ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कृषि पर जोर: एग्रो-इकोलॉजी, डिजिटल एग्रीकल्चर और क्लाइमेट-रेजिलिएंट एग्रीकल्चर सहयोग के केंद्र में
15 सितंबर 2026, नई दिल्ली: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कृषि पर जोर: एग्रो-इकोलॉजी, डिजिटल एग्रीकल्चर और क्लाइमेट-रेजिलिएंट एग्रीकल्चर सहयोग के केंद्र में – नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कृषि को व्यापक रेजिलिएंस, फूड सिक्योरिटी और सस्टेनेबिलिटी एजेंडे के हिस्से के रूप में जगह मिली। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के दौरान तैयार किए गए नई दिल्ली ब्रिक्स लीडर्स डिक्लेरेशन में एग्रो-इकोलॉजी, डिजिटल एग्रीकल्चर और क्लाइमेट-रेजिलिएंट एग्रीकल्चर में सहयोग को प्रमुख परिणामों के रूप में सामने रखा गया।
12 सितंबर की विशेष प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के आर्थिक संबंध सचिव सुधाकर डलेला ने बताया कि नई दिल्ली डिक्लेरेशन में रेजिलिएंस, इनोवेशन, कोऑपरेशन और सस्टेनेबिलिटी के चार स्तंभों के तहत 50 से अधिक व्यावहारिक परिणाम शामिल हैं।
फूड सिक्योरिटी के तहत एग्रो-इकोलॉजी और डिजिटल एग्रीकल्चर
रेजिलिएंस के स्तंभ के तहत फूड और हेल्थ सिक्योरिटी को मजबूत करने पर जोर दिया गया। इसमें ब्रिक्स सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस ऑन एग्रो-इकोलॉजी और ब्रिक्स नेटवर्क ऑन डिजिटल एग्रीकल्चर को प्रमुख पहलों के रूप में शामिल किया गया है।
इन पहलों को स्वस्थ जीवनशैली, मानसिक स्वास्थ्य और डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट से जुड़े सहयोग के साथ रखा गया है।
13 सितंबर की समापन प्रेस ब्रीफिंग में डलेला ने कहा कि शिखर सम्मेलन के दौरान इस बात पर व्यापक सहमति रही कि ब्रिक्स सहयोग को हेल्थ, फूड सिक्योरिटी, एनर्जी, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजास्टर रेजिलिएंस जैसे क्षेत्रों में दिखाई देने वाले परिणाम देने चाहिए।
क्लाइमेट-रेजिलिएंट एग्रीकल्चर को सस्टेनेबिलिटी एजेंडे में जगह
कृषि को सस्टेनेबिलिटी के स्तंभ के तहत भी स्थान मिला। 12 सितंबर की प्रेस ब्रीफिंग में क्लाइमेट-रेजिलिएंट एग्रीकल्चर को इस स्तंभ के महत्वपूर्ण परिणामों में शामिल किया गया।
इसी स्तंभ में स्मार्ट ग्रिड, एनर्जी स्टोरेज, क्लाइमेट-रेजिलिएंट अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर, सस्टेनेबल अर्बन मोबिलिटी और सस्टेनेबल लाइफस्टाइल से जुड़ी पहलों का भी उल्लेख किया गया।
हालांकि, प्रेस ब्रीफिंग में क्लाइमेट-रेजिलिएंट एग्रीकल्चर के तहत किसी विशेष कार्यक्रम, तकनीक, फसल, लक्ष्य या कार्यान्वयन की समयसीमा का विवरण नहीं दिया गया।
कृषि व्यापक डेवलपमेंट कोऑपरेशन का हिस्सा
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के व्यापक विकास एजेंडे में भी कृषि का स्पष्ट उल्लेख किया गया।
12 सितंबर की प्रेस ब्रीफिंग में डलेला ने कहा कि ब्रिक्स के तीन व्यापक वर्टिकल हैं: पॉलिटिकल एंड सिक्योरिटी, इकोनॉमिक एंड फाइनेंशियल और पीपल-टू-पीपल कोलैबोरेशन। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता के दौरान ऐसे डेवलपमेंट-ओरिएंटेड प्रयासों को प्राथमिकता दी गई जो लोगों के जीवन से सीधे जुड़े हों। इनमें ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, एग्रीकल्चर, हेल्थ और टेक्नोलॉजी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि ब्रिक्स आगे भी पार्टनरशिप के डेवलपमेंट पक्ष पर कोऑपरेशन बढ़ाना जारी रखेगा।
कृषि सहयोग को आगे जारी रखने की तैयारी
13 सितंबर की समापन प्रेस ब्रीफिंग में भारत की अध्यक्षता के दौरान विकसित पहलों की प्रकृति पर भी चर्चा हुई। डलेला ने कहा कि चार प्राथमिक स्तंभों के तहत विकसित परिणाम केवल एक बार होने वाली गतिविधियां नहीं हैं। उनके अनुसार, ये प्लेटफॉर्म, फ्रेमवर्क और गाइडलाइंस हैं, जो ब्रिक्स के तीसरे दशक में आगे भी एंगेजमेंट को जारी रखेंगे।
इसमें रेजिलिएंस और सस्टेनेबिलिटी के तहत सामने रखी गई कृषि से जुड़ी पहलें भी शामिल हैं।
ग्लोबल साउथ के लिए उपयोगी परिणामों पर जोर
13 सितंबर की ब्रीफिंग में ग्लोबल साउथ के लिए प्रासंगिक परिणाम विकसित करने पर भी जोर दिया गया। डलेला ने कहा कि 12 और 13 सितंबर की चर्चाओं में एक साझा विचार यह था कि ब्रिक्स ऐसे परिणाम और डिलिवरेबल्स विकसित करे जो ग्लोबल साउथ के लिए व्यापक रूप से प्रासंगिक हों।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 13 सितंबर के ओपन सेशन में कहा कि ब्रिक्स में विकसित समाधान केवल ब्रिक्स तक सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि उन्हें ग्लोबल साउथ की जरूरतों के अनुरूप अपनाने और उपलब्ध कराने योग्य होना चाहिए।
कृषि पर सीमित लेकिन स्पष्ट फोकस
दोनों दिनों की प्रेस ब्रीफिंग को देखें तो कृषि शिखर सम्मेलन का प्रमुख चर्चा विषय नहीं रही। ब्रीफिंग में ग्लोबल गवर्नेंस रिफॉर्म, भू-राजनीतिक मुद्दों, ट्रेड, एनर्जी, इनोवेशन और भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के व्यापक परिणामों पर अधिक चर्चा हुई।
फिर भी, कृषि से जुड़े कुछ स्पष्ट परिणाम सामने आए। इनमें फूड सिक्योरिटी, एग्रो-इकोलॉजी के लिए ब्रिक्स सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस, डिजिटल एग्रीकल्चर के लिए ब्रिक्स नेटवर्क और क्लाइमेट-रेजिलिएंट एग्रीकल्चर शामिल हैं।
13 सितंबर की ब्रीफिंग में कृषि को ट्रेड, इन्वेस्टमेंट, हेल्थ और टेक्नोलॉजी के साथ ब्रिक्स के डेवलपमेंट-ओरिएंटेड कोऑपरेशन के क्षेत्रों में भी शामिल किया गया।
हालांकि, दोनों प्रेस ब्रीफिंग में कृषि से जुड़े इन परिणामों के लिए विशिष्ट परियोजनाओं, वित्तीय प्रावधानों, फसलों, तकनीकों, समयसीमा या किसानों के लिए प्रत्यक्ष योजनाओं का विवरण नहीं दिया गया।
इसलिए 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से कृषि क्षेत्र के लिए मुख्य संदेश एग्रो-इकोलॉजी, डिजिटल एग्रीकल्चर और क्लाइमेट-रेजिलिएंट एग्रीकल्चर को ब्रिक्स के व्यापक रेजिलिएंस, सस्टेनेबिलिटी और डेवलपमेंट कोऑपरेशन के ढांचे में शामिल किए जाने का है।
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