जीरे की सफल खेती
बुवाई जीरे की बुवाई मध्य नवम्बर के आसपास कर देनी चाहिए। अगेती या पछेती बुवाई में बीमारियों अथवा कीटों के प्रकोप की संभावना बहुत अधिक रहती है जिसके कारण फसल की पैदावार पर बहुत ही प्रतिकूल असर होता है। जीरे
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंसंपादकीय (Editorial) में भारत में कृषि, कृषि नीतियों, किसानों की प्रतिक्रिया और भारतीय परिदृश्य में इसकी प्रासंगिकता से संबंधित नवीनतम समाचार और लेख शामिल हैं। संपादकीय (Editorial) में अतिथि पोस्ट और आजीविका या ग्रामीण जीवन से संबंधित लेख भी शामिल हैं।
बुवाई जीरे की बुवाई मध्य नवम्बर के आसपास कर देनी चाहिए। अगेती या पछेती बुवाई में बीमारियों अथवा कीटों के प्रकोप की संभावना बहुत अधिक रहती है जिसके कारण फसल की पैदावार पर बहुत ही प्रतिकूल असर होता है। जीरे
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंमिट्टी एवं जलवायु धनिया के लिए दोमट, मटियार या कछारी भूमि जिसमें पर्याप्त मात्रा में जीवांश और अच्छी जल धारण की क्षमता हो, उपयुक्त होती है। भूमि में जल निकास की अच्छी व्यवस्था होनी चाहिए। मिट्टी का पी.एच. 6.5 से
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करें(विशेष प्रतिनिधि) नई दिल्ली। निर्यातकों ने सरकार से कहा है कि कृषि उत्पादों की कमी वाले देशों के साथ वस्तु-विनिमय व्यापार प्रारंभ किया जाएए जिससे भारत से होने वाले कृषि और संबंधित वस्तुओं के निर्यात में तेजी लाई जा सके। अनेक
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंजलवायु : प्याज ठण्डे मौसम की फसल है। इसे सम जलवायु में अच्छी तरह से उगाया जा सकता है। प्याज की फसल के लिए बल्ब बनने के पूर्व 12.80 – 210 सेन्टीग्रेड एवं बल्ब के विकास हेतु 15.50 – 250
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंदलहनी फसलों में चना एक महत्वपूर्ण फसल है। भारत में उगाई जाने वाली दलहनी फसलों की कुल पैदावार का लगभग आधा हिस्सा चने से प्राप्त होता है। चने का मुख्य उपयोग दाल-बेसन व हरे चारे का उपयोग सब्जी के रूप
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंपन्ना। पन्ना नगर के टिकुरिया मोहल्ला निवासी विवेक खरे डेयरी व्यवसाय से रोजाना 1500 रुपये की आय अर्जित कर रहे हैं। विवेक को पशुपालन विभाग के अधिकारियों द्वारा आचार्य विद्यासागर गौ-संवर्धन योजना में स्थापित डेयरी इकाई के बारे में जानकारी
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंवर्तमान परिस्थितियों में जहां कई परम्पराएं संग्रहालयों में सिमटी दिखाई देती हैं वहीं कृषि से जुड़े कई रीति-रिवाज भी अब यदा- कदा ही दिखाई देते हैं। गोबर से लिपा आंगन, मेमने का दूध पीने वाला तरीका कई आधुनिक और शहरी
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंबंजर भूमि का देश अपनी आजादी कैसे बचा पायेगा? यह सवाल महाराष्ट्र, यवतमाल के एक किसान सुभाष शर्मा पूछ रहे हैं। शर्माजी पुराने जैविक किसान हैं, कई वर्षों के अनुभव से उन्होंने मिट्टी का महत्व जाना-समझा है। अन्न सुरक्षा तथा
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंदेश की राष्ट्रीय टिकाऊ खेती मिशन का प्रमुख घटक मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर उर्वरकों की अनुशंसा कम लागत पर अधिक उत्पादन का आधार बन सकती है। संतुलित पोषक तत्व फसल को उपलब्ध कराने के
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंइंदौर। कुपोषण एक राष्ट्रीय समस्या है, जिससे मध्य प्रदेश भी अछूता नहीं है। यूँ तो प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग बच्चों के कुपोषण को दूर करने के लिए प्रयत्नशील है, लेकिन इस चुनौती से निपटने में कृषि विभाग भी अपना योगदान दे
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