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फसल की खेती (Crop Cultivation)

खेख्सा की लाभदायक खेती

बाजार में अच्छे दाम किसान भाईयों के लिए एक अतिरिक्त आय का साधन भी होता है। वर्तमान समय में जब खेख्सा का फल बाजार में आता है तो उसका मूल्य रूपये 90 से 100 रूपये तक प्रति किग्रा तक मिलती है। इससे किसान की आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होती है। खेक्सा की सब्जी बहुत स्वादिष्ट होता है तथा मानव संतुलित आहार में एक महत्वपूर्ण भाग भी होता है। खेख्सा की सब्जी पौष्टिक गुणों से मालामाल होता है। खेख्सा के हरे रंग वाले फलों की सब्जी बनाई जाती है, जिसमें 9-10 कड़े बीज होते हैं।

जलवायु
खेख्सा गर्म एवं नम जलवायु की फसल है। खेख्सा की खेती उन स्थानों पर सफलतापूर्वक होती है, जहां औसत वर्षा 1500-2500 मिली. होती है और तापमान 20-30 डिग्री सेन्टीग्रेड है।

खेख्सा के लिए भूमि
खेख्सा की खेती विभिन्न प्रकार की मिट्टी में उगाई जा सकती है। परन्तु इसकी खेती रेतीली भूमि जिसमें पर्याप्त मात्रा में जैविक पदार्थ हो तथा जल निकास की उचित व्यवस्था हो, अच्छी रहती है। इसके साथ ही मृदा का पी.एच. मान 6-7 के बीच होना चाहिए। खेख्सा अम्लीय भूमि के प्रति संवेदनशील होती है।

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बुवाई समय
खेख्सा के बीजों की बुवाई का समय जून-जुलाई है। बीज के साथ-साथ खेख्सा का प्रर्वधन उसके वानस्पतिक अंगों से भी किया जाता है। बीजों के द्वारा प्रवर्धन से 1:1 के अनुपात में नर व मादा पौधे मिलते हैैं। इसलिए खेख्सा की फसल के लिए बीजों का प्रयोग नहीं करना चाहिए। खेख्सा की खेती से अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए प्रर्वधन वानस्पतिक भाग अर्थात् जड़ के कन्द द्वारा करना चाहिए।

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किस्में
इंदिरा कंकोड़-1, अम्बिका-12-1, अम्बिका-12-2, अम्बिका-12-3

बीज मात्रा
सही बीज जिसमें कम से कम 70-80 प्रतिशत तक अंकुरण की क्षमता हो। ऐसे बीज की 8-10 किग्रा. प्रति हेक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है।

बुवाई विधि
खेख्सा के फसल से अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए खेत में पौधों की संख्या पर्याप्त होना आवश्यक है। इस फसल की बुवाई अच्छी प्रकार तैयार खेत में क्यारी बनाकर अथवा गड्ढों में किया जात है। गड्ढे की आपस में दूरी 2&2 मीटर रखनी चाहिए। तथा प्रत्येक गड्ढे में 2-3 बीज की बुवाई करते हैं। और इस प्रकार 4&4 मीटर के प्लाट में कुल 9 गड्ढे बनते हैं। जिसमें बीच वाले गड्ढे में नर पौधा रखते हैं तथा बाकी 8 गड्ढों में मादा पौधों को रखते हैं। यह भी ध्यान रखना चाहिए कि एक गड्ढे में एक ही पौधा रखा जाता है।

खाद व उर्वरक
खेख्सा की खेती से अधिक लाभ लेने के लिए संतुलित पोषण दें। सामान्यतया 200 से 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर अच्छी सड़ी हुई गोबर की खाद खेत की अंतिम जुताई के समय खेत में डालकर मिट्टी में मिला देना चाहिए। इसके अलावा 65 किग्रा. यूरिया, 375 किग्रा. एसएसपी तथा 67 किग्रा. एमओपी प्रति हे. देना चाहिए।

सिंचाई व निंदाई गुड़ाई
फसल की बुवाई के तुरन्त बाद खेत में हल्की सिंचाई करनी चाहिए। बरसात में सिंचाई की आवश्यकता नहीं होती, परन्तु दो वर्षा के समय में अधिक अन्तर होने पर सिंचाई करनी चाहिए। खेत में आवश्यकता से अधिक पानी को बाहर निकालने के लिए जल निकास की भी व्यवस्था हो क्योंकि अधिक पानी से बीज या कन्द सड़ सकता है। 2-3 बार निंदाई-गुड़ाई करना आवश्यक है।

फसल प्रबन्धन
इस पर बहुत कम कीट व व्याधियों का प्रकोप होता है। परन्तु फल मक्खी खेख्सा की पत्तियों व फलों को अधिक नुकसान पहुॅचाते हैं। रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड या क्विनालफॉस 25 ई.सी. की 2-3 मिली मात्रा प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव कर फसल की सुरक्षा की जा सकती है।