नरवाई जलाने से बंजर हो रही खेतों की कोख
राज्य सरकार व कृषि विभाग के अधिकारियों की तमाम समझाइशों के बाद भी किसान इसे नजरअंदाज कर बड़ी नादानी कर रहे हैं। फलत: प्रकृति, पर्यावरण और जान-माल की क्षति के रूप में समाज को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही
संपादकीय (Editorial) में भारत में कृषि, कृषि नीतियों, किसानों की प्रतिक्रिया और भारतीय परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता से संबंधित नवीनतम समाचार और लेख शामिल हैं। संपादकीय (Editorial) में अतिथि पोस्ट और आजीविका या ग्रामीण जीवन से संबंधित लेख भी शामिल हैं।
राज्य सरकार व कृषि विभाग के अधिकारियों की तमाम समझाइशों के बाद भी किसान इसे नजरअंदाज कर बड़ी नादानी कर रहे हैं। फलत: प्रकृति, पर्यावरण और जान-माल की क्षति के रूप में समाज को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही
चौथी तिमाही में 56 प्रतिशत की वृद्धि नई दिल्ली। सोनालीका इंटरनेशल ट्रैक्टर्स लि. (आई टी एल) ने वित्तीय वर्ष 2017-18 में 1 लाख ट्रैक्टर्स की बिक्री कर एक रिकार्ड बनाया है। सोनालीका ने बहुत ही कम समय में 22 प्रतिशत
प्रदेश में 20 जिलों के कृषकों का लहसुन भावांतर योजना में शामिल कर 31 मार्च तक पंजीयन कराया गया है। वर्तमान में मालवा की मंडियों में 600 रु. से 2800 रुपये प्रति क्विं. लहसुन खरीदा जा रहा है। भावांतर में
फसलोत्पादन में होने वाला व्यय जानकारी के अभाव एवं बिना ठोस योजना के अपव्यय में बदल जाता है। प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से छोटी-छोटी परंतु महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रख कर न केवल व्यय में कटौती की जा सकती
कृषि विभाग ने दी चेतावनी (विशेष प्रतिनिधि) भोपाल। प्रदेश में हुई कम वर्षा की स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को चेतावनी दी है कि पानी की पर्याप्त उपलब्धता हो तभी जायद में उड़द -मूंग लगाएं, अन्यथा फसल
भारत जैसे विकासशील देश में अनाज के कुल उत्पादन का लगभग 25 प्रतिशत भाग विभिन्न कारणों से उपभोग उपयुक्त नहीं रह पाता। जिसका कारण भण्डारण की समुचित व्यवस्था का अभाव प्रमुख है। किन्तु भारतवर्ष जैसे विशाल देश और विशाल कृषि
थ्रेशर का उपयोग केवल फसलों के कटने के बाद केवल एक से दो महीने ही होता है। उसके उपरांत थ्रेशर को किसी सुरक्षित स्थान में रख देना चाहिए ताकि थ्रेशर के पुर्जो का मौसम और पानी से खराब होने की
म.प्र. बजट- 2018-19 खेती पर सारा दारोमदार (विशेष प्रतिनिधि) भोपाल। म.प्र. में चुनावी साल को देखते हुए वित्त मंत्री श्री जयंत मलैया ने वर्ष 2018-19 के बजट में किसानों को साधने की कोशिश कर कृषि को 37 हजार 498 करोड़
भारत कृषि प्रधान देश है। किसान अन्नदाता है। ऐसा कहकर हम उल्लासित हो जाते हैं, लेकिन वास्तव में आर्थिक उदारीकरण के युग में ये जुमले हास्यास्पद बन चुके हैं। क्योंकि खेती की लागत बढऩे से कृषि कर्म घाटे का सौदा
कुल मिलाकर हालात ऐसे हो गए हैं, जो इस ओर इशारा कर रहे हैं कि आने वाले समय में जलसंकट और विकराल रूप लेगा। देश की बढ़ती आबादी के लिये पेयजल के अलावा बड़ी मात्रा में खेती के लिये पानी