खेती के साथ सौर ऊर्जा से भी कमाई करेंगे किसान, पीएम-कुसुम के अगले चरण में नया घटक
13 सितंबर 2026, नई दिल्ली: खेती के साथ सौर ऊर्जा से भी कमाई करेंगे किसान, पीएम-कुसुम के अगले चरण में नया घटक – किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र को ऊर्जा के क्षेत्र से जोड़ने की दिशा में केंद्र सरकार पीएम-कुसुम योजना के अगले चरण में महत्वपूर्ण बदलाव करने जा रही है। योजना के अगले चरण में कृषि-वोल्टेइक ऊर्जा के लिए अलग समर्पित घटक शामिल किया जाएगा। इसके तहत किसान अपनी जमीन पर खेती जारी रखते हुए उसी भूमि पर सौर ऊर्जा का उत्पादन कर अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगे। केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने नई दिल्ली में सातवें एग्रीवोल्टिक्स विश्व सम्मेलन 2026 के पूर्व समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि किसान अब केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि ऊर्जादाता भी बन रहे हैं। सरकार का विशेष ध्यान छोटे और सीमांत किसानों के साथ किसान उत्पादक संगठनों, सहकारी समितियों और पंचायतों को इस व्यवस्था से जोड़ने पर रहेगा।
एक ही जमीन से तीन स्रोतों से आय
कृषि-वोल्टेइक व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि सौर पैनल लगाए जाने के बावजूद किसान अपनी जमीन पर खेती जारी रख सकता है। सौर पैनलों की ऊंचाई और उनकी व्यवस्था इस प्रकार की जा सकती है कि उनके नीचे उपयुक्त फसलों की खेती संभव हो। इससे किसान को जमीन के उपयोग का एक नया विकल्प मिलेगा।
इस व्यवस्था के तहत एक एकड़ भूमि से किसान को तीन प्रकार से आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है। पहला, खेत में उगाई गई फसल से आय होगी। दूसरा, सौर पैनलों से बनने वाली अतिरिक्त बिजली को वितरण कंपनियों को बेचकर आमदनी की जा सकेगी। तीसरा, सौर ऊर्जा से चलने वाले कृषि पंपों के इस्तेमाल से डीजल पर होने वाला खर्च बचाया जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि यह मॉडल किसानों की आय को मौसम, मानसून और बाजार भाव के उतार-चढ़ाव से होने वाले जोखिमों से कुछ हद तक सुरक्षित करने में मदद कर सकता है।
छोटे किसानों पर विशेष ध्यान
देश में बड़ी संख्या में किसान छोटी जोत पर खेती करते हैं। ऐसे में कृषि-वोल्टेइक व्यवस्था किसानों के सामने खेती अथवा सौर ऊर्जा में से किसी एक को चुनने की बाध्यता को कम कर सकती है। जमीन का स्वामित्व किसान के पास ही रहेगा और खेती के साथ ऊर्जा उत्पादन से आय का अतिरिक्त स्रोत तैयार हो सकेगा।
पीएम-कुसुम योजना के अंतर्गत अब तक 29 लाख से अधिक कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़े जाने की जानकारी दी गई है। पिछले वर्ष देश में 16.3 गीगावाट विकेंद्रीकृत सौर क्षमता जोड़ी गई, जिसमें पीएम-कुसुम से 7.6 गीगावाट और पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना से 8.7 गीगावाट क्षमता शामिल रही। फसलों के अनुरूप तकनीक विकसित करने पर जोर
कृषि-वोल्टेइक तकनीक को अलग-अलग फसलों और जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप विकसित करने के लिए अनुसंधान भी किया जा रहा है। पुणे स्थित ग्रामीण नवाचार केंद्र में 30 फसलों पर 17 प्रकार की सौर प्रणालियों का परीक्षण किए जाने की जानकारी दी गई है। इसका उद्देश्य ऐसी तकनीक विकसित करना है, जिससे फसल उत्पादन और सौर ऊर्जा उत्पादन दोनों को बेहतर ढंग से संचालित किया जा सके।
कृषि क्षेत्र में इस बदलाव के लिए तकनीकी मानव संसाधन तैयार करने पर भी जोर है। देश में अब तक 70 हजार ‘सूर्य मित्रों’ को प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जो सौर ऊर्जा प्रणालियों के संचालन और रखरखाव में किसानों की सहायता करेंगे।
अक्टूबर में होगा एग्री वोल्टिक विश्व सम्मेलन
नई दिल्ली के भारत मंडपम में 21 से 23 अक्टूबर 2026 तक सातवां एग्री वोल्टिक विश्व सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। इसमें विभिन्न देशों के नीति निर्माता, शोधकर्ता, किसान, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल हिस्सा लेंगे। सम्मेलन में कृषि और सौर ऊर्जा के समन्वय से खाद्य, ऊर्जा और रेशा उत्पादन को बढ़ावा देने पर विचार किया जाएगा।
कृषि-वोल्टेइक व्यवस्था को लेकर सरकार की यह पहल सफल होती है तो आने वाले समय में खेत केवल खाद्यान्न उत्पादन का माध्यम नहीं रहेंगे, बल्कि वे किसानों के लिए खाद्य और ऊर्जा दोनों से आय अर्जित करने का केंद्र भी बन सकते हैं।
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