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फसल की खेती (Crop Cultivation)

तीसरी फसल से भू-जल नीचे गया

जल नीति संगोष्ठी में मुख्यमंत्री

3 अक्टूबर 2022, भोपाल । तीसरी फसल से भू-जल नीचे गया – मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि मध्यप्रदेश जल उपयोग के लिए पूर्णत: सजग है। वर्ष 2003 के बाद प्रदेश में पानी रोक कर सिंचाई क्षमता में वृद्धि की गई है। प्रदेश में सिंचाई क्षमता साढ़े सात लाख हेक्टेयर से बढ़ कर 42 लाख हेक्टेयर तक पहुँच गई है। हम कम पानी में अधिक और प्रभावी सिंचाई व्यवस्था के लिए प्रतिबद्ध हैं। इसके लिए केनाल सिस्टम के स्थान पर प्रेशर पाईप से सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। उद्देश्य अधिक से अधिक पानी बचाना है। श्री चौहान म.प्र. राज्य जल नीति-2022 पर मंत्रालय में हुई जल विशेषज्ञों और बुद्धिजीवियों की संगोष्ठी को संबोधित कर रहे थे।

श्री चौहान ने कहा है कि क्रॉप पेटर्न अब बदल रहा है। खेती में तीसरी फसल लेने की व्यवस्था ने प्रवेश कर लिया है। यह फसल प्राय: गर्मी के दिनों में ली जा रही है, जो भू-जल पर आधारित है। इससे उत्पादन तो बढ़ रहा है पर भू-जल स्तर निरंतर नीचे जा रहा है। अधिक सिंचाई वाली फसलों के कारण नदियाँ भी दम तोड़ रही हैं। इन मुद्दों पर विचार आवश्यक है। उद्योगों में भी पानी की मांग निरंतर बढ़ रही है। भविष्य में पानी की उपलब्धता और मांग को देखते हुए रणनीति बनाना आवश्यक है। पीने का पानी आज भी बहुत से ग्रामों और बसाहटों में बड़ी समस्या है। भविष्य में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करना बढ़ी चुनौती होगी। नदियों के पुनर्जीवन के लिए जन-सामान्य की संवेदनशीलता को जागृत करते हुए कार्ययोजना बनाना और उसका क्रियान्वयन आवश्यक है।

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संगोष्ठी में जल संसाधन मंत्री श्री तुलसी सिलावट, अटल बिहारी वाजपेयी नीति विश्लेषण संस्थान के प्रो. सचिन चतुर्वेदी, मुख्य सचिव श्री इकबाल सिंह बैंस, अपर मुख्य सचिव जल संसाधन श्री एस.एन. मिश्रा, वरिष्ठ अधिकारी, जल विशेषज्ञ तथा सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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