धान-मक्का में तना छेदक और फॉल आर्मीवर्म का खतरा, वैज्ञानिकों ने बताई सही दवा और मात्रा
07 सितंबर 2026, समस्तीपुर: धान-मक्का में तना छेदक और फॉल आर्मीवर्म का खतरा, वैज्ञानिकों ने बताई सही दवा और मात्रा – धान और मक्का की फसल इस समय बढ़वार की अहम अवस्था में है, और ठीक इसी दौरान तना छेदक और फॉल आर्मीवर्म कीट के हमले की शिकायतें बढ़ने लगी हैं। डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा (समस्तीपुर) के वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए ताजा सुरक्षा सलाह जारी की है।
गूगल पर भी इन दिनों “मक्का में फॉल आर्मीवर्म का इलाज” और “धान में तना छेदक की दवा” जैसे सवाल तेजी से खोजे जा रहे हैं, जो बताता है कि यह समस्या बिहार के साथ-साथ देश के कई हिस्सों में किसानों को परेशान कर रही है।
तना छेदक और पत्ती लपेटक पर क्या करें
वैज्ञानिकों के मुताबिक जिन खेतों में तना छेदक या पत्ती लपेटक कीट का प्रकोप दिखे, वहां क्लोरेंट्रानिलिप्रोल 4 प्रतिशत जी (दानेदार) कीटनाशक का इस्तेमाल करना चाहिए। इसकी मात्रा 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखने की सलाह दी गई है।
इस दानेदार दवा को खेत में हल्की नमी रहते हुए डालना ज्यादा असरदार रहता है, इसलिए इसे प्रकोप दिखते ही दोपहर बाद के समय में बिखेरने की सलाह दी गई है। दवा डालने के बाद खेत में कुछ देर पानी बनाए रखना बेहतर परिणाम देता है।
कद्दूवर्गीय फसलों और लीची के लिए अलग सलाह
जिन किसानों की लौकी, तोरई, खीरा जैसी कद्दूवर्गीय फसलों में फल मक्खी का प्रकोप दिख रहा है, उन्हें इमिडाक्लोप्रिड 30.5 एससी का 0.25 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से घोल बनाकर साफ मौसम में छिड़काव करने को कहा गया है। बारिश की आशंका होने पर छिड़काव टालने की सलाह दी गई है, ताकि दवा बहकर बेकार न हो।
लीची की बागवानी करने वाले किसानों के लिए वैज्ञानिकों ने रासायनिक छिड़काव से पहले एक सस्ता उपाय सुझाया है। पेड़ के तने पर चिपचिपे गोंद वाली पट्टी (ट्रंक बैरियर बैंड) बांधने से रेंगकर ऊपर चढ़ने वाले कीट पेड़ पर नहीं पहुंच पाते, जिससे फल और नई कोपलों को नुकसान से बचाया जा सकता है।
विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि किसान किसी भी कीटनाशक का इस्तेमाल करने से पहले एक बार नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग के कर्मचारी से खेत में असली प्रकोप की पुष्टि जरूर करा लें, ताकि गलत दवा या बेवजह छिड़काव से पैसा और समय दोनों बर्बाद न हों। छिड़काव करते समय दस्ताने और मास्क पहनने, हवा की दिशा में खड़े होकर छिड़काव करने और खाली डिब्बों को खेत या जलस्रोत के पास न फेंकने की सामान्य सावधानी बरतने की भी सलाह दी गई है।
वैज्ञानिकों ने बताया कि फॉल आर्मीवर्म एक ऐसा कीट है जो एक बार खेत में आने के बाद बहुत तेजी से फैलता है, इसलिए मक्का के छोटे पौधों की गोभ (व्होर्ल) में इसके अंडे या शुरुआती लार्वा दिखते ही कार्रवाई कर लेना बेहतर रहता है। देर होने पर लार्वा पौधे के अंदर घुस जाता है, जिसके बाद छिड़काव का असर काफी कम हो जाता है।
यह एडवाइजरी उन किसानों के लिए बेहद जरूरी है जिनकी धान, मक्का, कद्दूवर्गीय सब्जियां और लीची के बाग इस समय खतरे में हैं, क्योंकि समय पर सही दवा और सही मात्रा का इस्तेमाल न होने पर उपज को भारी नुकसान हो सकता है। कीटनाशक कंपनियों और कृषि-इनपुट दुकानदारों के लिए भी यह संकेत है कि आने वाले दिनों में क्लोरेंट्रानिलिप्रोल और इमिडाक्लोप्रिड जैसे उत्पादों की मांग बढ़ सकती है, इसलिए स्टॉक और सही सलाह दोनों की उपलब्धता जरूरी होगी।
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