धान में तना छेदक और भूरा फुदका कीट का खतरा, समय रहते करें बचाव के उपाय
16 सितंबर 2026, नई दिल्ली: धान में तना छेदक और भूरा फुदका कीट का खतरा, समय रहते करें बचाव के उपाय- देशभर में धान की फसल इस समय बालियां बनने की अवस्था में है और इसी दौरान तना छेदक और भूरा फुदका (ब्राउन प्लांट हॉपर या BPH) कीट का प्रकोप तेजी से बढ़ने का खतरा रहता है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को समय रहते निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर तुरंत उपचार करने की सलाह दी है।
तना छेदक कीट धान के तने के अंदर घुसकर उसे भीतर से खोखला कर देता है, जिससे बाली सूख जाती है और उसे “डेड हार्ट” कहा जाता है। वहीं भूरा फुदका कीट पौधे का रस चूसकर उसे कमजोर कर देता है, जिससे बड़े इलाके में एक साथ फसल गिरने (हॉपर बर्न) की स्थिति बन सकती है।
सितंबर के महीने में उमस भरा मौसम, लगातार बादल छाए रहना और खेतों में लंबे समय तक पानी भरा रहना, ये तीनों स्थितियां भूरा फुदका कीट के लिए अनुकूल मानी जाती हैं। यही वजह है कि बाली बनने की अवस्था में इस कीट की निगरानी को कृषि विशेषज्ञ सबसे जरूरी मानते हैं।
तना छेदक के लिए यह दवा और मात्रा कारगर
तना छेदक के नियंत्रण के लिए कार्टैप हाइड्रोक्लोराइड 4 प्रतिशत दानेदार दवा का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से खेत में डालना चाहिए। इसके साथ ही कीट की सही समय पर पहचान के लिए खेत में 3-4 फेरोमोन ट्रैप प्रति एकड़ लगाने की सलाह दी गई है, ताकि कीट का प्रकोप शुरू होते ही पता चल सके।
दानेदार दवा डालने से पहले खेत में पर्याप्त नमी होना जरूरी है, ताकि दवा जड़ों के आसपास ठीक से घुल सके और पौधे तक पहुंच सके। विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ ट्रैप में कीट दिखने पर ही दवा डालनी चाहिए, बिना वजह हर साल दवा का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।
भूरा फुदका कीट के लिए यह उपाय अपनाएं
भूरा फुदका कीट के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एससी दवा कारगर मानी जाती है। इसे 1 मिलीलीटर दवा को 3 लीटर पानी में घोलकर पौधों के तने के पास छिड़काव करना चाहिए, क्योंकि यह कीट पौधे के निचले हिस्से में ज्यादा पाया जाता है।
छिड़काव के दौरान खेत का पानी थोड़ा कम कर देना चाहिए, ताकि दवा तने के निचले हिस्से तक अच्छी तरह पहुंच सके। इसके अलावा खेत में जरूरत से ज्यादा नाइट्रोजन उर्वरक का इस्तेमाल न करने की भी सलाह दी जाती है, क्योंकि इससे पौधे कमजोर होकर कीटों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाते हैं।
खेत में बीच-बीच में पानी निकालकर सुखाना, यानी बारी-बारी से गीला और सूखा रखने की विधि अपनाना भी भूरा फुदका कीट को रोकने में मददगार माना जाता है। इससे कीट के लिए अनुकूल नम वातावरण कम बनता है और पौधों की जड़ों को भी बेहतर हवा मिलती है।
विशेषज्ञों ने यह भी सलाह दी है कि किसी भी कीटनाशक का छिड़काव करने से पहले खेत में कीट के प्रकोप की सही स्थिति जरूर जांच लें और सिर्फ आर्थिक नुकसान की सीमा पार करने पर ही रासायनिक दवा का इस्तेमाल करें, ताकि लागत और पर्यावरण दोनों पर बेवजह असर न पड़े।
छिड़काव सुबह या शाम के समय करना बेहतर माना जाता है, जब खेत में मित्र कीट यानी कीटों को खाने वाले प्राकृतिक शिकारी कम सक्रिय होते हैं। इससे फसल में कीटों को स्वाभाविक रूप से नियंत्रित रखने वाले मकड़ी और अन्य लाभकारी कीटों को भी कम नुकसान पहुंचता है, जो लंबे समय में खेत के पारिस्थितिकी संतुलन के लिए बेहतर रहता है।
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