बंजर भूमि पर बिना बीज की ककड़ी
नीमच जिले के 30 किसान ने 100 बीघा बंजर जमीन को सामूहिक एवं संरक्षित खेती की सोच के साथ उपजाऊ बनाया है। जिला मुख्यालय से 17 किलोमीटर दूर राजस्थान की सीमा से लगे सेमार्डा गाँव के नजदीक पहाड़ीनुमा बंजर जमीन
फसल की खेती (Crop Cultivation) से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्राप्त करें। गेहूं, धान, सोयाबीन, मक्का, चना, सरसों, कपास, दालों और तिलहनी फसलों की उन्नत खेती, बुवाई, सिंचाई, पोषण प्रबंधन, रोग एवं कीट नियंत्रण के विशेषज्ञ सुझाव पढ़ें।
नीमच जिले के 30 किसान ने 100 बीघा बंजर जमीन को सामूहिक एवं संरक्षित खेती की सोच के साथ उपजाऊ बनाया है। जिला मुख्यालय से 17 किलोमीटर दूर राजस्थान की सीमा से लगे सेमार्डा गाँव के नजदीक पहाड़ीनुमा बंजर जमीन
जलवायु – इसकी खेती विभिन्न प्रकार की जलवायु में सफलतापूर्वक की जा सकती है। प्याज की वृद्धि पर तापमान व प्रकाशकाल का सीधा प्रभाव पड़ता है। पौधों की बढ़वार के समय कम तापमान व छोटे दिन तथा गांठों के विकास
बनाने की प्रक्रिया:- वर्मीवाश इकाई बड़े बैरल/ड्रम, बड़ी बाल्टी या मिट्टी के घड़े का प्रयोग करके स्थापित की जा सकती है। प्लास्टिक, लोहे या सीमेन्ट के बैरल प्रयोग किये जा सकते हैं जिसका एक सिरा बन्द हो और एक सिरा
आम के उत्पादन एवं क्षेत्रफल की दृष्टिकोण से भारत विश्व में प्रथम स्थान रखता है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि भारत में आम का कुल क्षेत्रफल 2.31 मिलियन हेक्टेयर है जिससे लगभग 15.03 मिलियन टन आम पैदा किया जाता है।
भोपाल। म.प्र. में तीसरी फसल लेने के लिए किसानों का उत्साह बढ़ता जा रहा है। वर्ष दर वर्ष रकबा बढऩे से किसान की आमदनी में भी इजाफा हो रहा है। जायद में तीसरी फसल के रूप में सबसे अधिक मूंग
पोषक तत्व एवं उपयोग :- इसके कोमल, मुलायम फल सब्जी के लिए उपयुक्त होते हैं। इसकी कोमल व मुलायम पत्तियों को भी सब्जी के रूप में उपयोग किया जाता है। इसके सूखे फलों के रेशों को बर्तन साफ करने तथा
जैविक नियन्त्रण: जैविक नियन्त्रण वह प्रक्रिया है जिसमें किसी जीव द्वारा उत्पन्न की गई परिस्थितियों एवं प्रक्रियाओं के कारण दूसरे जीवों (कीट एवं रोगाणुओं) को नष्ट किया जाता है। प्रमुख जैव कीट नियंत्रक एन.पी.वी.: यह एक विषाणु है जिसका पूरा
मिट्टी में फल-सब्जियों को उगते सभी ने देखा होगा। लेकिन बिना मिट्टी के भी फल-सब्जियां पैदा हो सकती हैं। तो सुन कर थोड़ा अटपटा लगेगा। लेकिन ऐसा संभव है- अब वो समय आ गया है… जब वर्टिकल फार्मिंग दुनिया में
प्लास्टिक मल्चिंग का उपयोग सब्जी उत्पादकों और बागवानी करने वाले किसानों के लिये वरदान साबित हो सकता है। इस नई तकनीक अपनाने वालों को 10 से 80 प्रतिशत तक अधिक उपज मिलने की संभावना ज्यादा होती है। हालांकि मल्चिंग का
सब्जियों की पौध तैयार करने से लाभ : सब्जियों कि छोटे बीजो कि बुआई लम्बे क्षेत्रों में करने पर देखभाल संभव नहीं है जो छोटे स्थानों पर आसानी से किया जा सकता है। पौधशाला में पौध तैयार करना आसान है