राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

साहीवाल गाय ने दिया बद्री बछिया को जन्म, OPU-IVF तकनीक से वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता

14 सितंबर 2026, नई दिल्ली: साहीवाल गाय ने दिया बद्री बछिया को जन्म, OPU-IVF तकनीक से वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता – देशी मवेशियों की नस्लों के संरक्षण, उनकी संख्या बढ़ाने और आनुवंशिक सुधार की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। करनाल स्थित आईसीएआर-राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-एनडीआरआई) और पंतनगर स्थित जी.बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने ओवम पिक-अप और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (OPU-IVF) तकनीक की मदद से एक स्वस्थ बद्री बछिया का सफल जन्म कराया है। इसके लिए बद्री नस्ल के भ्रूण को साहीवाल नस्ल की गाय में प्रत्यारोपित किया गया था। बछिया का जन्म 11 सितंबर 2026 को हुआ।

बद्री मवेशी उत्तराखंड का महत्वपूर्ण देशी आनुवंशिक संसाधन हैं और इन्हें उत्तराखंड का राज्य पशु माना जाता है। इस उपलब्धि से बद्री नस्ल के मूल्यवान जर्मप्लाज्म के संरक्षण, तेजी से गुणन और आनुवंशिक सुधार के लिए उन्नत प्रजनन तकनीक के इस्तेमाल की संभावनाएं मजबूत हुई हैं।

आईसीएआर-एनडीआरआई और जी.बी. पंत विश्वविद्यालय का सहयोग

यह उपलब्धि आईसीएआर-एनडीआरआई, करनाल और जी.बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के आपसी सहयोग से हासिल की गई है। कार्यक्रम के लिए उत्तराखंड जैव प्रौद्योगिकी परिषद, हल्दी से आर्थिक मदद मिली है। आईसीएआर-एनडीआरआई के निदेशक डॉ. धीर सिंह ने कहा कि ओपीयू-आईवीएफ जैसी उन्नत प्रजनन तकनीकें बेहतरीन मादा जर्मप्लाज्म के तेजी से गुणन में मदद कर सकती हैं। इससे बद्री मवेशियों की नस्ल सुधार और जर्मप्लाज्म संरक्षण के लिए व्यवस्थित कार्यक्रम बनाने में भी सहायता मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह सफल जन्म नस्ल के संरक्षण और आनुवंशिक सुधार के लिए तकनीक आधारित तरीकों को मजबूत करने की अहम नींव तैयार करेगा।

2023 में शुरू हुआ था अनुसंधान कार्यक्रम

यह अनुसंधान कार्यक्रम वर्ष 2023 में जी.बी. पंत विश्वविद्यालय के तत्कालीन कुलपति डॉ. एम.एस. चौहान की पहल और नेतृत्व में शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य बद्री मवेशियों के जर्मप्लाज्म के संरक्षण और गुणन के लिए उन्नत प्रजनन तकनीक विकसित करना था।

पिछले तीन वर्षों में दोनों संस्थानों की वैज्ञानिक टीमों ने बद्री मवेशियों के लिए OPU-IVF, भ्रूण उत्पादन और भ्रूण प्रत्यारोपण की प्रक्रियाएं स्थापित करने की दिशा में काम किया।

ऐसे तैयार किया गया बद्री भ्रूण

OPU-IVF कार्यक्रम के तहत आनुवंशिक रूप से मूल्यवान चुनिंदा बद्री दाता गायों से अल्ट्रासाउंड-निर्देशित ओवम पिक-अप के जरिए अंडे यानी ओसाइट्स एकत्र किए गए। इन अंडों को परिपक्व करने के बाद उत्तराखंड पशुधन विकास बोर्ड से प्राप्त आनुवंशिक रूप से बेहतर बद्री सांड के वीर्य की मदद से इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन किया गया। इस प्रक्रिया से तैयार भ्रूणों को नियंत्रित प्रयोगशाला परिस्थितियों में विकसित किया गया। इसके बाद उन्हें उपयुक्त प्राप्तकर्ता गायों में प्रत्यारोपित किया गया। इसी प्रक्रिया के तहत एक बद्री भ्रूण को साहीवाल प्राप्तकर्ता गाय में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया, जिसने 11 सितंबर को स्वस्थ बद्री बछिया को जन्म दिया।

अगले 5-7 दिनों में एक और बद्री बछड़े की उम्मीद

वैज्ञानिकों के अनुसार, एक अन्य समन्वित संकरित प्राप्तकर्ता गाय के भी अगले 5-7 दिनों में बद्री बछड़े को जन्म देने की उम्मीद है। इससे इस तकनीक के जरिए बद्री नस्ल के गुणन की संभावनाओं को और बल मिलेगा।

बेहतरीन बद्री गायों की क्लोनिंग पर भी काम

इस कार्यक्रम के तहत अधिक दूध देने वाली और बेहतरीन बद्री गायों की क्लोनिंग पर भी काम किया जा रहा है। वैज्ञानिक टीम ने अनुसंधान के विभिन्न चरणों के जरिए क्लोन किए गए बद्री भ्रूण सफलतापूर्वक तैयार किए हैं। अगले चरण में OPU-IVF और क्लोनिंग से तैयार भ्रूणों को उपयुक्त साहीवाल, संकरित और बद्री प्राप्तकर्ता गायों में प्रत्यारोपित करने की योजना है। इसका उद्देश्य बेहतरीन बद्री जर्मप्लाज्म की संख्या तेजी से बढ़ाना और इस देशी नस्ल के दीर्घकालिक संरक्षण एवं आनुवंशिक सुधार में योगदान देना है।

देसी नस्लों के संरक्षण में तकनीक की अहम भूमिका

OPU-IVF तकनीक से बद्री बछड़े का सफल उत्पादन उत्तराखंड में बद्री मवेशियों के जर्मप्लाज्म के संरक्षण, गुणन और आनुवंशिक सुधार के लिए तकनीक आधारित कार्यक्रम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इस तकनीक के जरिए आनुवंशिक रूप से बेहतर मादा पशुओं से कई भ्रूण तैयार किए जा सकते हैं, जिससे पारंपरिक प्रजनन की तुलना में बेहतर जर्मप्लाज्म के गुणन की दर बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

यह उपलब्धि हिमालयी क्षेत्र में पशुधन के टिकाऊ विकास के लिए स्थानीय आनुवंशिक संसाधनों को उन्नत प्रजनन जैव-तकनीक के साथ जोड़ने की संभावनाओं को भी सामने लाती है। आईसीएआर-एनडीआरआई और जी.बी. पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय देसी पशु नस्लों के संरक्षण, आनुवंशिक सुधार और टिकाऊ उपयोग के लिए अनुसंधान तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की पहलों को मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।

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