मूंगफली की खेती से होगी अच्छी कमाई, बुवाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान
16 जून 2026, नई दिल्ली: मूंगफली की खेती से होगी अच्छी कमाई, बुवाई से पहले इन बातों का रखें ध्यान – खरीफ सीजन में मूंगफली किसानों के लिए नकदी देने वाली प्रमुख फसलों में से एक है। यदि किसान बुवाई से पहले खेत की सही तैयारी करें, उन्नत किस्मों का चयन करें और समय पर सिंचाई व उर्वरक प्रबंधन अपनाएं, तो उत्पादन और मुनाफे दोनों में बढ़ोतरी की जा सकती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मूंगफली की अच्छी पैदावार के लिए मौसम, मिट्टी, बीजोपचार और सिंचाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
खेत की तैयारी
मूंगफली की खेती के लिए लगभग 70 से 90 फारेनहाइट तापमान उपयुक्त माना जाता है। फसल के परिपक्व होने के समय ठंडी रातें और 50 से 125 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा अच्छी पैदावार के लिए लाभदायक होती हैं।
चूंकि मूंगफली का विकास मिट्टी के अंदर होता है, इसलिए इसकी खेती के लिए अच्छी जल निकासी वाली भुरभुरी दोमट तथा रेतीली दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त रहती है। मिट्टी में पर्याप्त कैल्शियम और मध्यम मात्रा में जैविक पदार्थ होना चाहिए। खेती के लिए मिट्टी का पीएच मान 5 से 8.5 के बीच होना बेहतर माना जाता है।
खेत की तैयारी के दौरान सामान्य रूप से 12 से 15 सेंटीमीटर गहरी जुताई करना पर्याप्त रहता है।
बुवाई का समय और बीज की मात्रा
सिंचित क्षेत्रों में मूंगफली की बुवाई का सबसे उपयुक्त समय जून के प्रथम सप्ताह से जुलाई के प्रथम सप्ताह तक माना जाता है।
झुमका किस्म के लिए प्रति हेक्टेयर लगभग 100 किलोग्राम बीज (गुली) की आवश्यकता होती है। वहीं विस्तारी और अर्द्ध-विस्तारी किस्मों के लिए 60 से 80 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर पर्याप्त रहता है।
झुमका किस्म में कतार से कतार की दूरी 30 सेंटीमीटर तथा पौधे से पौधे की दूरी 10 सेंटीमीटर रखनी चाहिए। विस्तारी और अर्द्ध-विस्तारी किस्मों में कतार से कतार की दूरी 45 सेंटीमीटर तथा पौधों के बीच 15 सेंटीमीटर की दूरी उपयुक्त मानी जाती है।
उन्नत किस्में
मूंगफली की खेती के लिए एसबी-11, जेएल-24, जे-38 (जीजी-7), टीएजी-24, जीजी-2, आरजी-138, आरजी-141, कादरी-3, एचएनजी-10, आरएसबी-87, एम-13, एम-335, एमए-10, चन्द्रा तथा सीएसजीएम 84-1 (कौशल) जैसी उन्नत किस्मों का चयन किया जा सकता है।
बीजोपचार अवश्य करें
अच्छे अंकुरण और रोगों से बचाव के लिए बीजोपचार करना जरूरी है। बीज को पहले कवकनाशी से उपचारित करें। इसके लिए प्रति किलोग्राम बीज पर 3 ग्राम थायरम या कार्बेन्डाजिम अथवा 2 ग्राम मेंकोजेब का उपयोग किया जा सकता है।
इसके बाद कीटनाशी उपचार के लिए 40 किलोग्राम बीज पर 1 लीटर क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी का उपयोग करें। अंत में बीज को राइजोबियम कल्चर और फास्फेट विलेयक जीवाणु खाद से उपचारित करें।
उर्वरक प्रबंधन
मूंगफली की अच्छी पैदावार के लिए प्रति हेक्टेयर 43 किलोग्राम यूरिया, 250 किलोग्राम स्फूर तथा 100 किलोग्राम म्यूरेट ऑफ पोटाश का उपयोग करना चाहिए।
फास्फोरस, पोटाश और नत्रजन की आधी मात्रा अंतिम जुताई के समय या बुवाई के दौरान कतारों में देना लाभकारी रहता है।
सिंचाई का रखें विशेष ध्यान
मूंगफली की फसल में शाखाएं बनने, फूल आने और फलियों के विकास के समय सिंचाई अत्यंत आवश्यक होती है। इन अवस्थाओं में नमी की कमी होने पर उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार जायद मौसम में मूंगफली की खेती के लिए फव्वारा (स्प्रिंकलर) सिंचाई पद्धति अधिक लाभकारी साबित हुई है। इससे पानी की बचत के साथ फसल को समान रूप से नमी मिलती है।
किसानों के लिए सलाह
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि किसान समय पर बुवाई, उन्नत किस्मों का चयन, बीजोपचार, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और जरूरत के अनुसार सिंचाई अपनाकर मूंगफली की फसल से बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। मौसम को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिक खेती के तरीके अपनाने से लागत कम और मुनाफा अधिक हासिल किया जा सकता है।
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