पीएम किसान मानधन योजना के सात साल पूरे, 25 लाख किसानों को मिल रहा पेंशन का सहारा
14 सितंबर 2026, नई दिल्ली: पीएम किसान मानधन योजना के सात साल पूरे, 25 लाख किसानों को मिल रहा पेंशन का सहारा – छोटे और सीमांत किसानों को बुढ़ापे में आर्थिक सहारा देने वाली प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (पीएम-केएमवाई) ने 12 सितंबर को अपने सात साल पूरे कर लिए। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार फरवरी 2026 तक इस स्वैच्छिक पेंशन योजना से करीब 24.96 लाख किसान जुड़ चुके हैं और अब तक इस पर लगभग 540.66 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं।
यह योजना 12 सितंबर 2019 को शुरू की गई थी। इसका मकसद खेती पर निर्भर उन परिवारों को सामाजिक सुरक्षा देना है, जिनके पास न तो नियमित आय का कोई साधन है और न ही रिटायरमेंट के बाद कोई पेंशन व्यवस्था। मंत्रालय का कहना है कि यह योजना किसानों को बुढ़ापे में “आर्थिक स्थिरता और सम्मान के साथ जीवन जीने” में मदद करती है।
किसे मिलती है पेंशन, कितना करना होता है अंशदान
पीएम-केएमवाई के तहत 18 से 40 साल की उम्र के वे छोटे और सीमांत किसान आवेदन कर सकते हैं, जिनके पास 2 हेक्टेयर तक खेती योग्य जमीन है। नामांकन के समय किसान की उम्र के हिसाब से हर महीने 55 रुपये से लेकर 200 रुपये तक का अंशदान तय होता है। खास बात यह है कि किसान जितनी राशि जमा करता है, उतनी ही राशि केंद्र सरकार भी अपनी ओर से इस पेंशन कोष में जमा करती है।
60 साल की उम्र पूरी होने के बाद पात्र किसान को हर महीने कम से कम 3,000 रुपये की पेंशन मिलनी शुरू हो जाती है। अगर इस बीच किसान की मृत्यु हो जाती है, तो उसके जीवनसाथी को पारिवारिक पेंशन के तौर पर 50 प्रतिशत यानी 1,500 रुपये प्रतिमाह मिलते रहते हैं, जिससे परिवार को नियमित आय का सहारा बना रहता है।
नामांकन में असमानता, हरियाणा-बिहार सबसे आगे
आंकड़ों पर गौर करें तो योजना से जुड़े किसानों में क्षेत्रीय असंतुलन साफ नजर आता है। सबसे ज्यादा नामांकन हरियाणा से हुआ है, जहां करीब 5.75 लाख किसान इस योजना से जुड़े हैं। इसके बाद बिहार का नंबर आता है, जहां लगभग 3.46 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है।
हालांकि विशेषज्ञ मानते हैं कि देश में 10 से 12 करोड़ छोटे और सीमांत किसान परिवार हैं, इस लिहाज से 24.96 लाख का नामांकन अभी भी बहुत कम है। योजना का लाभ अभी कुछ ही राज्यों में केंद्रित नजर आ रहा है, जबकि बाकी राज्यों में जागरूकता और पहुंच बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही है।
पीएम-केएमवाई का संचालन कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तहत आने वाले किसान कल्याण निदेशालय की देखरेख में होता है, जबकि पेंशन कोष का प्रबंधन भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) करता है। इच्छुक किसान अपने नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) पर आधार कार्ड, बैंक पासबुक और आयु प्रमाण जैसे दस्तावेज लेकर जाकर पंजीकरण करा सकते हैं। इसके अलावा राज्य सरकारों के कृषि विभाग और पंचायत स्तर के शिविरों में भी समय-समय पर विशेष नामांकन अभियान चलाए जाते हैं।
गौरतलब है कि पीएम-केएमवाई, आय सहायता देने वाली पीएम-किसान सम्मान निधि से अलग योजना है। जहां पीएम-किसान के तहत हर साल किसानों के खाते में सीधे राशि भेजी जाती है, वहीं पीएम-केएमवाई एक अंशदायी पेंशन व्यवस्था है, जिसमें किसान की जमा राशि पर सरकार बराबर का योगदान जोड़ती है। कई बार जागरूकता की कमी के चलते किसान इन दोनों योजनाओं को एक ही समझ लेते हैं, जिससे पेंशन योजना में नामांकन प्रभावित होता है।
पीएम-केएमवाई जैसी पेंशन योजनाएं छोटे किसानों के लिए दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा का जरिया हैं, खासकर उन परिवारों के लिए जिनके पास खेती के अलावा कोई और स्थायी आय स्रोत नहीं है। कृषि-इनपुट कारोबार और ग्रामीण वित्तीय संस्थानों के लिए यह आंकड़े इस बात के संकेत हैं कि किसान परिवारों में सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को लेकर जागरूकता बढ़ाने की अभी काफी गुंजाइश बाकी है। जो किसान अभी तक इस योजना से नहीं जुड़े हैं, वे नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) या श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के पोर्टल के जरिए आवेदन कर सकते हैं।
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