हुआ है।

यदि प्रस्तावित आदेश अंतिम रूप से लागू होता है, तो भारत भी उन देशों की सूची में शामिल हो जाएगा जिन्होंने मानव स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पैराक्वॉट डाइक्लोराइड के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध या कड़े नियंत्रण लागू किए हैं।


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