राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के दस अ(स)फल साल!

लेखक- मधुकर पवार, फ़ोन नो.- 9425071942

21 फ़रवरी 2025, नई दिल्ली: मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के दस अ(स)फल साल! – केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एन.डी.ए.) की सरकार द्वारा किसानों के हित में शुरू की गई महत्वाकांक्षी मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना को एक दशक हो गए हैं। इस योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 19 फरवरी, 2015 को राजस्थान के सूरतगढ़ में की थी। मृदा स्वास्थ्य कार्ड की उपयोगिता के बारे में बताया गया था कि इस कार्ड के माध्यम से किसानों को उनकी मिट्टी की पोषक स्थिति के बारे में तथा मिट्टी के स्वास्थ्य और उसकी उर्वरता में सुधार के लिए पोषक तत्वों की उचित खुराक जानकारी प्राप्त हो जाएगी। मृदा स्वास्थ्य कार्ड में 12 मापदंडों के संबंध में मिट्टी की स्थिति की जानकारी उपलब्ध रहती है। इसके तहत नाइट्रोजन, फ़ॉस्फोरस, पोटैशियम, सल्फर (मैक्रो-पोषक तत्व); जिंक, लौह तत्व, तांबा, मैंगनीज, बोरन (सूक्ष्म पोषक तत्व); पीएच (अम्लता या क्षारीयता), ईसी (विद्युत चालकता) और ओसी (कार्बनिक कार्बन) । इसके आधार पर, मृदा स्वास्थ्य कार्ड से खेत के लिए आवश्यक उर्वरक अनुशंसाओं की जानकारी मिल सकेगी। मिट्टी के नमूने आम तौर पर साल में दो बार लिए जाते हैं अर्थात रबी और खरीफ फसल की कटाई के बाद या जब खेत में कोई फसल न लगी हो।

भारत में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत अब तक 24.74 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड (एसएचसी) बनाए गए हैं और विभिन्न राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को 1706 करोड़ रूपये की धनराशि जारी की गई है। अब तक, पूरे देश में 8272 मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं जिनमें 1068 स्टैटिक मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं, 163 मोबाइल मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं, 6376 मिनी मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं और 665 ग्राम स्तर की मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं शामिल हैं। इसके अलावा मृदा स्वास्थ्य कार्ड पोर्टल www.soilhealth.dac.gov.in देश भर में सभी प्रमुख भाषाओं और 5 बोलियों में एक समान और मानकीकृत प्रारूप में किसानों के लाभ के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड तैयार करने की सुविधा प्रदान करता है।

सरकार दावा करती हैं कि मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना ने पिछले एक दशक में भारत में कृषि पद्धतियों को बदल दिया है। 2015 से, इसने किसानों को मिट्टी की पोषक स्थिति और उर्वरक के उपयोग पर महत्वपूर्ण जानकारी देकर सशक्त बनाया है, जिससे टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिला है। फसल उत्पादकता में भी वृद्धि हुई है। स्कूल मृदा स्वास्थ्य कार्यक्रम जैसी पहलों ने छात्रों और स्थानीय समुदायों के बीच मृदा स्वास्थ्य के बारे में जागरूकता बढ़ाई है। एक मजबूत मोबाइल ऐप के साथ, मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्राप्त करने की प्रक्रिया ने पहुँच, दक्षता और पारदर्शिता को बढ़ाया है। जैसे-जैसे यह योजना विकसित हो रही है, यह टिकाऊ कृषि विकास को बढ़ावा देने और भविष्य की पीढ़ियों के लिए भारत की मिट्टी के स्वास्थ्य की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

भारत में किसानों की संख्या करीब 12 करोड़ से अधिक है लेकिन बहुत कम किसान मिट्टी परीक्षण कराते हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार सन 2024-25 में कुल 22 लाख मिट्टी के नमूनों का परीक्षण किया गया है । देश में भले ही मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की संख्या पर्याप्त है लेकिन मिट्टी के नमूनों की जांच की संख्या बेहद कम है। सरकार यह भी दावा करती है कि मृदा स्वास्थ्य कार्डों की संख्या 24 करोड़ से अधिक हो गई है तब मात्र 22 लाख नमूनों का परीक्षण करना यह दर्शाता है कि या तो किसान मिट्टी परीक्षण नहीं करवाना चाहते हैं या प्रयोगशालाओं का पूरी क्षमता के साथ उपयोग नहीं हो रहा है। किसानों का यह भी आरोप है कि उन्हें मिट्टी परीक्षण की रिपोर्ट समय सीमा के भीतर नहीं मिलती है। रिपोर्ट मिलने में तीन – चार महीने तक लग जाते हैं। ऐसी स्थिति में वे रिपोर्ट की अनुशंसा के मुताबिक खेतों में पोषक तत्वों की पूर्ति और उर्वरकों / खादों का उपयोग नहीं कर पाते हैं। चिंताजनक बात तो यह भी है कि मिट्टी परीक्षण से होने वाले फायदों के बारे में काफी कम किसानों को जानकारी है। इसके लिये राज्य सरकारों के कृषि विभाग को जिम्मेदार माना जाना चाहिए।

केंद्र और राज्य सरकारों को यह बात अच्छी तरह समझ लेना चाहिये कि केवल मृदा स्वास्थ्य कार्ड बनाने और इनकी संख्या बढ़ाना ही काफी नहीं है। प्रत्येक किसान को इस कार्ड की उपयोगिता की जानकारी के साथ मिट्टी परीक्षण के लाभ और परीक्षण की रिपोर्ट समय सीमा के भीतर किसानों को मिलनी चाहिए ताकि वे फसल लगाने से पहले कृषि भूमि में जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति कर जमीन को फसल के अनुरूप तैयार कर सके। अधिकांश किसान अपने अनुभवों और पारम्परिक रूप से ही खेती कर रहे हैं। यदि फसल लगाने के पहले वे मिट्टी परीक्षण कर लगाने वाली फसल के लिये जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति कर दें तो इससे न केवल फसलों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी बल्कि उत्पादकता में भी वृद्धि होगी। इसलिए किसानों को मिट्टी परीक्षण के महत्व के बारे में जानकारी देने, मिट्टी परीक्षण का रिकार्ड रखने, लगाई जाने वाली फसलों के लिए जरूरी पोषक तत्वों की पूर्ति करने आदि सभी विषयों की जानकारी देने के लिए गम्भीरता से कार्य करने की आवश्यकता है। यह किसानों के साथ देश हित में भी सकारात्मक कदम सिद्ध होगा अन्यथा एक बहुत उपयोगी मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना केवल कागजों में ही सफलता की कहानी बनकर रह जाएगी।

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