पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर पूर्ण प्रतिबंध की तैयारी
केंद्र सरकार ने जारी किया मसौदा आदेश, 30 दिन में मांगे सुझाव व आपत्तियां
15 जुलाई 2026, इंदौर: पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर पूर्ण प्रतिबंध की तैयारी – केंद्र सरकार ने अत्यधिक विषैले खरपतवारनाशी पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने “बैनिंग ऑफ पैराक्वाट डाइक्लोराइड ऑर्डर, 2026” का मसौदा अधिसूचना जारी करते हुए इसके निर्माण, आयात, परिवहन, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा है। सरकार ने इस प्रस्ताव पर उद्योग, वैज्ञानिकों, किसानों और अन्य हितधारकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं। प्राप्त सुझावों पर विचार करने के बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।
पैराक्वाट एक गैर-चयनात्मक (नॉन-सेलेक्टिव) संपर्क (कॉन्टैक्ट) खरपतवारनाशी है, जिसका उपयोग बागानों, फलोद्यानों तथा विभिन्न फसलों में खरपतवार नियंत्रण के लिए किया जाता है। लेकिन इसकी अत्यधिक विषाक्तता और विषाक्तता की स्थिति में प्रभावी प्रतिविष (एंटीडोट) उपलब्ध नहीं होने के कारण यह विश्व के सबसे विवादास्पद फसल संरक्षण रसायनों में शामिल रहा है। कई देशों में इसके उपयोग पर पहले ही प्रतिबंध लगाया जा चुका है या कड़े नियामक प्रतिबंध लागू हैं।
सरकार द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों, विषाक्तता संबंधी आंकड़ों और मानव एवं पशु स्वास्थ्य पर संभावित जोखिमों का परीक्षण करने के बाद इसके पूर्ण प्रतिबंध की अनुशंसा की है। मसौदा आदेश लागू होने के बाद पैराक्वाट डाइक्लोराइड से जुड़े सभी पंजीकरण निरस्त हो जाएंगे तथा कंपनियों को निर्धारित समय-सीमा में अपने पंजीकरण प्रमाणपत्र वापस जमा करने होंगे।
मध्य प्रदेश में मूंग की खेती में हो रहा था दुरुपयोग – मध्य प्रदेश में जायद की मूंग फसल में पैराक्वाट डाइक्लोराइड का बड़े पैमाने पर कटाई से पहले फसल को कृत्रिम रूप से सुखाने (डेसिकेशन) के लिए दुरुपयोग किए जाने की शिकायतें लगातार सामने आती रही हैं। शीघ्र कटाई और श्रम लागत कम करने के उद्देश्य से कुछ किसान खड़ी फसल पर इसका छिड़काव कर रहे थे। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार यह उपयोग अनुशंसित नहीं है और इससे फसल में रासायनिक अवशेष बने रहने की आशंका रहती है, जो उपभोक्ता स्वास्थ्य के लिए भी जोखिम पैदा कर सकती है।
इन्हीं शिकायतों के आधार पर मध्य प्रदेश के कई जिलों में कृषि विभाग ने समय-समय पर मूंग की फसल में पैराक्वाट के उपयोग पर रोक लगाई थी। विभाग ने किसानों को इस रसायन के दुरुपयोग से बचने और केवल अनुशंसित फसलों एवं निर्धारित विधि से ही खरपतवारनाशियों का उपयोग करने की सलाह भी जारी की थी।
प्रस्तावित प्रतिबंध लागू होने पर इसका प्रभाव पैराक्वाट आधारित उत्पाद बनाने वाली कंपनियों, कृषि आदान विक्रेताओं तथा उन किसानों पर पड़ेगा जो खरपतवार नियंत्रण के लिए इस रसायन का उपयोग करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंध के बाद किसानों को सुरक्षित एवं प्रभावी वैकल्पिक खरपतवार प्रबंधन तकनीकों और कम विषैले विकल्पों को अपनाने की आवश्यकता होगी।
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